जकार्ता(वीएनएस)।140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए और 'लोकतंत्र की जननी' के एक गर्वित नागरिक के तौर पर, मैं सभी भारतीयों की ओर से आपको शुभकामनाएं देता हूं... आज सुबह इंडोनेशिया के लोगों ने जो प्यार और गर्मजोशी भरा स्वागत किया, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने का सौभाग्य भी मिला। मैं विनम्र और आभारी हृदय से अनगिनत भारतीयों के प्रति इंडोनेशियाई लोगों के स्नेह को स्वीकार करता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जकार्ता की अपनी यात्रा के दूसरे दिन इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया। यह संबोधन उन्हें राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो द्वारा इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतंग आदिपूर्णा' से सम्मानित किए जाने के बाद हुआ। संसद को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने भारत के प्रति गर्मजोशी, स्नेह और सम्मान के लिए इंडोनेशिया के लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने मिले सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया और राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ अपनी गहरी दोस्ती और मजबूत कामकाजी संबंधों की सराहना करते हुए भारत-इंडोनेशिया संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए और 'लोकतंत्र की जननी' के एक गर्वित नागरिक के तौर पर, मैं सभी भारतीयों की ओर से आपको शुभकामनाएं देता हूं... आज सुबह इंडोनेशिया के लोगों ने जो प्यार और गर्मजोशी भरा स्वागत किया, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने का सौभाग्य भी मिला। मैं विनम्र और आभारी हृदय से अनगिनत भारतीयों के प्रति इंडोनेशियाई लोगों के स्नेह को स्वीकार करता हूं। भारतखबर
भारत का विज़न विस्तार नहीं, बल्कि विकास है
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद में कहा कि भारत का वैश्विक नज़रिया क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बजाय समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने "सबका साथ, सबका विकास" के सिद्धांत पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह सोच सहयोग और सामूहिक भागीदारी के ज़रिए तरक्की के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मोदी ने कहा कि इंडोनेशियाई सांसदों को संबोधित करते हुए वे साझेदारी और सामूहिक विकास का यही संदेश लेकर आए हैं।
समुद्र भारत और इंडोनेशिया को जोड़ता है, अलग नहीं करता
दोनों देशों के बीच भौगोलिक निकटता का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भले ही उनकी राजधानियाँ हज़ारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन उनके बीच का समुद्री फासला सिर्फ़ 150 किलोमीटर के आसपास है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में समुद्र ने जहाँ दूरियाँ पैदा की हैं, वहीं इसने भारत और इंडोनेशिया को हमेशा जोड़े रखा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, दोनों देशों के बीच का समुद्री इलाका एक प्राकृतिक कड़ी है जो उनके साझा भविष्य को आकार दे रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने रिश्तों पर ज़ोर देते हुए कहा कि यहाँ तक कि उनके नाम भी हिंद महासागर के साथ गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पीढ़ियों से दोनों देशों के बंदरगाह व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सभ्यताओं के मेल-जोल के केंद्र रहे हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र को व्यापक दुनिया से जोड़ने में मदद की है।
मज़बूत रणनीतिक साझेदारी का आह्वान
इस साझा विरासत को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया से आग्रह किया कि वह द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करे। विशाल हिंद महासागर से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपनी समुद्री साझेदारी की अपार संभावनाओं का लाभ उठाना चाहिए और सहयोग, कनेक्टिविटी तथा क्षेत्रीय समृद्धि के नए रास्ते बनाते हुए अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए।
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