सुको के फैसले से मतांतरण पर कुछ तो रोक लगेगी

Posted On:- 2026-10-19




सुनील दास

देश में अवैध मतातंरण एक ऐसी समस्या है जिस पर रोक लगाने की जरूरत है लेकिन राज्य व केंद्र सरकारों के तमाम प्रयासों के बाद भी इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी है।कई तरह के कानून बनाए गए,गांवों में कई तरह की रोक लगाई गई लेकिन अवैध मतांतरण पहले भी होता रहा है और आगे भी होता रहेगा।इसका मकसद होता है कि धर्म विशेष के लोगों की संख्या कर अपने धर्म के लोगो की संख्या बढ़ाई जाए ताकि बाद मे संख्या के बल पर राजनीति कोे प्रभावित कर सत्ता पर कब्जा किया जा सके। हमारा देश सेकुलर है,यहां सभी को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है,साथ ही यदि कोई स्वेच्छा से दूसरा धर्म अपनाना चाहता है तो उसके लिए वैध प्रक्रिया है,उस वैध प्रक्रिया के जरिए वह अपना धर्म बदल सकता है।समस्या यह है वैध रूप से तो बहुत ही कम लोग अपना धर्म परिवर्तन करते हैं लेकिन अवैध रूप से सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन कराया जाता है। इस पर रोक लगाने की जरूरत है। हाल ही में मतांतरण पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उससे उम्मीद की जा सकती है कि मतांतरण पर कुछ तो रोक लगेगी। 
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मतांतरण के बाद आरक्षण का लाभ लेने के मुद्दे पर एक अहम फैसला देते हुए कहा है कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से किसी गैर हिंदू सामाजिक व्यवस्था में मतांतरण करने वाला व्यक्ति अपने पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर संविधान के अनुच्छेद १६(४) के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस्लाम स्वीकार कर लेने मात्र से कोई व्यक्ति राज्य के अधिसूचित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग समुदायों में से किसी एक का सदस्य नहीं बन जाता।सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मतांतरण से पहले की जाति या सामुदायिक पहचान को अपने आप किसी दूसरे धर्म के पिछड़ा वर्ग में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। हिंदू,सिख व बौध्द धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति(एससी) का सदस्य नहीं माना जा सकता।
यह अच्छा हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले से अब हमेशा के लिए साफ कर दिया है कि यदि अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति मतांतरण कर लेता है यानी धर्म बदल लेता है तो फिर वह अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का होने के कारण उसको जो आरक्षण का लाभ मिल रहा था वह अब नहीं मिलेगा क्योंकि वह अब धर्म बदलने के कारण अनुसूचित जाती या अन्य पिछडा़ वर्ग का नहीं रहा।ऐसा निर्णय पहले मद्रास हाईकोर्ट ने दिया था जिसे तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। क्योंकि वह इस नियम को बनाए रखना चाहती थी कि यदि कोई अऩुसूचित जाति या ओबीसी मतांतरण कर लेता है तो उसे आरक्षण का लाभ मतांतरण के बाद भी मिलता रहेगा। यानी कोई इस्लाम या ईसाई धर्म अपना लेता है तो भी उसे अनुसूचित जाति व ओबीसी में रहते जो आरक्षण का लाभ मिलता था वह मतांतरण के बाद भी मिलता रहेगा।इससेे तो सनातन को नुकसान हो रहा था साथ ही मतांतरण के बल भी मिल रहा था।
तमिलनाडु सरकार ने जैसा नियम बना रखा था उससे से मतांतरण को बढ़ावा मिल रहा था क्योंकि मतांतरण के बाद मतांतरण करने वालों को आरक्षण का लाभ पहले जैसा मिलता था,वैसा मिलता था।इससे एससी व ओबीसी के अधिकार को नुकसान हो रहा था। यानी जो लाेग मतांतरण के बाद एससी या ओबीसी नहीं रहे उनको भी एससी व ओबीसी को मिलने वाले आरक्षण का लाभ मिल रहा था।इस दोहरे लाभ के लिए अवैध मतांतरण को बल मिल रहा था क्योंकि कोई स्वेच्छा से नहीं मतांतरण के कारण मिलने वाले लाभ व मतांतरण के बाद मिलने वाले लाभ के ही ज्यादा मतांतरण हो रहा था। कड़़वी सच्चाई यह भी है कि हिंदू धर्म को मानने वाले किसी लोभ व लालच के कारण मतांतरण तो कर लेते हैं लेकिन मतांतरण के नए पंथ में भी उनको जातिगत भेदभाव का शिकार होना पड़ता है।यही वजह है कि दलित इसाइयों व दलित मुसलमानों के संगठन बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कि अब अनुसूचित जाति व ओबीसी के लोग मतांतरण करते हैं तो उनको अजा व ओबीसी में रहते आरक्षण का लाभ जो मिलता था अब मतांतरित हो जाने के बाद नहीं मिलेगा तो हाेगा यह कि अब जो लोग दोहरे लाभ के कारण मतांतरण करते थे वह अब दोहरा लाभ नहीं मिलने के कारण मतांतरण नहीं करेंगे। अनुसूचित जाति व ओबीसी में रहने पर आरक्षण का लाभ मिलेगा तो वह मतांतरण नहीं करेंगे क्योंकि मतांतरण करने पर अब आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मतांतरण पर पूरी तरह रोक भले न लगे लेकिन आरक्षण लाभ मतांतरण के बाद नहीं मिलने के कारण बहुत से लोगों को लगेगा कि आरक्षण का लाभ जब मिलना नहीं है तो मतांतरण क्यो किया जाए। अनुसूचित जाति व एसटी के लोग तो मांग कर ही रहे थे कि कोई मतांतरण करता  है तो उसे आरक्षण नहीं मिलना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनकी यह मांग भी पूरी हो गई है।



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