नई दिल्ली (वीएनएस)। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Council on Energy, Environment and Water के ग्रीन फाइनेंस सेंटर (सीईईडब्ल्यू-जीएफसी) की नई ‘मार्केट हैंडबुक’ रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 57.5 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 1.73 गुना अधिक है। इसमें लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की रही। सबसे ज्यादा योगदान सौर ऊर्जा का रहा, जहां 44.6 गीगावाट क्षमता जोड़ी गई, जबकि पवन ऊर्जा में 6.1 गीगावाट की वृद्धि हुई। देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता अब 533 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें 52 प्रतिशत हिस्सेदारी अक्षय ऊर्जा की है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2026 तक देश में लगभग 151 गीगावाट अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें 90 गीगावाट सौर ऊर्जा, 29 गीगावाट पवन ऊर्जा, 19 गीगावाट हाइब्रिड और 13 गीगावाट बड़ी हाइड्रो परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज) क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति देखी गई। वित्त वर्ष के दौरान 37 स्टोरेज टेंडर जारी किए गए, जिनमें 31 बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से जुड़े थे।
आंध्र प्रदेश के एपीट्रांसको टेंडर में बैटरी स्टोरेज के लिए 1.23 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम टैरिफ दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 33 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञ इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव मान रहे हैं।
सीईईडब्ल्यू-जीएफसी के डायरेक्टर Gagan Sidhu ने कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल नई क्षमता वृद्धि में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत रही। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में 26 प्रतिशत की गिरावट चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति में सुधार को भी अहम उपलब्धि बताया गया है। लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) नियमों के कारण बिजली कंपनियों का बकाया जनवरी 2024 के 49,451 करोड़ रुपये से घटकर फरवरी 2026 में सिर्फ 4,109 करोड़ रुपये रह गया। वहीं देशभर में अब तक करीब 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
ग्रीन फाइनेंस के मोर्चे पर भी भारत ने मजबूती दिखाई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी किए, जबकि अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में पहली तीन तिमाहियों के दौरान 2.5 बिलियन डॉलर का एफडीआई आया, जिसमें 79 प्रतिशत निवेश अकेले सौर ऊर्जा क्षेत्र में हुआ।
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