माना जाता है,कहा जाता है कि कला को जब कोई कलाकार बहुत ऊंचाई तक ले जाता है तो कला से कलाकार की पहचान होती है,कला के कारण कलाकार को जाना पहचाना जाता है।उसे बड़ा कलाकार माना जाता है, महान कलाकार माना जाता है।कला तो हमेशा रहती है, कला के साधक भी हमेशा रहते हैं लेकिन कोई कोई कला का साधक ऐसा होता है,उसकी कला की साधना ऐसी होती है कि कला ऐसी ऊंचाई पर पहुंच पाती है जिसकी कोई कल्पना नहीं किया होता है।जब कला को कोई ऐसा साधक होता है तो कला से वह नहीं पहचाना जाता है, उसके कारण कला की एक नई पहचान बनती है,उसके कारण कला को देश व दुनिया में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ महतारी की लोककला साधिका बेटी तीजन बाई ऐसी ही कला साधिका थीं। उन्होंने पंडवानी की ऐसी साधना की कि आज पंडवानी के कारण तीजन बाई को नहीं पहचाना जाता है, तीजन बाई के कारण पंडवानी को लोग देशविदेश में जानते हैं।
कई महीनों से अस्वस्थ रहने के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े सम्मान से सम्मानित देश विदेश में पंडवानी गायिका के तौर पर जानी जाने वाली तीजनबाई का पांच जुलाई को निधन छत्तीसगढ़ ही नहीं लोककला की दुनियां की अपूरणीय क्षति है, लोकगायिका के तौर पर लोकगायिकी के क्षेत्र में उन्होंने जो जगह बनाई थी,उस जगह को कोई नही भर सकता। जब भी पंडवानी का कार्यक्रम होगा तो उनकी याद आएगी। उनको याद किया जाएगा।वह लोकगायिकी से कला के आसमान पर जिस ऊंचाई पर पहुंची थी,वह लोकगायिकाओं के लिए एक उदाहरण है कि गरीबी,कठिनाई के बाद भी कला के प्रति समर्णण,निरंतर अभ्यास, नया करने की हिम्मत हो तो कला के हर आसमान की ऊंचाई पर पहुंचा जा सकता है। अपनी ऐसी पहचान बनाई जा सकती है कि कला से कलाकार की नहीं कलाकार से कला को पहचाना जाता है।
दुर्ग जिले के अटारी गांव के शिकारीपारा में पारधी परिवार में तीज के दिन जन्म होने के कारण तीजन रखा गया था।पिता का नाम छुनुकलाल पारधी,माता का नाम सुखबती था।उनका बचपन गरीबी,अभाव में बीता।माना जाता है कि पुराने जन्मों के संस्कार कभी अचानक जाग जाते हैं और एक महान कलाकार की कलायात्रा शुरू होती है। बताया जाता है कि तीजन एक बाद गंदे पैर धोने तालाब जा रही थी।उनके नाना के छोटे भाई बृजलाल पारधी अपनी झोपड़ी में इकतारे के साथ चीरहरण प्रसंग में द्रोपदी की भगवान श्रीकृष्ण से लाज बचाने के लिए करुण पुकार को सुना तो उनके भीतर कुछ ऐसा बदल गया कि वह दूसरे दिन फिर पंडवानी सुनने पहुंची तो बृजलाल ने उनको पकड़ लिया। तब तीजन ने उनको बताया कि पंडवानी सुनना,गाना उनको अच्छा लगता है।तीजन ने उनको एक दिन सुना पूरा प्रसंग सुना दिया तब बृजलाल समझ गए कि यह साधारण बच्ची नहीं है।उसके बाद बृजलाल ने उनको पंडवानी की बारीकियां सिखाई।उसके बाद चंदखुरी के उमेंद सिंह देशमुख से भी उन्होंने पंडवानी की बारीकियां सीखीं।उनका पंडवानी का पहला कार्यक्रम भी चंदखुरी में हुआ था।
पंडवानी सीखने के बाद उनकी पंडवानी गायन का घर से लेकर गांव तक में विरोध हुआ। मां ने घर से निकाल दिया,पति ने अपनाने से मना कर दिया लेकिन तीजन ने पंडवानी को नहीं छोड़ा, निरंतर पंडवानी का अभ्यास करती रहीं।जहां भी उनका पंडवानी का कार्यक्रम होता वहां तो उनको लोगों की खूब तालियां मिलती थी लेकिन गांव में लौटने पर ताने भी सुनने पड़ते थे।उनको पंडवानी से सबसे ज्यादा प्यार था, लोगों ने उनको पंडवानी के कारण छो़ड़ दिया लेकिन तीजन ने पंडवानी को कभी नहीं छोड़ा।बताया जाता है कि १९७१ में भिलाई मड़ई से मिले बड़े मंच से उनकी जिंदगी बदल गई।उसके बाद दिल्ली के अशोका हाेटल,भारत भवन,देश भर में प्रतिष्ठित आयोजनो मेें उनको बुलाया जाने लगा।उसके बाद विदेशों में भी उन्होंने जाकर कई कार्यक्रम दिए और देश के साथ ही विदेशों में भी उस पंडवानी को जिसे गांव के चौपालों तक जाना जाता था,तीजन बाई के कारण देश विदेश में पंडवानी को नई पहचान मिली और पंडवानी मतलब तीजन बाई हो गया और तीजन बाई मतलब पंडवानी हो गया।कहीं भी कोई पंडवानी कहता था लोगों के जेहन में एक ही तस्वीर उभरती थी तीजन बाई की।
भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री,पद्मभूषण व पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया था।इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार,श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान, देवी अहल्या सम्मान,एसएस सुब्बुलक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार,मानद डी लिट सहित अऩेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।महान लोककला साधिका के के सम्मान में शिक्षामंत्री गजेद्र यादव ने घोषणा की है कि गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकंडरी स्कूल का नाम बदलकर ड़ा तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकंडरी स्कूल रखा जाएगा।वही विधायक रिकेश सेन ने वैशालीनगर में प्रस्तावित आडिटाेरियम का नाम तीजन बाई आडिटोरियम ऱखने की घोषणा की है। उम्मीद है कि सरकार भी उनकी स्मृति तो चिरस्थायी बनाए रखने के लिए जरूर कुछ न कुछ करेगी।तीजनबाई महिलाओं के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेंगी और यह संदेश देती रहेंगी की तुम्हारे लिए असंभव कुछ भी नहीं है, अगर कुछ करना चाहती है, पाना चाहती हो।झुको मत,टूटो मत,आगे बढ़ती रहो,रास्ता बनाता जाएगा।
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