स्वच्छता में सहभागिता का संदेश लेकर गांवों और स्कूलों तक पहुंचा कृषि विज्ञान केन्द्र

Posted On:- 2026-10-05




स्कूली बच्चों से लेकर किसानों तक को किया जागरूक, कृषि अपशिष्ट से कम्पोस्ट बनाने की दी जानकारी

बीजापुर (वीएनएस)। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, बीजापुर द्वारा 17 सितम्बर से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों एवं स्कूलों में लगातार जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ‘स्वच्छता में सहभाग’ की थीम पर आधारित अभियान के माध्यम से किसानों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को स्वच्छता के महत्व से अवगत कराते हुए जनभागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान की शुरुआत कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा केन्द्र परिसर में सामूहिक श्रमदान से की गई। इसके बाद अभियान को ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाते हुए स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।

नन्हे बच्चों ने श्रमदान कर लिया स्वच्छता का संकल्प

अभियान के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र की टीम ने प्राथमिक शाला पनारापारा, प्राथमिक शाला बोरेगांव सहित विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास के परिवेश को साफ-सुथरा रखने के महत्व के बारे में जानकारी दी। बच्चों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से कचरा प्रबंधन एवं हाथ धोने के सही तरीकों के बारे में बताया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक विद्यालय परिसर में श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया। साथ ही अपने घर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने का संकल्प भी लिया।

गांवों में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को किया जागरूक

कृषि विज्ञान केन्द्र की टीम ने बीजापुर जिले के विभिन्न सुदूर ग्रामीण अंचलों में पहुंचकर किसानों एवं ग्रामीणों के बीच चौपाल आयोजित की। ग्रामीणों के साथ मिलकर श्रमदान एवं सफाई अभियान चलाते हुए कचरे के सुरक्षित निपटान के संबंध में जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को बताया कि घर और गांव की स्वच्छता का सीधा संबंध बेहतर स्वास्थ्य और कृषि से है। स्वच्छ वातावरण न केवल बीमारियों से बचाव में सहायक है, बल्कि गांव में स्वस्थ और बेहतर जीवनशैली विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कृषि अपशिष्ट जलाएं नहीं, कम्पोस्ट बनाएं

ग्राम चौपालों के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों से निकलने वाले कृषि अपशिष्ट को जलाने के बजाय उससे कम्पोस्ट खाद तैयार करने की तकनीक की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि कृषि अपशिष्ट का उचित प्रबंधन करने से गांवों एवं खेतों में स्वच्छता बनी रहने के साथ जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह संपूर्ण अभियान कृषि विज्ञान केन्द्र, बीजापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ए.के. सकनी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अभियान में केन्द्र के सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश दिया।



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