महिला आरक्षण गेंद विपक्ष के पाले में

Posted On:- 2026-04-17




सुनील दास

राजनीति में होशियार वह होता है जो सही समय पर सही चाल चलता है ओर सामने वाले को सोचने को मजबूर कर देता है कि यह चाल चली क्यों गई हैं और इसकी काट क्या है। जब सामने वाला चाल की काट सोचता है तो लगता है कि वह सामने वाली की चाल में फंस गया है और उसकी मात तो तय हैं।महिला आरक्षण मामले में पीएम मोदी साफ कर दिया है कि वह देश की महिलाओं को जल्द से जल्द आरक्षण देना चाहते हैं, वह विपक्ष से इस मामले में सहयोग मांग रहे हैं और विपक्ष इस मामले में सहयोग करे तो उसे घाटा है और वह सहयोग न करे तो और ज्यादा घाटा है।

विधायिका में महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके लिए परिसीमन कर लोकसभा व विधासनभा का चेहरा बदलने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर गुरुवार को लोकसभा में चर्चा हुई।बहस में सरकार की नीयत साफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को बिना कोई राजनीति किए इसका समर्थन करना चाहिए। पीएम मोदी विपक्ष ने जो जो सवाल उठाए उसका जबाव देते हुए कहा कि महिला आरक्षण के लिए लाए संविधान संशोधन से किसी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। परिसीमन पहले जिस अनुपात में हुआ है,वह नहीं बदलेगा।इसके लिए मोदी की गारंटी चाहिए तो ले लो।

उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस बिल को हमको कोई श्रेय नहीं चाहिए।कुछ लोगों को लगता होगा कि इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है,इस बिल का विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि इसका लाभ मुझे होगा अगर साथ चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा।२०२३ में कहा गया था कि इस बिल को जल्दी लागू करो अब हम इसे २०२९ से लागू करने वाले हैं तो इसका विरोध किंतु,परंतु व लेकिन कहकर किया जा रहा है। पीएम मोदी यह कहकर कि विपक्ष इस बिल का श्रेय ले ले लेकिन बिल का समर्थन करे। यह महिलाओं का हक है, वह महिलाओं को उसका हक दे दे।उन्होंने विपक्ष को आगाह भी किया कि जिसने भी अबतक महिला आरक्षण बिल का विरोध किया है,महिलाओं ने उसकी बुरी गत है, इसलिए इसका विरोध कोई खुले तौर पर नहीं करता है लेकिन किंतु परंतु करता है। 

संसद मे ऐसा कहकर देश की महिलाओं को यह संदेश देने का काम किया है कि हम तो महिलाओं को आरक्षण जल्द से जल्द देने का प्रयास कर रहे हैं इसमें पहले भी विपक्ष ने बाधा डाली है और आज भी बाधा डालने का प्रयास रहा है। पीएम मोदी व शाह के राजनीतिक दांव को विपक्ष समझ नहीं पाता है और मोदी व शाह जैसा चाहते हैं उसका विरोध करते हैं और जनता की नजर में हर अच्छी बात का विरोधी बन कर रह जाते हैं और हर अच्छे काम का श्रेय जनता मोदी सरकार को दे देती है। महिला आरक्षण का श्रेय भी आखिर में पीएम मोदी को ही मिलेगा क्योंकि विपक्ष को मजबूरी में ही सही महिलाआरक्षण व परिसीमन का समर्थन करना होगा।

 मोदी तो यही चाहते हैं कि विपक्ष समर्थन करे और सरकार के साथ श्रेय ले। विपक्ष ऐसा नहीं करता है और महिला आरक्षण महिलाओं को नहीं मिलता है तो इसका फायदा भी मोदी व शाह को होगा क्योंकि वह तो पहले साफ कर चुके हैं वह तो जल्द से जल्द महिलाओं काे आरक्षण देना चाहते हैं, इसके लिए संशोधन विधेयक व परिसीमन विधेयक लाया गया है। मोदी सरकार इस बात को समझती है कि वह महिला आरक्षण विधेयक व परिसीमन विधेयक अलग अलग लाती तो विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता और परिसीमन का नहीं करता। अब सरकार ने दोनों को जोड़ दिया है कि यानी की परिसीमन के बाद ही महिलाओं का आरक्षण का लाभ मिलेगा यदि विपक्ष परिसीमन का विरोध करता है तो महिला आरक्षण भी पास नहीं होगा। ऐसे महिलाओं का आरक्षण का लाभ मिलने का नुकसान विपक्ष को होगा और फायदा भाजपा व मोदी को होगा। अब कांग्रेस सहित विपक्ष की परेशानी यह है कि मोदी व शाह का दांव ऐसा है कि उसको दोनों तरह से मोदी से कम फायदा होगा यानी मोदी काे ज्यादा फायदा होगा।

पीएम मोदी राजनीतिक फायदा कैसे उठाया जा सकता इसकी योजना बहुत पहले बना लेते हैं। इतना पहले बना लेते हैं कि विपक्ष को अंदाजा नहीं होता है कि पीएम मोदी ऐसा भी कर सकते हैं।कोई सोच नहीं सकता थी कि एक तरफ संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही होगी और दूसरी तरफ सरकार २०२३ में पास महिला आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी कर देगी। बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आया कि सरकार ने ऐसा क्यों किया।असल बात यह है कि २०२३ का नारीशक्तिवंदन अधिनियम पास होने के बाद अधिनियम तो बन गया था लेकिन वह लागू नहीं हुआ था, उसके लागू होने के लिए जरूरी था कि सरकार राजपत्र में उसे अधिसूचित करे।अधिसूचना के बाद यह अब १०६ वां  संशोधन बन गया है।अभी जो नया संशोधन बिल संसद में लाया गया है, वह तब ही काम करेगा जब पिछला कानून लागू हो चुका हो। इसलिए पहले कानून का लागू किया गया है उसके बाद सरकार ने संशोधन कानून लाया है। यानी अब जो होगा पुराने कानून में संशोधन के रूप में होगा।सरकार का इससे फायदा यह है कि नया संशोधन कानून संसद से पारित नहीं होता है तो पुराना महिला आरक्षण कानून तो बचा रहेगा।



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