कवर्धा (वीएनएस)। पूर्ण रूप से कृषि पर आधारित व राजनैतिक रूप से पुष्ट वीवीआईपी जिला-कबीरधाम जिला गठन के बाद से विकास की ओर अग्रसर हो युवा कबीरधाम हो चला है । जिले में विकास को गति देने में और नयी नयी परियोजनाओं की कल्पना को साकार रूप देने में यहां राजनेताओं के साथ साथ पदस्थ रहे कलेक्टरों की भूमिका भी मुख्य रही हैं। जिसमें से कुछ कलेक्टरों का ही नाम जनता के बीच में लोकप्रिय हुआ और आज भी चर्चा में रहता है
कबीरधाम जिलेे मे प्रथम कलेक्टर के रूप में एस डी अग्रवाल का नाम दर्ज है। इसके बाद जिले मे चौंक-चौराहों पर आम लोंगों की ओर से चर्चा-परिचर्चा में स्वत: ही नाम आतें हैं, उनमें डाक्टर सुब्बारेडडी, एस के तिवारी , सोनमणी बोरा, मुकेश बंसल , नीरज बंसोड़ , श्रीमती आर संगीता , पी दयानंद , अवनीश शरण , रमेश शर्मा और जन्मजेय महोबे व गोपाल वर्मा ही शामिल है । जबकि इस जिले में अभी तक 20 कलेक्टरों की पदस्थापना हो चुकी है और अब 21 वे कलेक्टर के रूप में श्रीमती तूलिका प्रजापति ने जिले की कमान अपने हाथ मे ली है ।
डॉ एम व्ही सुब्बारेडडी को भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना को अल्प समय मात्र ग्यारह माह में चालू कराये जाने के नाम से जाना जाता है। साथ ही सुतियापाट सिंचाई परियोजना, नये कलेक्टर कार्यालय भवन निर्माण,भोरमदेव से बंजारी पालक सडक निर्माण, बोडला से दलदली सडक निर्माण और कलेक्टर बंगला व एस पी बंगला निर्माण मील का पत्थर रहा है ।
सुब्बारेड्डी के बाद सोनमणी बोरा को उर्जावान व युवा कलेक्टर के रूप में याद किया जाता हैं। सोनमणी बोरा के नेतृत्व मेे ग्यारह घण्टे में सैंतीस लााख से अधिक पौधे रोपने का गिनीज बुक आफ लिम्का रिकार्ड में जिला का पहली बार नाम दर्ज हुआ था और कवर्धा जिला कबीरधाम का नाम विश्व स्तर पर पहचाना गया । अब लोग कबीरधाम जिला को ग्रीन जिला के नाम से जानने लगे थे भले ही आज उनमे से अधिकांश रतन जोत पौधों की जोत बुझ चुकी है । सोनमणी बोरा ने कवर्धा शहर को सही मायनें में जिला मुख्यालय के अनुरूप विकास को गति दी थी जिससे कवर्धा कस्बा को आज का कवर्धा शहर बनाया। जो लोग पहले का कवर्धा देखें है और आज का कवर्धा देखतें है तो वे लोग स्वत: कह देतें हैं,कि पहले का कवर्धा और आज का कवर्धा में जमीन आसमान का अंतर नजर आता है। कवर्धा शहर में सडकों का चौंडीकरण, डिवाइडर युक्त चमचमाती सडकों का निर्माण, शहर में दुधिया हाईमास्क लाइट, तालाबों का सौंदर्यीकरण, म्युजिकल फाउण्टेंन (वर्तमान में लापता ) से सुसजिजत उर्जा पार्क और अटल उदयान का निर्माण (वर्तमान में लापता ) , गांधी मैदान व सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान में कलात्मक बाउंड्रीवाल का निर्माण, जिला अस्पताल निर्माण, नये जिला पंचायत भवन निर्माण, पृथक महिला कालेज निर्माण, भोरमदेव मंदिर परिसर में गार्डन निर्माण, लक्ष्मण झुला निर्माण, सरोदा बांध में गार्डन निर्माण आदि कार्यों को संपादित कराये जाने के नाम से आज भी याद किये जातें हैं।
इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कलेक्टर सोनमणी बोरा के साथ अमित कटारिया, श्रीमती शालिनी रैना, रजत कुमार, जैसे युवा अधिकारियों की टीम थी। कवर्धा शहर का चौंडीकरण करने में अमित कटारिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थीे परंतु आई ए एस लोगो में एकदूसरे के काम को आगे बढ़ाने की जगह खुद कुछ नया करने की चाहत पुराने कार्यो के रख रखाव नहीं होने के चलते रख रखाव के आभाव में तालाब गंदे तो उद्यान उजाड़ हो गए । बोरा के कार्यकाल के दौरान अधिक उत्पादन के चलते गन्ना खरीद कर जलाये जानें का निर्णय ने सोनमणी बोरा द्वारा किये गयेे सभी विकास कार्यो पर दाग की तरह काम किया । इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कलेक्टर बोरा ने किसानों का एक-एक गन्ना खरीदकर भुगतान कराया।और गन्ना किसानों को राहत प्रदन की थी जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमण भी काफी प्रभावित हुए थे ।
बोरा के बाद आये सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी और पी दयानंद को चुनाव मेंनेजमैन्ट के कारण से जाना जाता रहा है। कलेक्टर परदेशी और दयानंद ने विधान सभा, लोक सभा, त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों का निर्वाचन निर्वादित रूप से संपन्न करायें। परदेशी ने ही बुढा महादेव मंदिर कवर्धा से भोरमदेव मंदिर तक पदयात्रा का शुभारंभ किये, जिसके परिणाम स्वरूप आज भोरमदेव मंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर पर्यंटन के क्षेत्र में दिनों-दिन ख्याति प्राप्त हो रही है। आज भी परदेशी , पी दयानंद , श्रीमती आर संगीत श्रावण मास के प्रथम सोमवार को जहां भी रहें, पदयात्रा में शामिल होंने आते जरूर है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना पहली बार फायदे में आया, शेयरधारकों और गन्ना उत्पादक कृशकों को बोनस वितरण प्रारम्भ किया गया जिसका श्रेय परदेशी को जाता है।
जिला कबीरधाम का ग्यारहवें नम्बर में पदस्थ कलेक्टर मुकेश बंसल ने तो अपनी अलग ही पहचान बनायी है । अपने काम को ही पूजा मानने वाले इस कलेक्टर ने विकास को नयी गतिशीलता दी है । शहरों की जगह गांव-गांव में विकास कैसा किया जाता है दिखा दिया था । उनके कार्यकाल में गांव भी शहर की तरह सुंदर और आकर्शित लगनें लगे। बैगा बाहुल्य क्षेत्र का गांव रेंगाखार में सुंदर गार्डन, बस स्टैण्ड, आश्रम, सुंदर बाजार, खाद्य गोदाम, सुंदर चौंक का निर्माण और सी सी रोड निर्माण कर गांव का स्वरूप बदल दिये गये इसी तरह दलदली की तस्वीर बदली और अंतिम व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं को पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया । इसी तर्ज पर पोंडी, बोडला , सहसपुर-लोहारा , पाण्डाताराई , पण्डरिया , मोहगांव , कुकदुर , झलमला , पिपरिया , दामापुर , कुण्डा , कुई आदि गांवों का कायाकल्प कर जिले को एक नयी पहचान दी थी । बंसल ने आई ए पी राशि का समय से पहले निर्माण कार्य संपादित करानें में देश में प्रथम स्थान पर जिला-कबीरधाम को लाकर खडा किया साथ ही जो कार्य सत्र-2007-08 व 2009-10 से अपूर्ण पडे थे उन कार्यों को भी विषेश रूचि दिखाते हुये पूर्ण कराया । शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र मे भी योगदान उल्लेखनीय है ।
जिले की पहली महिला कलेक्टर श्रीमती आर संगीता अपनी कड़क छवि व कठोर प्रशासनिक छवि व राजनैतिक दबावों से परे रहने के नाम से जानी जाती रही है । चौदवें कलेक्टर के रूप में पी दयानंद ने अपनी उपस्थिति दी । प्रदेश के मुखिया डा रमन सिंह जिले मे विभिन्न कार्यक्रमो में जिला प्रशासन की व्यवस्था ओैर भीड देखकर लोग अचंभित हो उठे, इसके पहले इतने लोगों की कार्यक्रम में सहभागिता देखने को नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने भी कलेक्टर की तारीफ भी की थी । इन्हें भाजपा के लिए लक्की कलेक्टर भी कहा जाता रहा है ।
