’सेवा की कहानी’ : लक्ष्मी को मिला बिहान का संबल और अब तीन व्यवसायों से संवर रहा जीवन

Posted On:- 2026-09-23




कोरिया (वीएनएस)। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत कैलाशपुर  में रहने वाली लक्ष्मी साहू पर यह कहावत पूरी तरह से लागू होती है। अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिषन बिहान से जुड़कर लक्ष्मी साहू अब तीन व्यवसायों का सफल संचालन कर रही हैं। 

कोरिया जिले के ग्राम पंचायत कैलाषपुर के ग्राम ओरगईं में रहने वाली एक सामान्य गृहिणी लक्ष्मी अब गांव में एक व्यवसायी के तौर पर पहचान बना चुकी हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद दृढ़ आत्मविष्वास और आर्थिक मदद की सहायता से लक्ष्मी ने अपने आपको घरेलू महिला से आगे बढ़ते हुए तीन व्यवसायों की संचालिका बन गई हैं। इससे उनका सामाजिक और पारिवारिक महत्व बढ़ा है साथ ही वह एक आत्मनिर्भर महिला बनकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

बिहान से आरंभ

विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलाशपुर के ग्राम ओरगईं में मां महामाया महिला स्व- सहायता समूह में जुडने के बाद लक्ष्मी साहू को समूह में अध्यक्ष की तरह काम करने का मौका मिला। इस समय वह घर की एक सामान्य किराना दुकान में अपने परिवार का हाथ बंटाती थीं। लक्ष्मी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की सोच रखते हुये स्व- सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त की और पहले एक आटा चक्की और फिर बाद में कपड़े की दुकान भी आरंभ कर दी। आज उनके पास स्वयं के तीन व्यवसाय हैं और इससे वह प्रतिवर्ष लाख रूपए से ज्यादा लाभ अर्जित कर रही हैं।

आर्थिक मदद

बिहान से जुड़ने के बाद लक्ष्मी के समूह को आरएफ और सीआईएफ की राषि 15 हजार और 60 हजार रूपए प्राप्त हुए। इसके साथ इन्होने बैंक में लोन का आवेदन देकर एक लाख पचास हजार रूपए का ऋण प्राप्त किया। इस राषि से इन्होने अपने घर में ही आटा चक्की और धान कुटाई की मषीन लगाई। इसके बाद इन्होने अपने घर मे कपड़ों का भी व्यवसाय आरंभ किया। उनकी कड़ी मेहनत से तीनों तरह का व्यवसाय साथ चल पड़ा और अब वह पूरे परिवार के साथ अपने कार्यों में व्यस्त हैं जिससे उन्हे अच्छी आय प्राप्त हो रही है।

अपनी कमाई से बढ़ा आत्मविष्वास

तीन अलग अलग व्यवसाय की संचालिका बन चुकी लक्ष्मी साहू बतलाती हैं कि पहले वह केवल एक घरेलू महिला थीं, घर की दुकान में भी बहुत कम बैठती थीं, बिहान से जुड़कर उनके अंदर एक इच्छाशक्ति जागृत हुई और उन्होने अपने दम पर परिवार के लिए नया कुछ करने का विचार किया। इसमें बिहान ने मदद की और अब उनके पास खुद की आय के तीन साधन है। उन्होने बताया कि लखपति दीदी की श्रेणी में आकर उनका सामाजिक और पारिवारिक सम्मान भी बढ़ा है।



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