गोबरहिंन टुरी :- अरे लपरहा सुने हस का ? महिला आरक्षण विधेयक फेर गिर गे।
लपरहा टुरा :- हव सुने हाव फेर गिरगे । इहाँ बहस जादा होथे अउ निरनय कम। जब तक कुरसी के लड़ई चलत रही, तब तक ये विधेयक बिचारा जमीन म परे रही।
गोबरहिंन टुरी :- काबर कोई उठाय नयी गा येला?
लपरहा टुरा :- उठाही कइसे ? सब्बो मन अपन-अपन कुर्सी बचाय म लगे हें!
#जय_हो 17/04/26 कवर्धा (छत्तीसगढ़)
(डिस्क्लेमर : गोबरहीन टुरी के गोठ सिरिफ सिस्टम ऊपर काल्पनिक वियन्ग हे , जीवित या मुरदा कोनो नेता अउ अधिकारी ले कोनो सम्बंध नई हावय।)
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कहते हैं, शासन व्यवस्था एक चादर की तरह होती है । चादर को ले संत कबीरदास जी की लाइन याद आ गई-
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