राजनीति में होशियार वह राजनेता होता है जो राजनीति के मुद्दे तय करता है। राजनीति के ऐसे मुद्दे तय करता है जिससे एक बड़ा वर्ग जुड़ा होता है और चुनाव में वही बड़ा वर्ग हार-जीत का फैसला करने में अहम भूमिका निबाहने वाला होता है। पीएम मोदी ने भाजपा के लिए एक बड़ा मुद्दा चुन लिया है।यह मुद्दा भाजपा का है इसे पीएम मोदी नेे संसद के भीतर व बाहर पुरजोर तरीके से साबित किया है कि भाजपा तो महिलाओं का आरक्षण देना चाहती है।भाजपा ने महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संशोधन विधेयक संसद में लाया था।विपक्ष से इसे पारित करने में सहयोग करने को कहा था। पारित कराने का पूरा श्रेय विपक्ष को देने को कहा था लेकिन विपक्ष की रुचि महिला आरक्षण पारित कर महिलाओं को उनका हक देने की जगह संसद में महिला आरक्षण विरोध कर पीएम मोदी को हराने में ज्यादा थी। वह इस बात से खुश हो सकते थे कि उन्होंने मोदी सरकार का सहयोग कर महिला आरक्षण का हक महिलाओं को दिया है लेकिन वे इस पर ज्यादा खुश हुए कि मोदी सरकार महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित नहीं करवा सके। महिला आरक्षण मामले में पीएम मोदी संसद में हार गए और उन्हें हराने में कांग्रेस की अहम भूमिका रही।
संसद में कांग्रेस ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया। पीएम मोदी ने तो उनको मौका दिया था पर वह मौके का फायदा नहीं उठा पाई। पीएम मोदी जानते थे कि अगर कांग्रेस को महिला आरक्षण पारित करवाने व पीएम मोदी का हराने का मौका मिलने पर वह पीएम मोदी को हराने का काम पूरे जोश से करेगी और कांग्रेस ने ऐसा किया है। सच यह है कि कांग्रेस ने वह नहीं किया है जो राहुल गांधी चाहते थे, राहुल गांधी ने वह किया है जो पीएम मोदी चाहते थे। पीएम चाहते थे पूरा देश देखे संसद में कांग्रेस व राहुल गांधी कैसे महिला आरक्षण का विरोध करते हैं और कैसे उसका जश्न मनाते हैं। अब पीएम मोदी योजना के दूसरे चरण में अमल कर रहे हैं। वह जब वाराणसी में कहते हैं कि सपा व कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों ने फिर देश की महिलाओं को धोखा दिया है। यह सारे परिवारवादी दल नारी शक्ति से डरे हुए हैं.इसलिए परिवारवादी दलों ने ससंद में महिला आरक्षण का विरोध किया।यह साफ हो जाता है कि अब आने वाले चुनाव के पहले पीएम मोदी कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का महिला विरोधी बताने का पूरा प्रयास करेंगे।
यही नहीं पांच राज्यों के चुनाव में अगर कहीं भाजपा की सरकार बनती है तो यही बताया जाएगा कि महिला विरोधी राजनीतिक दलों को महिलाओं ने सबक सिखाया है। पांच राज्यों के चुनाव में महिलाओं ने बढ़चढकर वोट दिया है। इससे मतदान पहले से ज्यादा हुआ है।भाजपा व मोदी का पूरा प्रयास होगा कि अगले साल जिन राज्यों में चुनाव है, वहां कांग्रेस व विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताने का प्रयास किया जाए। यूपी में अगले साल चुनाव है इसलिए यहां तो कांग्रेस व सपा को महिला विरोधी बताने का प्रयास पीएम मोदी ने शुरू कर दिया है। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को भाजपा का मुद्दा बना दिया है और अब विपक्ष को इसे अपना मुद्दा बताने में परेशानी होगी। क्योंकि विपक्ष कितना भी कहे कि वह महिलाओं को आरक्षण का समर्थक है लेकिन कहा तो यही जाएगा संसद में तो कांग्रेस के विरोध के कारण ही महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हुआ था।
अब कांग्रेस की मजबूरी है कि जैसे जैसे पीएम मोदी पूरे देश में कांग्रेस व विपक्षी दलों को महिला विरोधी प्रचारित करेंगे कांग्रेस व विपक्षी दल वैसे वैसे खुद को महिला आरक्षण विरोधी बताने का पूरा प्रयास करेंगे।यानी कांग्रेस के न चाहने पर भी महिला आरक्षण बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा और कांग्रेस को इस पर बार बार सफाई देनी पड़ेगी कि कांग्रेस तो चाहती है कि महिलाओं को आरक्षण मिले। लेकिन पीएम मोदी व भाजपा पूरे देश में यही प्रचार करते रहेंगे कि कांग्रेस महिला विरोधी है इसलिए उसने संसद में महिला आरक्षण की विरोध किया और यह सच भी है, पूरे देश की महिलाओं ने देखा है कि कांग्रेस ने संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का विरोध किया इसलिए महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।पांच राज्यों का चुनाव खत्म होने के बाद कांग्रेस मांग कर रही है कि सरकार महिला आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक बुलाए तो यह उसकी मजबूरी है क्योंकि महिलाओं की नाराजगी का मतलब है कि अगले चुनावों में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान।
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