नई दिल्ली(वीएनएस)।ईरान युद्ध से उपजे तेल संकट के बीच सरकार बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती की है।पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये, जबकि डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है।युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर ये फैसला लिया गया है।
आइए जानते हैं इससे आपको क्या फायदा होगा।एक्साइज ड्यूटी एक तरह का अप्रत्यक्ष कर है, जो देश के भीतर उत्पादित होने वाले सामानों पर लगाया जाता है। फिलहाल ये शराब, पेट्रोलियम उत्पाद और कुछ लग्जरी सामानों पर लगाई जाती है।
केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर के हिसाब से निश्चित एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। आमतौर पर ये सरकार की कमाई का तरीका होता है, इसलिए सरकार इसमें कटौती करके आम जनता को राहत दे सकती है या इसे बढ़ाकर आय में वृद्धि कर सकती है।दरअसल, ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। युद्ध से पहले कीमतें 60-65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। इस वजह से तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की लागत भी बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कीमतें बढ़ने से OMC को एक लीटर पेट्रोल या डीजल पर 30 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसीलिए OMC को राहत देने के लिए ये कदम उठाया गया है।
आपको क्या होगा फायदा?
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों को नहीं मिलेगा। यानी फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा।हालांकि, ग्राहकों के लिए इसे अप्रत्यक्ष राहत माना जा सकता है, चूंकि अगर सरकार OMC को राहत नहीं देती, तो वे अंतत: पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो सकती थीं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता।
इस कटौती से OMC को हो रहे नुकसान की भरपाई होगी।
OMC को कितना नुकसान हो रहा है?
पेट्रोलिमय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद तेल कंपनियां को फिलहाल पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद ज्यादातर तेल कंपनियों ने घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए थे।हालांकि, बीते दिन निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की थी।
कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करती। तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और मुनाफे के आधार पर दाम तय करती हैं।पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 अलग-अलग शुल्कों से तय होती हैं- कच्चे तेल की कीमत, केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी, डीलर का कमिशन और शुल्क और वैल्यू एडेड टैक्स यानी VAT।
VAT की दर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है। राज्यों के पास इन्हें कम या ज्यादा करने का अधिकार होता है।
सरकार पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स लगाती है?
एक लीटर पेट्रोल पर केंद्र सरकार 1.40 रुपये बेसिक एक्साइज ड्यूटी, 3 रुपये विशेष एक्साइज ड्यूटी (कटौती से पहले 13 रुपये), 2.5 रुपये कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर और 5 रुपये अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (सड़क और अवसंरचना उपकर) लगाती है।
इसी तरह एक लीटर डीजल पर 1.80 रुपये बेसिक एक्साइज ड्यूटी, 0 रुपये विशेष एक्साइज ड्यूटी (कटौती से पहले 10 रुपये), 4 रुपये कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर और 2 रुपये अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (सड़क और अवसंरचना उपकर) लगाती है।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती को लेकर सरकार ने क्या कहा?
पुरी ने कहा, 'एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ये लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। सरकार के पास 2 विकल्प थे- या तो भारतीय नागरिकों के लिए कीमतें बढ़ा दी जाएं या फिर अपनी वित्तीय स्थिति पर इसका बोझ उठाया जाए। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी वित्तीय स्थिति पर बोझ उठाने का फैसला किया।
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