राजनीति में ऐसा अक्सर राजनीतिक दल करते हैं उनको किसी राज्य में अपनी नाकामी छिपानी होती है तो वह उस राज्य के दूसरे सत्तारूढ़ दल की नाकामी गिनाते रहते हैं। जब भी किसी राजनीतिक दल का नेता दूसरे दलों की नाकामी गिनाते रहता है तो जनता समझ जाती है कि यह नेता खुद तो अपनी पार्टी के लिए कुछ कर नहीं पाया है, उसकी अपनी पार्टी राज्य में कमजोर हो गई है और वह दूसरे दलों की कमजोरी का खुलासा कर रहा है कि देखो इस राजनीतिक दल की यह कमजोरी है। यह खामी है। जो राजनीतिक दल किसी राज्य में मजबूत होता है तो वह जनता को दूसरे दलों की कमी या खामी नहीं बताता है वह यह बताता है कि उनकी सरकार के समय राज्य का क्या हाल था और उनकी सरकार फिर से राज्य में बनेगी तो राज्य में क्या बदलाव आने वाला है।
कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ऐसे ही नेता हैं। उनके नेतृत्व मेंं पं.बंगाल में कांग्रेस साल दर साल कमजोर होती गई है।पं.बंगाल में कांग्रेस को मजबूत करना उनकी जिम्मेदारी थी। कांग्रेस को वह मजबूत नहीं कर सके हैं। यह उनकी नाकामी है। पं. बंगाल में कांग्रेस के कमजोर होने के कारण आज स्थिति यह है कि वाम दल तक उसके साथ सीटों का तालमेल कर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनको मालूम है कि कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने का मतलब है कि चुनाव में नुकसान होना और ऐसा उनको अनुभव पिछले चुनाव में हो चुका है। पिछला चुनाव कांग्रेस और वाम दलों ने मिलकर लड़ा था लेकिन इससे दोनों को कोई फायदा नहीं हुआ है। वामदलों को लगा कि उनको नुकसान हुआ है यही वजह है कि इस बार वामदलों ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से मना कर दिया।यह पं. बंगाल में कांग्रेस की वास्तविक स्थिति है। इस स्थिति को छिपाने के लिए वह यहां चुनावी सभा में कहते हैं कि ममता और मोदी में कोई फर्क नहीं है। जैसे मोदी हैं वैसी ममता है।दोनों मिले हुए हैं।
पं. बंगाल में आज भाजपा मजबूत स्थिति में है तो राहुल गांधी इसका ऐसा विश्लेषण करते हैं कि लोगों काे यकीन नहीं हो सकता कि वाकई में ऐसा पं.बंगाल में हुआ है।वह कहते हैं कि ममता ने पं. बंगाल में विभाजनकारी राजनीति की इससे भाजपा को यहां मजबूत होने का मौका मिला है। यानी आज यहां भाजपा मजबूत है और टीएमसी की विकल्प है तो उसके लिए ममता दोषी है। जब राहुल गांधी ऐसा कहते हैं तो जनता समझ जाती है कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पं.बंगाल में ममता का विकल्प बन नहीं सकीं।दस साल पहले तो भाजपा तो पं.बंगाल में नहीं थी। तब तो कांग्रेस ही विपक्ष में थी। तब राहुल गांधी की जिम्मेदारी थी कि वह कांग्रेस को ममता का विकल्प बनाए रखते लेकिन राहुल गांधी खुद कांग्रेस को ममता का विकल्प बना नहीं सके हैं। यह उनकी नाकामी है पं. बंगाल मे भाजपा आज मजबूत है और जहां कांग्रेस को होना था वहां आज भाजपा है तो यह मोदी व शाह की मेहनत का नतीजा है।
बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली के सेरामपुर में एक रैली में कहा कि मोदी व ममता दोनों गरीबों के बजाय अमीरों की मदद करते हैं,मोदी देश में व ममता बंगाल में अमीरो के हित में काम कर रही है। दोनों सत्ता पाने की राजनीति करते हैं।राहुल गांधी खुद को ममता से बेहतर नेता बताने के लिए कहते हैं कि मेरे खिलाफ ३६ केस हैं और ममता पर एक भी क्यों नहीं हैं।मुझसे ५५ घंटे पूछताछ की गई, ममता से कितने घंटे पूछताछ हुई।चुनाव के दौरान भाजपा ममता पर हमला करती है, चुनाव के बाद बंद कर देती है। कहा जाता है कि राहुल गांधी पर वामपंथ का प्रभाव बढ़ गया है तो यूं ही नहीं कहा जाता है। राहुल गांधी वामपंथियों की तरह सोचने लगे हैं यही वजह है कि वह अमीर व गरीब की बात करने लगे हैं।वामपंथियों की सारी राजनीति अमीरों का विरोध करने और गरीबों को गरीबी नाम पर ठगने की रही है।यह राजनीति पुरानी हो गई है और जनता इस पर यकीन नहीं करती है। वह उसे गरीबों का नेता नहीं मानती है जो गरीबों की खाली बात करता है और अमीरों के विरोध का खाली दिखावा करता है।
कांग्रेस एक समय में गरीबी दूर करने की बात करके गरीबों की पार्टी बनी हुई थी। धीरे धीरे गरीबों को समझ आ गया कि गरीबी की बात करने वाला उनकी गरीबी दूर नहीं सकता। गरीबी की बात करने के कारण ही उसकी गरीबी बनी हुई है। उसके घर में जरूरी सुविधाएं नहीं है। पीएम मोदी के आने के बाद ही गरीबों को वह सब सुविधाएं मिली हैं जिसका वह सपना देखा करते थे। आज गरीबों को पास अपना घर, बिजली, पानी, शौचालय, मुफ्त इलाज,गैस, सस्ता राशन की सुविधा है तो पीएम मोदी के कारण है और मोदी ने कभी नही कहा कि वह गरीबी दूर करेंगे और पीएम मोदी बिना गरीबी दूर करने का वादा किए गरीबी को दूर किया है। गरीबों का इसका एहसास होता है यही वजह है राहुल गांधी कितना भी गरीबी व गरीबों की बात कर लें। मोदी को अमीरों का मित्र बताएं जनता को मोदी पर भरोसा है तो इसलिए है कि पीएम मोदी उनके लिए कहा कम है किया ज्यादा है।देश के गरीब लोग अब अच्छे जान गए हैं, उनके लिए काम करने वाला कौन है उनके लिए हवा हवाई बाते करने वाले कौन हैं। यही वजह है कि चुनाव में देश की गरीब जनता काम करने वाले राजनीतिक दल व नेता को चुनती है।
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