नई दिल्ली (वीएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 ऐतिहासिक निर्णय’ पुस्तक जारी की। यह कार्यक्रम 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय शताब्दी समारोह का हिस्सा है।
कैप्टन स्मित मच्छार का किया जिक्र
पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत कैप्टन स्मित मच्छार का जिक्र करते हुए की। उन्होंने हाल की घटना में उनके धैर्य, सूझबूझ और साहस की सराहना की। पीएम ने कहा कि कैप्टन स्मित ने गंभीर खतरे के बावजूद दूसरों की जान बचाने के लिए साहस और दृढ़ता का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पराक्रम से देश गौरवान्वित है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी बाद में स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि उनके साहस से सैकड़ों लोगों की जान बची और एक बड़ी त्रासदी टली।
पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, मां गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बातचीत की। उन्होंने देशवासियों से स्मित के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करने की अपील की।
‘100 साल में पीढ़ियां और तकनीक बदली, भरोसा कायम’
यूपीएससी की शताब्दी यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और सिलेबस में भी बदलाव आया, लेकिन यूपीएससी पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष का यह सफर केवल एक संस्था की यात्रा नहीं, बल्कि उस विश्वास और आकांक्षा का भी उत्सव है, जिसे हर साल लाखों युवा लेकर यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होते हैं।
स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी
शताब्दी समारोह के दौरान पीएम मोदी ने यूपीएससी के शताब्दी स्मारक सिक्के और डाक टिकट का विमोचन किया। इसके साथ ही ‘भारत में यूपीएससी और लोक सेवा आयोगों की नीतियों को आकार देने वाले – 100 ऐतिहासिक निर्णय’ नामक पुस्तक भी जारी की गई।
प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था ने देश को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
1 अक्टूबर 1926 को हुई थी स्थापना
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। इसके 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सालभर चलने वाले कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका समापन शताब्दी समारोह के साथ हो रहा है। यूपीएससी के दो दिवसीय कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और यूपीएससी के अधिकारी शामिल हो रहे हैं।
भविष्य की सिविल सेवा पर मंथन
शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रमों में लोक सेवा और सिविल सेवाओं के भविष्य, प्रशासन में नवाचार तथा संस्थागत मूल्यों जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। यूपीएससी के मुताबिक, शताब्दी समारोह का उद्देश्य आयोग की अगली यात्रा के लिए ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी और टेक्नोलॉजी जैसे मूल सिद्धांतों पर भी मंथन करना है।
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