नई दिल्ली(वीएनएस)।राहुल गांधी यूपीआई पर एमडीआर लागू करने को मोदी टैक्स बताकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, संसदीय समिति की रिपोर्ट में पी चिदंबरम सहित कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों ने बिना किसी असहमति के इसका समर्थन किया था। समिति ने यूपीआई के बुनियादी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी।
डिजिटल इंडिया की रीड बन चुके यूपीआई को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस का डबल गेम एक्सपोज हुआ है जिसके खुलासे ने पूरे देश को हैरान परेशान कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सुबह से शाम तक घर से लेकर बाहर तक यह ढोल पीट रहे हैं कि मोदी सरकार यूपीआई पर 0.4% का एमडीआर थोपकर आम जनता की जेब पर डाका डाल देगी। जनता को महंगाई से और मार देगी। सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। उसके आगे घुटने टिक रही। राहुल गांधी सोशल मीडिया पर अपनी दादी इंदिरा गांधी की दुहाई दे देकर प्रधानमंत्री मोदी की रीड की हड्डी पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन यूपीआई पर चिल्लाने वाले राहुल गांधी को किसी और ने नहीं बल्कि उनके अपने ही सांसदों ने पूरी तरह फंसा दिया है। क्या आप जानते हैं कि जिस यूपीआई एमडीआर के फैसले को राहुल गांधी मोदी टैक्स बताकर देश को गुमराह कर रहे हैं। उसी व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की सिफारिश किसी और ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस के दिग्गज सांसदों के जरिए की गई।
मतलब जब बैठक हुई तो कांग्रेस के सांसद उस बैठक में रजामंदी दिखाते हुए नजर आए। जिसका बाहर आकर विरोध कर रहे हैं, उसका अंदर समर्थन किया गया था पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से लेकर मनीष तिवारी और गौरव गोगोई जैसे कांग्रेस के पांच दिग्गजों ने संसदीय समिति की रिपोर्ट पर सहमति बताई। बिना किसी असहमति के यूपीआई पर एमडीआर लागू करने की वकालत दी। लेकिन अब वही कांग्रेस बाहर आकर यूपीआई पर जहर उगल रहा है। सिर्फ मकसद मोदी को निशाना बनाना है। राहुल गांधी जनता को गुमराह कर शोर मचा रहे हैं। आखिर संसद समिति के उस रिपोर्ट का क्या सच है जिसने राहुल गांधी के दोहरे चरित्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। कांग्रेसियों को बेनकाब कर दिया है। चलिए आज परते खोलते हैं और कांग्रेस को ही बेनकाब कर देते हैं।
क्या है पूरा मामला
कहानी की शुरुआत 12 अगस्त को देश की संसद में पेश हुए वित्त संबंधी स्थाई समिति की उस सनसनीखेज रिपोर्ट से होती है। जिसने कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैया की पोल खोल कर रख दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी सांसद भृतु हरी मेहताब की अध्यक्षता वाली इस उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा था कि भारत में यूपीआई और रूप के बढ़ते इस्तेमाल को बनाए रखने के लिए अब एक स्थाई राजस्व मॉडल यानी एमडीआर की सख्त जरूरत है। समिति ने सिफारिश की थी कि यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए टियर आधारित एमडीआर व्यवस्था को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए। इस कहानी में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संसदीय समिति में कांग्रेस पार्टी के पांच-पांच बड़े और कद्दावर सांसद शामिल थे। जिसमें देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोर लाल और के गोपीनाथ के नाम दर्ज हैं। जब यह रिपोर्ट मंजूर हुई तो संसद के पटल पर जब रखी गई तब इन कांग्रेसी नेताओं ने एक शब्द भी असहमति पर दर्ज नहीं कराया। यानी बंद कमरे में कांग्रेस के नेता मोदी सरकार के इस कदम को पूरी तरह जायज ठहरा रहे थे। मतलब चुप्पे साध कर बैठे थे। विरोध नहीं किया था। यह रिपोर्ट के मुताबिक साफ-साफ कहा जा रहा है क्योंकि आपत्ति होती तो विरोध भी करते, इसे आगे बढ़ने से रोकते भी, शोर भी मचाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जैसे ही यह फैसले लागू होने की बारी आई तो राहुल गांधी सड़क पर आकर राजनीति का ड्रामा रचने लगे। अपने सांसदों से नहीं पूछ रहे हैं कि बैठक में क्या हुआ, कैसे हुआ? विरोध क्यों नहीं किया गया? लेकिन बाहर आकर माहौल मोदी सरकार के खिलाफ बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले शुरू कर दिए गए हैं।
राहुल क्यों हैं इतने हमलावर
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बिना देरी करते हुए एक वीडियो जारी कर यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को मोदी टैक्स करार दिया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर डाली। राहुल गांधी ने सरकार पर अमेरिका के आगे घुटने टेकने का बचकाना आरोप लगाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अपनी दादी इंदिरा गांधी का भी किस्सा सुना दिया। राहुल गांधी ने लिखा जब उनसे पूछा गया था कि वो वामपथंत की ओर झुकती है या फिर दक्षिण पंत की ओर तो उनका जवाब था कि वो ना बाई और झुकती है और ना दाई और बल्कि सीधी खड़ी रहती है। राहुल नए-नए आरोप लगाकर मोदी सरकार के इस फैसले पर जमकर चिल्ला रहे हैं। लेकिन देश की जनता आज राहुल गांधी से पूछ रही है कि जब आपकी पार्टी के पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम खुद संसद के रिपोर्ट के समर्थन में खड़े थे, चुप्पी साथ बैठे थे, विरोध नहीं कर रहे थे तो फिर राहुल गांधी किस आधार पर इसे मोदी टैक्स बताकर चिल्ला रहे हैं?
संसदीय समिति की रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के बजट में मोदी सरकार ने यूपीआई और रुपए पर जीरो एमडीआर नीति से पैदा होने वाले भारी भरकम नुकसान की भरपाई के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान किया था। रिपोर्ट के मुताबिक यूपीआई के हर महीने 150 अरब तक ट्रांजैक्शन करने और 60 करोड़ नए यूज़र्स जोड़ने का अनुमान है। इतने विशाल नेटवर्क को चलाने की जो वास्तविक लागत आती है सरकार की 2000 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उस लागत का केवल 11% और संभावित एमडीआर संग्रह का महज 14स ही कवर कर पाती है। समिति ने इसे एक खतरनाक स्ट्रक्चर फंडिंग गैप यानी वित्तीय खाई बता दिया और इसलिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी ताकि सरकारी खजाने पर दबाव ना पड़े। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसे बैंक और पेमेंट्स ऐप को सही फंड नहीं मिला तो यूपीआई की साइबर सिक्योरिटी धोखाधड़ी रोकने का इंतजाम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में नया निवेश पूरी तरह ठप हो जाएगा। और इसी साइबर क्राइम से जनता को बचाने के लिए सरकारी खजाने को बचाने के लिए संतुलित एमडीआर व्यवस्था की सिफारिश कांग्रेस सांसदों ने भी की थी।
चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के फैसले पर राहुल गांधी ने भाजपा और आयोग पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की है। यह निर्णय टीएम...
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को जोड़ने के लिए कई तकनीकी व प्रशासनिक पहल की गई हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोच्चि में कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आज़ादी मिली, लेकिन सांस्कृतिक आज़ादी नहीं। उन्होंने पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता ...
पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अंतरिम नाम और नए ...