रायपुर (वीएनएस)। राजधानी रायपुर के मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में नवोदय वर्षायोग 2026 (चातुर्मास) के अंतर्गत आषाढ़ अष्टान्हिका पर्व का तीसरा दिन अत्यंत भक्तिभाव एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
नवोदय तीर्थ वर्षायोग 2026 समिति (चातुर्मास) के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि आज प्रातः 8 बजे मूलनायक भगवान आदिनाथ के समक्ष भव्य अभिषेक एवं रिद्धि-सिद्धि प्रदाता शांतिधारा का आयोजन संपन्न हुआ। मुनि आगम सागर के मुखारविन्द से मंत्रोच्चारित चमत्कारिक शांतिधारा करने का परम सौभाग्य बासवाड़ा (राजस्थान) निवासी अजीत जैन एवं प्रतीक जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
प्रातः 8:30 बजे आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आगम सागर ने अपने ओजस्वी प्रवचन में समाज एवं जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यदि धन गया तो कुछ नहीं गया, तन गया तो थोड़ा सा गया, लेकिन यदि चरित्र चला गया तो समझो सब कुछ नष्ट हो गया। जीवन में नैतिकता और चरित्र सबसे बड़ा धन है।
व्यापार के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने सचेत किया कि इंटरनेट पर जुए और सट्टे की तरह व्यापार न करें। सपने सामने देखकर वास्तविक व्यापार करें, क्योंकि मेहनत से कमाए पैसे की ही असली कीमत होती है।
समाज के प्रबुद्ध जनों का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा दुनिया की दो सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं, संपूर्ण समाज को इस दिशा में ठोस कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मुनिराज को आहार कराना और चौक लगाना पूरी तरह भावों की चीज़ है, इसे हमने जटिल बना दिया है। जो भी भोजन शुद्धता और सच्ची श्रद्धा से बनता है, उसे मुनिश्री सहर्ष स्वीकार करते हैं।
ज्ञान का घमंड करने वालों को आगे चलकर मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आगाह किया कि देव-शास्त्र-गुरु और मंदिर की संपत्ति का दुरुपयोग हर जन्म में भोगना पड़ता है, इसलिए संगति और विचारों को सदैव पवित्र रखें।
प्रवचन एवं धर्मलाभ के उपरांत मुनि ससंघ की आहार चर्या समस्त जैन समाज द्वारा अत्यंत भक्तिभाव के साथ संपन्न कराई गई।
कार्यक्रम में नवोदय वर्षायोग समिति 2026 के पदाधिकारियों, दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों, कार्यकारिणी सदस्यों सहित रायपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों धर्मप्रेमी बंधुओं की उपस्थिति रही। आयोजकों ने सभी धर्मप्रेमी जनता से अष्टान्हिका पर्व के दौरान प्रतिदिन होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
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