सरकारी व्यवस्था पर कम हुआ भरोसा बढ़ेगा

Posted On:- 2026-03-21




सुनील दास

एक सरकार की गलतियों के कारण सरकारी व्यवस्था पर राज्य के लोगों का,राज्य के युवाओं का भरोसा कम हो जाता है तो यह बद से बदतर स्थिति होती है।ऐसे में राज्य में ली जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता है।कई लोग बिना मेहनत,पहुंच व पैसे के बल पर प्रतियोगी परीक्षा में पास हो जाते है या पास कर दिए जाते हैं तो प्रतियोगी परीक्षा के लिए दिन रात मेहनत करने वाले युवाओं को बहुत निराशा होती है।उनकी मेहनत व योग्यता का कोई मतलब नही रह जाता है।राज्य में जब भी प्रतियोगी परीक्षा होती और उसमें जो लोग पास होते हैं माना यही जाता है कि वह गड़बड़ी करके पास हुए हैं, पैसे व पहुंच के बल पर पास हुए हैं।जब इसे सरकार रोकने का प्रयास नही करती है तो माना जाता है कि सरकार के लोग ही इसके पक्ष में हैं,सरकार भी इसके पक्ष में है। जब सीएम से शिकायत की जाए कि प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी हुई तो सीएम शिकायत करने वालों से सबूत मांगे तो युवाओं को बहुत निराशा होती है।

ऐसे में राज्य के लोग ऐसी सरकार व ऐसी सीएम को चुनाव आता है तो बदलने का मन बनाते हैं और बदल कर संदेश देते हैं कि  उन्हें ऐसी सरकार व व्यवस्था नहीं चाहिए जहां प्रतियोगी परीक्षा में वही पास हों जिनकी पहुंच है या जिनके पास पैसा है। पुरानी सरकार की जगह जब नई सरकार आती है तो उसे पता रहता है कि जनता ने पुरानी सरकार को क्यों बदला और वह नई सरकार से क्या चाहती है।ऐसे में नई सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह राज्य के युवाओं व राज्य के लोगों के प्रतियोगी परीक्षा के रिजल्ट पर कम हो रहे भरोसे को बनाने के लिए कोई उपाय करे। इसकी शुरुआत साय सरकार ने पीएससी में हुए भ्रष्टाचार की जांच करा कर की है और कई लोगो की गिरफ्तारी हुई है। जांच से ही पता चला कि पीएससी की परीक्षा में कैसे गड़बड़ी की गई है।इससे ही सरकार को पता चला कि भविष्य में गड़ब़ड़ी रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

साय सरकार ने यह व्यवस्था की कि यदि पीएससी की परीक्षा में पीएससी परीक्षा लेने वाले प्रमुख लोगों के घर के या परिवार के कोई परीक्षा दे रहे है तो उनको पद से हटाया जाएगा यानी वह खुद ही पद पर नही रहेगा। क्योंकि बड़े पद पर रहने वालों ने ही अपने परिवार के लोगों को पीएससी में पास कराने के लिए सारी गड़बडी की थी।इसके बाद कानून बनाकर दंड की व्यवस्था करना भी जरूरी था इसलिए साय सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली व गड़बड़ी रोकने लिए विधेयक-२६ लाया गया है।नए कानून के तहत लोक सेवा प्राधिकरण का गठन होगा जो प्रतियोगी परीक्षाओं की मानिटरिंग करेगा। नए कानून के तहत यदि कोई संस्थान,प्रबंधन या सेवा प्रदाता प्रश्नपत्र लीक करता है या धोखाधड़ी में लिप्त पाया जाता है तो उस पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना व दस साल की सजा हो सकती है।विधेयक में परीक्षार्थियों के लिए भी गाइड लाइन तय की गई है।अगर कोई छात्र परीक्षा में नकल करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसका रिजल्ट रोक दिया जाएगा और एक से तीन साल तक सरकारी परीक्षा में शामिल होने पर बैन कर दिया जाएगा।

सीएम साय ने कहा है कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बडियों पर करारा प्रहार किया। पीएससी घोटाले में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की गई। धांधली करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी गई। सभी प्रतियोगी परीक्षाओ में शतप्रतिशत पारदर्शिता तय करने और अभ्यर्थियों के हित में कई अहम फैसले किए गए।इसी कड़ी में यह नया विधेयक लाया गया है।इसके माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार व धांधली को समाप्त किया जाएगा।इस कानून के लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति युवाओं के सपने से खिलवाड़ नही कर सकेगा और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका उचित अधिकार मिलेगा। अब स्पष्ट व कठोर प्रावधानों के कारण नकल गिरोह,पेपरलीक करने वालों तता फर्जी अभ्यर्थियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

किसी पार्टी का शिखर पुरुष जैसा होता है, वह जैसा काम करता है, उससे राज्य में नेतृत्व को वैसा काम करने की प्रेरणा मिलती है।पीएम मोदी ने दस सालो में कई क्षेत्रों में पिछले कई दशकों में जो सुधार नहीं हुए थे वह सुधार किए है और देश में कई क्षेत्रों की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है, बेहतर बनाया है इससे लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त सुविधाएं मिल रही है।केंद्र में पीएम मोदी के सुधारों से प्रेरित होकर छत्तीसगढ के सीएम साय ने भी राज्य मे कई क्षेत्रों में सुधार के काम किए हैं और उसका रिजल्ट भी आने वाले समय में देखने को मिलेगा। साय सरकार ने पिछली सरकार की गलतियों से सबक लिया है और हर क्षेत्र में सुधार का काम किया है ताकि उनकी सरकार की तुलना जब पिछली सरकार से हो तो लोगों को साफ दिखाई दे कि यह सरकार वैसी कोई गलती नहीं कर रही है जैसी गलतियां पिछली सरकार के समय हुई थीं। 



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