दयानन्द के बाद आये कलेक्टर धनञ्जय देवांगन के सहज सरल व्यवहार से ग्रामीण जान काफी खुश नज़र आते रहे है परंतु इनके कार्यकाल में 275 दिनों में 500 नवजात शिशुओ की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोली तो शिक्षा के शिक्षा के क्षेत्र में मिशन 75 ला कर जिले को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां दी है । युवाओ को स्वरोजगार की दृष्ट से ट्रेंड करने और प्रेरित करने कौशल उन्नयन में विशेष रुचि ले कौशल उन्नयन के कार्यक्रम चलाये । उनके सहज सरल स्वभाव के चलते लोगो के बीच सरपंच साहब और नोटिस मास्टर के रूप में लोकप्रिय रहे है ।
अब धुर नस्सल जिले में पदस्थ रहे दबंग कलेक्टर नीरज कुमार बंसोड़ जिन्होंने सुकमा को एक नई पहचान दी थी ने जिले की कमान सम्हाली किंतु विकास के लिए सड़क चौड़ीकरण के कार्य के ऋषभदेव चौक में पहुंचते ही रसूखदार के घर के सामने पहुंचा विकास का पहिया अटक गया और राजनीतिक हस्तक्षेप से शहर विकास की महत्वकांशी योजना के अटकने से निराश हुए नीरज बंसोड़ जिले में 6 माह की अल्पावधि में ही जिले से दुखी मन से रवाना हो गए । नीरज बंसोड़ की पदस्थापना से सोनमणि बोरा और मुकेश बंसल के बाद धीमी पड़ी हुई विकास की गति को बुलेट ट्रेन सरीखी स्पीड मिलने की उम्मीद थी किंतु राजनीति के शिकार नीरज बंसोड़ को मौका नही मिल पाया और जिले के विकास को मिलने वाली स्पीड थम गई ।
बाद के कलेक्टर अवनीश शरण ने चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र को बेहतर बनाने आमूलचूल परिवर्तन किया जिसमें उनके द्वारा वनांचल क्षेत्रो में स्वस्थ्यसेवाओ को बेहतर करने बाइक एम्बुलेंस और जिले के वनांचल क्षेत्र के शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षा के साथ साथ रोजगार का भी सृजन करने का एक सफलतम प्रयास किया । शिक्षा के साथ रोजगार की सोच के चलते संरक्षित बैगा व आदिवासी परिवार के शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में पदस्थ कर शिक्षा और रोजगार की राह खोली थी । विश्वव्यापी कोविड महामारी के प्रथम संकमण काल में उन्होंने कोविड के संक्रमण को रोकने के लिए जबरदस्त रणनीति तैयार कर जन सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया ।
अवनीश शरण के बाद महामारी के दूसरे महा संक्रमण के दौर में कलेक्टर रमेश शर्मा ने जिले की कमान सम्हाली और वे अपने सहज सरल व्यवहार के कारण जनता के बीच अपनी एक अच्छी छवि बना पाए । कॅरोना काल के दूसरे महा संक्रमण के दौर में भी अपने बेहतर मैनेजमेंट और कॅरोना मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने निजी चिकित्सालयों से समन्वय का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया , सालों से नजूल में अटकी पड़ी फाइलों के तेजी से निपटान कर शहर वासियों को राहत दी और आदिवासियों की नियम कानून के पेंच में फंसी पड़ी जमीनों की अनुमति देने और झंडा कांड के बाद बने जिले के गंभीर हालात पर कुशलता पूर्वक काबू करने की प्लानिंग व जिले में शान्ति व्यवस्था में बेहतर प्रयास के लिए आज भी याद किये जाते है ।
