नईदिल्ली(वीएनएस)।विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया, जहाँ NEET मुद्दे पर सरकार से चर्चा की मांग प्रमुख थी। हंगामे के बावजूद, सदन ने महत्वपूर्ण खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया और विवादास्पद FCRA विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने को मंजूरी दी, जो विधायी प्रगति और राजनीतिक गतिरोध के बीच संतुलन दिखाता है।
आज क्या कुछ हुआ
भारतीय जनता पार्टी की सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को कहा कि उन्होंने किसी राज्य की वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की और राज्यसभा से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे भारत को सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर बांटने की भावना पैदा हो। यह स्पष्टीकरण उन्होंने माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के उस आरोप के सिलसिले में दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सदस्य ने उन्हें बार-बार ‘‘लुंगीवाला’’ कहा था।
लोकसभा ने बुधवार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 विपक्ष के हंगामे के बीच पारित कर दिया, जिसके तहत राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोका जाएगा। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए केंद्र सरकार ने खनिज वाले क्षेत्रों में खनिज संपदा की मात्रा से संबंधित निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज-युक्त भूमि के विनियमन को भी अपने नियंत्रण में लेने का प्रावधान किया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच विधेयक को सदन में चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया।
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने बिहार में कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) व्यवस्था खत्म करने के लिए राज्यसभा सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना करते हुए बुधवार को कहा कि इस कदम से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे बैंक खातों में मिलने लगा। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान झा ने नीतीश कुमार के दो दशक से अधिक समय बाद संसद में लौटने का भी उल्लेख किया।
लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रमुक ने विधेयक को अल्पसंख्यकों के खिलाफ करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक में एक भी प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है तथ यह सिर्फ देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ध्वनिमत से मंजूरी दी। विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह विधेयक गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है
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