जशपुरनगर (वीएनएस)। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए जिले के किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उन्हें खेती-किसानी के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार कि जिले में खाद एवं बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं तथा किसी प्रकार की कमी नहीं है। किसानों की सुविधा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद एवं अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने, खेती की लागत कम करने तथा मिट्टी की उर्वरता शक्ति को बनाए रखने के लिए सहकारी समितियों में गत वर्ष की खपत के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया एवं 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक उर्वरकों अथवा नैनो यूरिया के रूप में तथा डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा वैकल्पिक एनपीके उर्वरकों अथवा नैनो डीएपी के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। यह किसानों की आवश्यकता एवं इच्छा के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा।
जिले को सहकारी क्षेत्र में प्राप्त 19,150 मीट्रिक टन उर्वरक लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 7,756 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 40 प्रतिशत है। इनमें से 1,186.12 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों द्वारा उठाव किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में 6,569.83 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं। इससे स्पष्ट है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है। इसी प्रकार नैनो उर्वरकों के रूप में 4,128 लीटर नैनो यूरिया एवं 3,468 लीटर नैनो डीएपी सहित कुल 7,596 लीटर का भंडारण किया गया है। इनमें से 135 लीटर का वितरण किया जा चुका है तथा 7,463 लीटर नैनो उर्वरक उपलब्ध हैं। किसानों को उनके रकबे एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है ताकि प्रत्येक किसान को समान रूप से लाभ मिल सके।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इच्छुक एवं चयनित किसानों को हरी खाद के रूप में प्रति एकड़ 8 किलोग्राम ढेंचा बीज एवं 4 किलोग्राम मूंग बीज वितरित किया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र डुमरबहार एवं शासकीय कृषि प्रक्षेत्र सुसडेगा सहित चिन्हित किसानों के खेतों में नील हरित काई का उत्पादन कराया जा रहा है। यह जैव उर्वरक वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर फसलों को प्राकृतिक रूप से पोषण प्रदान करता है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरता में वृद्धि करता है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी भी कर रहा है। खरीफ वर्ष 2026 में अब तक जिले के 75 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 38 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उर्वरकों के भंडारण, वितरण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद एवं उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर तत्काल कृषि विभाग को अवगत कराएं। कृषि विभाग की इस पहल से जिले के किसानों को समय पर गुणवत्ता युक्त उर्वरक उपलब्ध होंगे, खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता संरक्षित रहेगी तथा खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
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