एमसीबी (वीएनएस)। किसानों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से जिले में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत व्यापक जागरूकता अभियान संचालित किया गया। विकासखंड मनेन्द्रगढ़, खड़गवां एवं भरतपुर के विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक कृषि, फसल विविधीकरण तथा डिजिटल कृषि प्रबंधन की नवीनतम जानकारियां प्राप्त कीं।
विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के नारायणपुर, डंगौरा, बेलबहरा, मोरगा, डिहुली, केल्हारी एवं महाई, विकासखंड खड़गवां के भुकभुकी, कोडांगी, छोटेकलुआ, ठग्गांव, फुनगा तथा विकासखंड भरतपुर के उदकी, नोढ़िया, चुटकी, केसौड़ा, नेऊर, सेमरिहा, जैती एवं मनौढ़ ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविरों के माध्यम से किसानों को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।
कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बदलती जलवायु और बढ़ती लागत को देखते हुए खेती में नवाचार अपनाना समय की आवश्यकता है। केवल धान आधारित खेती तक सीमित रहने के बजाय दलहन, तिलहन, सब्जी एवं अन्य नगदी फसलों का उत्पादन बढ़ाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। फसल विविधीकरण से उत्पादन में स्थिरता आती है और प्राकृतिक आपदाओं के समय आर्थिक जोखिम भी कम होता है।
शिविरों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। किसानों को बताया गया कि ढेंचा, मूंग जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। साथ ही नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे आधुनिक उर्वरकों के उपयोग से कम लागत में बेहतर उत्पादन, पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की प्रभावी उपलब्धता तथा मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराने से प्रत्येक किसान का डिजिटल कृषि रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे भविष्य में कृषि अनुदान, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, ऋण एवं शासन की अन्य योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकेगा। इस दौरान अधिक से अधिक किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन कराने के लिए विशेष अभियान चलाने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, नैनो उर्वरकों एवं डिजिटल कृषि सेवाओं से जुड़ी जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम की जा सकती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि अधिक लाभकारी बनेगी।
कृषि विभाग ने किसानों से कृषक उन्नति योजना सहित शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने, प्राकृतिक खेती को अपनाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने की अपील की। विभाग का मानना है कि यह अभियान जिले में कृषि को आधुनिक, टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और किसानों की आय बढ़ाने वाली दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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