रमेश शर्मा के बाद जन्मजेय मोहबे के कार्यकाल की बात करें तो कबीरधाम (कवर्धा) जिले में उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बैगा समुदाय के बच्चों एवं महिलाओं के लिए उन्हीं की बोली भाखा में कुपोषण से मुक्त कराने की दिशा में “पुट बारो सेढ़ी बढ़न” (पुट बारो सेरी बाढ़न) जैसे अभिनव अभियान की शुरुआत कर जनजातीय क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य के मुद्दे को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में लोकतंत्र के दो महापर्व विधानसभा एवं लोकसभा निर्वाचन का सफलतापूर्वक संम्पन्न भी हुआ, जिसमें स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करते हुए आमजन के लोकतंत्र और निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति विश्वास को कायम रखने में महत्वपूर्ण सफलता मिली ।
मोहबे के बाद 20 वे कलेक्टर गोपाल वर्मा जिले में लोहारिडीह कांड , कामठी कांड में बेहतरीन प्रशासक की भूमिका व मेडिकल कालेज की सौगात और भूमिपूजन के बाद 10 साल से नए बस स्टैंड जाने को तरसती बसों को नए बस स्टैंड शिफ्ट करने ले लिए विशेष रूप से जाने जाएंगे ।
अब राजनैतिक रूप से पुष्ट और विपक्ष ने सदा निशाने पर रहने वाले जिला कबीरधाम की 21 वीं कलेक्टर के रूप में श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिले की कमान सम्हाली है । इनके समक्ष पूर्व कलेक्टरों के भरोसे और सुशासन की परंपरा को और आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। राजस्व नजूल व आदिवासियों के बिक्री की अनुमति के लिए धूल खाती फाइलों , अवैध खनन, अतिक्रमण, भू-माफिया व अन्य प्रशासनिक चुनौतियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति क्रियान्वित होगी या प्रभावशील राजनीति हावी होगी अभी भविष्य के गर्भ में है किंतु सालों से थम सी गई विकास की गति को फिर से रफ्तार मिलने की उम्मीद आमजन के मन में है । नव पदस्थ कलेक्टर को शासन-प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करते हुए सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना, कुपोषण की चुनौती पर प्रभावी ढंग से काम करना तथा युवाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक चुनौतियों में शामिल होंगी। साथ ही कामठी जैसे विवाद , लोहारिडीह जैसे कांड , झंडा कांड के बाद बने धार्मिक विवाद व जातिय हिंसा कर्फ्यू , धरमपुरा कांड , हरमो कांड की पुनरावृत्ति ना हो जिले की शांति व्यवस्था बनाये रखने के साथ साथ पूर्व मुख्य मंत्री व वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमण सिंह व उपमुख्य मंत्री विजय शर्मा के गृह जिले व पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सदा निशाने पर रहने वाली कबीरधाम जिले में राजनैतिक संतुलन बनाये रखना भी चुनौतीपूर्ण होगा । राजनैतिक संतुलन के साथ साथ जिले में शासन की योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं को सहज, सरल एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम छोर तक पहुंचाकर आम नागरिक के मन में यह विश्वास और भावना मजबूत करना होगा कि “यह सरकार मेरी है और शासन-प्रशासन मेरे साथ खड़ा है।”
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