हर क्षेत्र में कुछ खास लोग होते हैं, वह खास इसलिए होते हैं कि उन्होंने कुछ ऐसा काम किया होता है जो दूसरे भी करते हैं लेकिन वैसे सफल नहीं होते है जैसे वह करते हैं यानी काम का जिम्मा लिया तो सफलता तय होती है।उनको कोई काम सौंपा ही ऐसा जाता है जो दूसरे के बस का नहीं होता है।कठिन से कठिन काम जिसमें सफलता जरूरी होती है,ऐसा काम हर कोई कहां कर पाता है कुछ लोगों को तो कठिन काम सौंपा ही इसलिए नहीं जाता है कि वह कठिन काम है, कुछ लोगों को इसलिए नहीं सौंपा जाता है कि वह सफल नहीं होंगे। जैसे किसी राज्य में पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती तो उनको काम सौंपा जाता है कि तुमको इस राज्य में पार्टी को चुनाव जिताना है।किसी राज्य में संगठन कमजोर है तो संगठन को मजबूत करने का काम सौंपा जाता है।अमित शाह भाजपा के ऐसे ही नेता हैं,उनको जो काम भी सौंपा गया है,वह उसमें सफल रहे हैं।
केंद्र में तीन लोकसभा चुनाव भाजपा जीतती आ रही है तो इसका बड़ा श्रेय नरेंद्र मोदी के अलावा किसी बड़े नेता को दिया जा सकता है तो वह अमित शाह हैं। देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा को चुनाव जिताने का श्रेय भी पीएम मोदी के अलावा किसी को दिया जाता है तो अमित शाह को दिया जाता है।माना जाता है कि वह किसी भी राज्य की जमीनी हकीकत से वह जितने वाकिफ होते हैं कोई दूसरा नेता उतना वाकिफ नहीं होता है। वह चुनाव कैसे जीता जा सकता है,यह बखूबी जानते हैं,चुनाव जीतने के लिए किस लेबल क्या किया जाना है,वह जानते हैं। किसी राज्य में गुटबाजी है और गुटबाजी के कारण पार्टी को नुकसान हो सकता है तो वह गुटबाजी को खत्म कर हर नेता का चुनाव जीतने के लिए कैसा उपयोग करना जानते हैं,वह पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं का सही उपयोग करना जानते हैं, इसलिए वह हर काम में खुद खूब मेहनत करते हैं और दूसरों को भी खूब मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही वजह है कि जहां भाजपा चौथे नंबर की पार्टी थी,उस यूपी में अमित शाह भाजपा को चुनाव जिताकर एक नंबर की पार्टी बनाते हैं।आतंकवाद,नक्सलवाद समाप्त करना बहुत कठिन काम था,यह काम भी अमित शाह ने करके दिखाया और साबित किया है कि असंभव कुछ भी नहीं होता,काम करना आना चाहिए।
ओडिशा में दो दशक बाद भाजपा की सरकार बनी है तो इसका श्रेय भी मोदी के साथ अमित शाह को जाता है,पं.बंगाल १५ साल बाद भाजपा की सरकार बनी है तो इसका श्रेय भी मोदी के साथ अमित शाह को जाता है।चुनाव में मोदी मैजिक तो काम करता है लेकिन शाह की मेहनत को भी इसका श्रेय जाता है।इसलिए जिस किसी चुनाव में अमित शाह चुनाव के दौरान बता देते हैं कि भाजपा कितनी सीटों पर जीत रही है तो कई लोगों को लगता है कि शाह यूं ही भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए कह रहे हैं लेकिन जब चुनाव का रिजल्ट आता है तो पता चलता है अमित शाह ने जो कहा था वह सच ही कहा था।अमित शाह पार्टी की जीत के बार में बड़े विश्वास से इसलिए कह पाते हैं कि उनको मालूम रहता है कि जीत के लिए जो कुछ किया जाना है,वह सब किया गया है,किया जा रहा है।इसलिए जब अमित शाह यह कहते हैं कि भाजपा अगले तीस साल सत्ता में रहने वाली तो उनको मालूम है कि ऐसा होगा तो क्यों होगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अगले तीन दशकों तक सत्ता से बाहर रहेगी तो यूं नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली लौटने पर राहुल समझ लें कि अगले तीस सालों तक उनकी बारी नहीं आएगी। कांग्रेस पार्टी अगले तीन दशकों तक सत्ता से बाहर रहेगी।शाह ने बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगाने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल कई राज्यों में दशकों से सत्ता से बाहर रहे हैं। उन्होंने कहा विरोध-प्रदर्शन करने से कुछ हासिल नहीं होता।राहुल गांधी व अमित शाह में बड़ा फर्क यह है कि राहुल गांधी को जमीनी हकीकत का पता नहीं रहता है और अमित शाह को जमीनी हकीकत का पार्टी में सबसे ज्यादा पता रहता है।
राहुल गांधी और अमित शाह में एक फर्क यह भी है कि अमित शाह जानते हैं कि पार्टी की जीत के लिए संगठन का जमीनी स्तर पर मजबूत होना जरूरी है और वह यह भी जानते हैं कि पार्टी संगठन को कैसे मजबूत किया जा सकता है और वह ऐसा कर चुके हैं जबकि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रस संगठन के तौर पर कमजोर होती गई है और चुनाव हारती जा रही है। ऱाहुल गांधी मानते नहीं है कि पार्टी उनके कारण और संगठन की कमजोरी के कारण चुनाव हार रही है। अमित शाह जानते हैं कि कांग्रेस के संगठन के तौर पर कमजोर रहने व राहुल के कांग्रेस के सर्वेसर्वा रहते कांग्रेस केंद्र का चुनाव तो तीस साल नहीं जीत सकती। यानी अमित शाह कांग्रेस नेताओं को बता रहे हैं,आगाह कर रहे हैं कि कांग्रेस वोट चोरी के कारण चुनाव नहीं हार रहे हैं,कांग्रेस के संगठन के कमजोर रहने,राहुल गांधी के अदूरदर्शी नेतृत्व के कारण कांग्रेस अगले तीस साल चुनाव नहीं जीत सकती।
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