पीएम मोदी को जो संदेश देना था वह दे दिया

Posted On:- 2026-04-19




सुनील दास

देश की राजनीति में आधी आबादी की भूमिका २०१४ के बाद से ज्यादा अहम हो गई है क्योंकि किसी भी राज्य या केंद्र की जीत में उनकी भूमिका पहले से ज्यादा अहम हो गई है। जिस राजनीतिक दल को महिलाओं का वोट एकमुश्त मिलता है, उसकी चुनाव में जीत की संभावना बढ़ जाती है। पिछले कई राज्यों के चुनावों में महिलाओं ने जिस राजनीतिक दल को वोट दिया है सरकार भी उसी दल की बनी है। सारे राजनीतिक दल चुनाव वाले राज्यो में महिलाओं का वोट लेने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान दे रहे हैं क्योंकि जिसकी सरकार है वह राजनीतिक दल चाहता है महिलाओं उनको ज्यादा वोट देकर उनकी सरकार को बनाए रखने में अहम रोल अदा कर सकती है, वही जो राजनीतिक दल सत्ता में नहीं हैं वह चाहते हैं कि महिलाएं उनको वोट दल राज्य में सत्ता परिवर्तन करें। यानी चाहे सरकार को बनाए रखना हाे या सरकार को बदलना हो ,महिलाओं की भूमिका सबसे ज्यादा अहम हो गई है।

अभी पांच राज्यों में से तीन राज्यों में चुनाव हो चुके है तथा दो राज्यों में तमिलनाडु व पं.बंगाल में आगामी दिनों दो चरणो में चुनाव होने हैं।किसी ने सोचा नहीं था कि पीएम मोदी व अमित शाह संसद सत्र का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण के लिए संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं लेकिन पीएम मोदी व शाह ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक यह जानते हुए भी कि इसे पारित कराने के लिए उनके पास संख्या नहीं है। संसद का विशेष सत्र बुलाकर पेश किया तो इसके पीछे पीएम मोदी व अमित शाह की कोई दीर्घकालिक योजना है। यह ऐसी दीर्घकालिक योजना हो सकती है जिसका लाभ अभी के चुनाव में तो होगा ही, इसके अलावा आने वाले चुनावों में भी इसका लाभ भाजपा को हो और विपक्ष को नुकसान हो।

पांच राज्यों के चुनाव में सभी राज्यों के क्षेत्रीय दल व कांग्रेस महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए चुनावी घोषणा पत्र में एक एक बढ़कर वादे कर रहे हैं कोई नगद पैसा देने का वादा कर रहा है तो कोई फ्रिज,कूलर व टीवी खरीदने के लिए आठ हजार रुपए का कूपन देने का वादा कर रहा है. इसके अलावा महिलाओं को और जो कुछ भी दिया जा सकता है,सब देने का प्रयास किया जा रहा है। चुनाव कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल महिलाओं को यह बता रहे हैं,जता रहे हैं कि हम तुमको वह सब देने वाले हैं जो भाजपा नहीं दे सकती।ऐसे में भाजपा ने चुनाव घोषणा पत्र में दूसरे दलों के अनुसार बहुत कुछ देने की घोषणा तो की है तथा महिला आरक्षण के मामले को चुनाव के दौरान संसद में उठाकर देश व चुनाव वाले राज्यों की महिलाओं को यह बताने का प्रयास किया है कि यह सारे दल जो महिलाओं के लिए देने वाला बने हुए हैं यह महिलाओं को आरक्षण तीस साल से नही दे रहे हैं। देश की महिलाओं की तीस साल से आरक्षण नहीं मिला है तो इसके लिए कांग्रेस व विपक्ष के दल दोषी है।

विपक्ष हमेशा की तरह पीएम मोदी व शाह की चाल को समझ नहीं पाया और उसका मौका मिला था कि वह महिलाओं का आरक्षण का हक देने वाले बने और अपने पुराने पापों की प्रायश्चित कर लें। पीएम मोदी व शाह जानते थे कि राहुल गांधी के सामने यदि मोदी को हराने व महिलाओं को उनका हक देने वाला नेता बनने का मौका मिले तो वह महिलाओं को हक देने वाला नेता नहीं बनेंगे वह पीएम मोदी को संसद में हराने वाले नेता बनना पसंद करेंगे। यही राहुल गांधी व विपक्ष ने किया है।संसद में जो कुछ हुआ उससे देश की महिलाओं का यही संदेश गया है कि पीएम मोदी व शाह ने महिलाओं को २०२९ से पहले संसद व विधानसभा में आरक्षण देना चाहते हैं और कांग्रेस व विपक्ष के कारण फिर एक बार ऐसा संभव नही हो सका है।

राहुल गांधी कई राज्यों में कांग्रेस को चुनाव जीता नहीं पाएं है, इससे कांग्रेस तीन राज्यों तक ही सिमट गई है। तीन लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी मोदी को हरा नहीं पाए हैं संसद के भीतर भी राहुल गांधी कई बार वोटिंग होने के बाद भी हरा नहीं पाए हैं। उनकी सबसे बड़ी इच्छा किसी भी तरह से पीएम मोदी को हराने की थी। पीएम मोदी ने उनको खुद यह मौका दिया और राहुल गांधी समझ नहीं पाए कि पीेएम मोदी उनको हराने का मौका क्यों दे रहे हैं। तमिलनाड़ु व पं.बंगाल के बाद आने वाले चुनावों में भाजपा महिला आरक्षण को धारा-३७०,राममंदिर जैसा बड़ा मुद्दा बनाने वाली है, महिलाओं के लिए संदेश है कि जो लोग तुमको आरक्षण देना चाहते हैं उनको वोट दो। जो लोग तुमको वोट नही देना चाहते उनको पहचानों और अपना कीमती वोट उनको मत दो क्योंकि यह जीतेंगे तो आरक्षण रोकते रहेंगे जैसे तीस साल से रोकते रहे हैं।



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