ICU व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को हफ्ते भर में कार्ययोजना बनाने का आदेश

Posted On:- 2026-04-25




नई दिल्ली (वीएनएस)। देशभर में गहन चिकित्सा इकाइयों (ICU) की व्यवस्था सुधारने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आईसीयू के न्यूनतम मानकों को लागू करने के लिए व्यावहारिक और ठोस कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 20 अप्रैल को दिए आदेश में कहा कि आईसीयू सेवाओं के संगठन और संचालन के लिए तैयार दिशानिर्देश व्यावहारिक और लागू करने योग्य हैं, जिन पर व्यापक सहमति भी बन चुकी है। अब इन मानकों को जमीन पर उतारना जरूरी है।

एक हफ्ते में बैठक, बने ठोस प्लान
अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या सचिव एक सप्ताह के भीतर विशेषज्ञों की बैठक बुलाएं। इस बैठक में आईसीयू मानकों को लागू करने के लिए यथार्थवादी और क्रियान्वित करने योग्य योजना तैयार की जाए।

पांच अहम जरूरतों पर फोकस
कोर्ट ने शुरुआती चरण में पांच बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने को कहा है। इनमें मानव संसाधन, प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत ढांचा शामिल हैं। साथ ही इन मानकों के पालन और निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

केंद्र सरकार को भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इन दिशानिर्देशों को औपचारिक एडवाइजरी के रूप में सभी राज्यों को जारी करे और अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे। राज्यों द्वारा तैयार रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी, जिसके बाद एक संयुक्त बैठक में अंतिम मसौदा तैयार होगा।

नर्सिंग स्टाफ के विशेष प्रशिक्षण पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। कोर्ट ने कहा कि आईसीयू में मरीजों के साथ सबसे ज्यादा समय नर्सिंग स्टाफ ही बिताता है, इसलिए उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। इस संबंध में भारतीय नर्सिंग परिषद और पैरामेडिकल परिषद को भी पक्षकार बनाते हुए उनसे ठोस योजना पेश करने को कहा गया है।

अगली सुनवाई 18 मई को
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को तय की है। कोर्ट के इन निर्देशों को देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



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