देश का विपक्ष पीएम मोदी व भाजपा को गलत साबित करने का मौका ढूंढता रहता है. इसके लिए वह पीएम मोदी कुछ भी करते हैं या कहते हैं तो उसकी कोशिश यह बताने की रहती है कि देखो पीएम मोदी ने यह गलत किया है,यह गलत कहा है।वह सोचते हैं कि विपक्ष के नाते वह जो कुछ भी आरोप लगाते हैं, उसे चुनाव आयोग हो या और कोई संस्था वह उसे सही मान ले और कहे कि पीएम मोदी ने गलत किया है, पीएम मोदी से गलत कहा है।कानून कायदा विपक्ष को मालूम है तो पीएम मोदी को भी मालूम है और यह भी मालूम है कि वह कभी कुछ गलत करेंगे या कहेंगे तो विपक्ष उसे बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास करेगा। इसलिए वह कुछ भी कहने व करने से पहले सावधान रहते हैं कि उनकेे किसी काम को विपक्ष गलत न ठहरा सके, उसे गलत न बता सके।
विपक्ष पीएम मोदी के खिलाफ कहता तो बहुत कुछ है,आरोप तो लगाता रहता है लेकिन एक भी बार भी वह पीएम मोदी को गलत साबित नहीं कर सका है। पीएम मोदी व राहुल गांधी में यही फर्क है कि राहुल गांधी जब बोलते हैं तो उनको पता नहीं रहता है कि उनके बोलने से उनको,कांग्रेस व विपक्ष को क्या नुकसान होगा लेकिन पीएम मोदी बोलते हैं तो उनकोे पता रहता है कि वह क्या बोल रहें है,इससे न तो पीएम मोदी,न भाजपा और न ही सरकार को कोई नुकसान होता है।इस बार माकपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि पीएम मोदी ने मौजूदा चुनाव अवधि के दौरान दूरदर्शन का इस्तेमाल पक्षपातपूर्ण राजनीतिक भाषण के लिए किया जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।
माकपा ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की शिकायत की है और कहा है कि ऐसे वक्त में जब तमिलनाडु व पं.बंगाल में आदर्श आचार संहिता लागू है,पीएम का राष्ट्र के नाम संबोधन एक राजनीतिक प्रचार के समान था।इसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने भी पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर आरोप लगाया है कि उन्होंने अधिकारिक संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया।उन्होने इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग लोकतंत्र व भारत के संविधान का अपमान बताया है। माकपा व कांग्रेस आरोप लगाते वक्त यह भूल जाते हैं कि चुनाव इस वक्त देश में नहीं हो रहे हैं। चुनाव पांच राज्यों में से तीन में हो चुके हैं और दो राज्यों तमिलनाडु व पं.बंगाल में २३ अप्रैल व २९ अप्रैल को होने हैं और पीएम मोदी ने अपने भाषण में न तो तमिलनाडु का नाम लिया और न पं.बंगाल का नाम लिया।
उनकी सरकार ने संसद में देश की महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के लिए एक संशोधन विधेयक लाया था और विपक्ष से आग्रह किया था कि यह महिलाओं का हक है, महिलाओं को दिया जाना चाहिए, विपक्ष इसमे सहयोग करके महिलाओं को उनका अधिकार देने वाला बने। यह देश की महिलाओं को उनका हक देने का ऐतिहासिक काम था, यह काम विपक्ष के असहयोग से नहीं हो सका ऐसे में देश की महिलाओं को बताना जरूरी था कि मोदी सरकार उनके लिए क्या करना चाहती और वह ऐसा क्यों नहीे कर सकी। पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में यही किया है। उन्होंने तो यह कहा ही नहीं कि तमिलनाडु व पं. बंगाल की महिलाएं चुनाव में किसी को वोट दें या किसी को वोट न दें।
पीएम मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी है कि उनको जल्द आरक्षण देना चाहते थे, कांग्रेस व विपक्ष के कारण नहीं दे सके। देश के लिए कोई ऐतिहासिक काम सरकार करती है तो पीएम मोदी देश को संबोधित करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने देश को संबोधित किया है तो एक ऐतिहासिक अवसर का लाभ न उठा पाने के कारण किया है। विपक्ष चुनाव हारने के डर से चुनाव आयोग व मोदी सरकार पर चुनाव के दौरान ही आरोप लगाने लगता है ताकि वह चुनाव हारने के बाद कह सके कि देखो हम तो पहले से कह रहे थे कि पीएम मोदी व भाजपा चुनाव आयाेग,सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनाव जीतते हैं, इस बार भी उन्होंने यही किया है। विपक्षी दल चुनाव आयोग से कुछ भी शिकायत करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि वह उसे गंभीरता से ले वह नहीं लेता है तो चुनाव आयोग सरकार समर्थक हो जाता है।विपक्ष की आदत से देश की जनता वाकिफ है, इसलिए वह विपक्ष के आरोपों को कभी गंभीरता से नहीं लेती है।
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