कोई भी विपक्ष में हो वह तो सरकार पर आरोप लगाने का मौका ढूंढता रहता है जैसे ही उसे मौका मिलता है वह आरोप लगाता है और सरकार को सवालों के घेरे में खडा करने का प्रयास करता है।बजट सत्र के दौरान ही दुर्ग,उसके बाद बलरामपुर में अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने का मौका मिला है कि राज्य में अफीम की खेती पहले नहीं होती थी,इसे सच भी माना जा सकता है क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य बने दो दशक से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी जिस तरह अफीम की खेती का खुलासा एक के बाद एक जिले में हुआ है ऐसा पहले तो नहीं हुआ है।
एक के बाद एक कई जगह अफीम की खेती का खुलासा होने से यह तो पक्का हो गया है कि राज्य में अफीम की खेती हो रही है और अफीम की खेती करने वाले ज्यादातर लोग बाहरी राज्यों के हैंं ऐसे राज्यों के हैं जहां वैध या अवैध रूप से अफीम की खेती हो रही है। अफीम की खेती तो वही लोग कर सकते हैं जिनको पता हो कि अफीम की खेती कैसे होती है। अफीम की खेती मप्र,राजस्थान व झारखंड में होती है, इसलिए वही के लोग छत्तीसगढ़ के सीमा के पास इलाकों मे किसानों से सब्जी,मक्का या अन्य कोई फसल लेने के नाम जमीन यहां के किसानों से लेते हैं और करते अफीम की खेती है। यहां के लोगों को अफीम की पौधों के बारे में जानकारी न होने से वह जान पाए कि अफीम की खेती कैसी होती है।वह यही समझते रहे कि खेती के लिए जमीन ली है तो खेती कर रहा होगा।
अफीम की खेती बगैर संरक्षण के नही हो सकती है यह सच है। अभी यह पता नहीं चला है कि अफीम की खेती राज्य में कब से हो रही है लेकिन इसकी खुलासा साय सरकार के समय हुआ है इसलिए कांग्रेस को आरोप लगाने का मौका मिला है राज्य में संरक्षण में अफीम की खेती हो रही है। इसमें भाजपा नेता का नाम सामने से कांग्रेस को खुलकर बोलने का मौका मिला है.। अफीम की खेती कोई सरकार को कराती नहीं इसलिए यह तो माना नहीं जा सकता कि इसके लिए सरकार दोषी है। सरकार पर यह आरोप जरूर लगाया जा सकता है कि कई स्तरों पर खेती की जानकारी जुटाई जाती है इसके बाद भी सरकार को अफीम की खेती की जानकारी कैसे नहीं मिली। यहां साफ है कि इसके लिए वह अधिकारी व कर्मचारी दोषी हैं जिनको फील्ड पर यह जानकारी जुटानी रहती है कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल ली जा रही है।
लापरवाही अधिकारियों व कर्मचारियों ने की है और राज्य में अफीम की खेती की शुरआत हो गई। इसका खुलासा होने पर विपक्ष को आरोप लगाने का मौका मिला है कि यह भाजपा का नया स्टार्टअप है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य में जिस तरह से अफीम की खेती का खुलासा हो रहा है,वह आश्चर्यजनक है। क्योंकि राज्य में कोई जानता नहीं था कि अफीम की खेती क्या होती और आज एक नही कई जगह अफीम की खेती का खुलासा हो रहा है.एक एकड़ में डेढ़ करोड़ की कमाई हो रही है।यह भाजपा का नया स्टार्टअप है।वही कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सकार से सवाल पूछ रहे हैं कि मंत्रियों के गृहजिले में अफीम की खेती संयोग है या कृषि क्षेत्र में नया प्रयोग है।अफीम की खेती का खुलासा जनता कर रही है तो पुलिस व राज्स्व अमला क्या कर रहा है। गिरदावरी के दौरान इसका पता कैसे नहीं चला,वहां दूसरी फसल का जिक्र कैसे हुआ।
कांग्रेस अफीम की खेती के मुद्दे को बडा़ मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है,वह इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इससे कोई भाजपा नेता तो जुडा हुआ नहीं है।अभी तक दुर्ग के अलावा कहीं से भी भाजपा नेता का नाम नहीं आया है। फिर भी कांग्रेस को मौका मिला है तो वह सरकार की छवि जनता के बीच धूमिल करने का प्रयास करेगी क्योंकि इससे उसकाे राजनीतिक रूप से फायदा होगा। अब तक साय सरकार ने घोटालों में कडी कार्रवाई कर अपनी छबि भ्रष्टाचार विरोधी सरकार की बनाई है। कई तरह के सुधार करके भ्रष्टाचार रोकने का प्रयास किया है। इससे उसकी छबि शराब घोटाले वाली पिछली सरकार से तो बेहतर मानी जाती है। अफीम के मामले को उछालकर कांग्रेस जनता को यह बताना चाहती है कि साय सरकार हमारी सरकार से अलग नहीं है। गलत काम तो उसके समय में भी हुए है और हो रहे हैं।
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