मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पीपरछेड़ी में चलाया गया जन-जागरूकता अभियान

Posted On:- 2026-02-01




वन विभाग व एनजीओ अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन की पहल

रायपुर (वीएनएस)। वन-जलवायु परिवर्तन विभाग ने अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन के साथ गरियाबंद वनमंडल अंतर्गत मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और ग्रामीणों में सतत जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से ग्राम पीपरछेड़ी में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य मानव जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को सुनिश्चित करना रहा।

शनिवार को आयोजित यह कार्यक्रम गरियाबंद वनमंडल के परिक्षेत्र पांडुका, उपवन परिक्षेत्र पिपरछेड़ी में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को वन्यजीवों से संभावित खतरों, सुरक्षा उपायों, संघर्ष की स्थिति में अपनाए जाने वाले व्यवहारिक तरीकों तथा शासन की मुआवजा योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

लोककला और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ा जनसरोकार
अभियान को जनसुलभ और प्रभावी बनाने के लिए चित्रकला, पोस्टर, पेंटिंग और लोकनृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए गए। सरल भाषा और सांस्कृतिक माध्यमों के चलते ग्रामीणों की भागीदारी उल्लेखनीय रही और कार्यक्रम एक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आया।

एनजीओ अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन की अहम भूमिका
इस अभियान में अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एनजीओ की फाउंडर अनुभा उपाध्याय ने ग्रामीणों को खुले कुओं, जल स्रोतों और अन्य जोखिमपूर्ण स्थानों को सुरक्षित करने, वन्यजीव गतिविधियों की तत्काल सूचना वन विभाग को देने तथा किसी दुर्घटना या हमले की स्थिति में उपलब्ध शासकीय मुआवजा प्रावधानों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को फूल से धूप बनाने, दोना-पत्तल निर्माण जैसे वैकल्पिक आजीविका से जुड़े प्रशिक्षण भी प्रदान किए।

वृक्षारोपण कर लिया संरक्षण का संकल्प
पर्यावरण संरक्षण के संदेश को मजबूत करने के लिए कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मिलकर पौधारोपण कर वन-संरक्षण और सतत विकास का संकल्प लिया।

“मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता” : शशिगानन्द
कार्यक्रम में वनमंडल अधिकारी शशिगानन्द मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ जनपद अध्यक्ष मीरा ठाकुर और अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन की फाउंडर अनुभा उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

अपने संबोधन में वनमंडल अधिकारी शशिगानन्द ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि वन सुरक्षित रहेंगे, तो पर्यावरण और मानव जीवन दोनों सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने, खुले कुओं को सुरक्षित करने और किसी भी वन्यजीव गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को देने की अपील की।

अंत में अनुभा उपाध्याय ने कहा कि “सशक्त समुदाय ही सुरक्षित जीवन और संरक्षित वन की कुंजी है। वन विभाग, एनजीओ और ग्रामीणों के आपसी सहयोग से ही मानव–वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान संभव है।”

कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर सहित विभागीय अमला और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।



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