भारत को अमेरिका से बड़ी राहत! चुनिंदा दवाओं और फार्मा सामग्री पर जीरो टैरिफ

Posted On:- 2026-09-28




वॉशिंगटन/नई दिल्ली (वीएनएस)। अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ खास फार्मास्युटिकल उत्पादों और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को जीरो टैरिफ वाली श्रेणी में शामिल किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित फार्मा सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, इस फैसले का फायदा भारत से अमेरिका निर्यात होने वाली हर दवा को नहीं मिलेगा। जीरो टैरिफ की सुविधा उन निर्धारित उत्पादों तक सीमित है, जिन्हें अप्रैल में जारी अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा के तहत इस व्यवस्था में शामिल किया गया था।

किन दवाओं को मिलेगी छूट?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पात्र उत्पादों में ऑरफन ड्रग्स (दुर्लभ बीमारियों की दवाएं), न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-आधारित थेरेपी, फर्टिलिटी दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। इसके अलावा केमिकल, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने से जुड़े कुछ मेडिकल उत्पाद तथा कुछ पशु-स्वास्थ्य उत्पाद भी इस सूची में शामिल हैं।

भारत के साथ अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड-लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम को भी पात्र देशों/क्षेत्रों की सूची में रखा गया है।

29 सितंबर से 100% टैरिफ की तैयारी
अमेरिका की मौजूदा नीति के तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़ी सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था अमेरिकी व्यापार विस्तार कानून की धारा 232 के तहत लागू की जा रही है। कुछ कंपनियों के लिए यह नियम 31 जुलाई से प्रभावी हुआ, जबकि अन्य दायरे में आने वाले आयातकों के लिए 29 सितंबर से लागू होना है।

इस बीच, अमेरिकी व्यवस्था में जेनेरिक दवाओं और उनसे संबंधित सामग्री को इस विशेष धारा 232 फार्मा टैरिफ से अलग रखा गया है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय फार्मा उद्योग अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है।

भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए क्या मायने?
भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा निर्माताओं में शामिल है और अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारतीय कंपनियां अमेरिका को तैयार दवाओं के साथ-साथ एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और कई विशेष उपचारों से जुड़े उत्पाद भी निर्यात करती हैं।

ऐसे में चुनिंदा हाई-वैल्यू और स्पेशलिटी फार्मा उत्पादों को जीरो टैरिफ का रास्ता मिलने से उन भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है जो इन श्रेणियों के उत्पाद अमेरिकी बाजार में भेजती हैं। हालांकि, यह राहत व्यापक फार्मा टैरिफ नीति में बदलाव नहीं है और इसका दायरा निर्धारित उत्पादों तक ही सीमित है।

अमेरिका का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर
अमेरिका की व्यापक फार्मा नीति का एक प्रमुख हिस्सा दवाओं के उत्पादन को देश के भीतर बढ़ावा देना है। इसलिए चुनिंदा भारतीय और अन्य देशों के उत्पादों को मिली यह टैरिफ छूट अमेरिकी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने की नीति को समाप्त नहीं करती।

भारत के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कुछ विशेष दवाओं और फार्मा सामग्री को अमेरिकी बाजार में बिना अतिरिक्त टैरिफ प्रवेश का अवसर मिलेगा, जबकि अन्य उत्पादों पर लागू अमेरिकी टैरिफ नियम अपनी जगह बने रहेंगे।



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