सच क्या है और झूठ क्या है,देश जानता है....

Posted On:- 2026-10-15




सुनील दास


राजनीति में कई बार किसी का पक्ष लेने के लिए, मजबूरी में किसी के साथ खड़े होने के लिए,देश को यह बताने के लिए हम सच के साथ खड़े हैं पूरा सच नहीं कहा जाता है,आधा सच कहा जाता है और इस तरह कहा जाता है कि लोगों को लगे कि यह सच है,यही पूरा सच है और देश के लोगों को हमारे सच पर ही यकीन करना चाहिए। देश के लोगों को हम जो कह रहे हैं,उसी पर यकीन करना चाहिए।लेकिन आधे सच की पोल जल्द ही खुल जाती है,सोशल मीडिया के जमाने में कोई इधर आधा सच कहता है और उसके कुछ मिनट बाद ही पूरा सच देश के लोगों के सामने आ जाता है और देश को पता चल जाता है कोई आधा सच कह रहा है तो पूरा सच क्या है।आधा सच अक्सर अपने राजनीतिक फायदे और विरोधी को नुकसान पहुंचान के इरादे से ही कहा जाता है लेकिन कई बार उससे कहने वाले को राजनीतिक फायदा तो नहीं होता है,उल्टे राजनीतिक रूप से नुकसान हो जाता है कि यह आदमी झूठ कहता है और जब भी झूठ कहता है,पकड़ा भी जाता है।
कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ऐसे ही नेता हैं,जब भी आधा सच कहते हैं तो पूरा सच देश की जनता के सामने आ जाता है और उनको राजनीतिक रूप से फायदा होने की जगह नुकसान होता है कि वह आधा सच क्यों कहते हैं,जबकि उनको मालूम है कि कुछ ही देर में उनके आधे सच के जवाब में पूरा सच देश के सामने आ आएगा।राहुल गांधी को कोई जरूरत नहीं थी काकरोच जनता पार्टी के नेताओं के जंतर मंतर में तिरंगा फहराने पर यह कहने की कि जंतर मंतर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और इसके लिए .युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण कदम है।यह सच है कि कहीं पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है।लेकिन तिरंगा कहां फहराया जा रहा है और क्यों फहराया जा रहा है,यह भी विचार का विषय होना चाहिए।जैसे काकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास व आशुतोष रांका को मालूम था कि जंतर मंतर पर प्रदर्शऩ अब नहीं किया जा सकता क्योंकि दिल्ली पुलिस ने उसे विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से निकाल दिया है यानी अब वहां पर किसी भी तरह का प्रदर्शन गैरकानूनी है।
जंतर मंतर में प्रदर्शन गैरकानूनी है मालूम होने के बाद काकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने वहां पर तिरंगा फहराकर प्रदर्शन किया। यानी वहां बिना अनुमति के गए और तिरंगा फहराया। वहां बिना अनुमति के जाना ही पहला अपराध था,इस अपराध की सजा से बचने के लिए दोनों नेता कहते हैं कि हम तो जंतर मंतर तिरंगा फहराने गए थे।वह मानते हैं कि तिरंगा फहराने के कारण उनके अपराध को अपराध नहीं माना जाएगा।ऐसा हुआ उन्होंने जंतर मंतर में बिना अनुमति के गए और इसी अपराध के कारण उनको गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया तो अदालत ने भी उनके इस अपराध को गंभीरता से लिया और उनको जमानत पर रिहा करने की जगह पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज कर एक तरह से मान लिया कि दोनों ने जानबूझकर अपराध किया है इसलिए दोनों को सजा मिलनी चाहिए।
दोनों को पुलिस ने इससे पहले राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाने पर गिरफ्तार किया था और मजिस्ट्रेट का सामने पेश किया गया था तो यहां उनको एक साथ तक शांति बनाए रखने के नाम पर बांड भरवाकर रिहा किया गया था।यानी दोनों ने अदालत से वादा किया था कि वह रिहा होने के बाद ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे बांड की शर्त भंग होती है लेकिन उन्होंनेे एक निजी परिसर से होकर जंतर मंतर में घुसकर वही किया जो अदालत में नहीं करने का वादा किया था। यानी सौरव दास व आशुतोष रांका ने दो अपराध किए एक तो भरे गए बांड के खिलाफ काम किया, दूसरा बिना अनुमति निजी परिसर से होकर जंतर मंतर में गए और झंडा फहराया। उनको झंडा फहराने के कारण गिरफ्तार नहीं किया गया है, उनको गिरफ्तार निजी परिसर में बिना अनुमति जाने और जंतर मंतर में घुसने पर किया गया है। चाहे काकरोच जनता पार्टी हो या कांग्रेस नेता राहुल गांधी वह आधा सच कह रहे हैं कि तिरंगा फहराने कोई अपराध नहीं है और दोनों को तिरंगा फहराने के कारण गिरफ्तार किया गया है।
अब तक राहुल गांधी व कांग्रेस काकरोच जनता पार्टी से दूरी बनाए हुए थे,वह अलग प्रदर्शन कर रहे थे और कांग्रेस अलग इंड़ी गठबंधन के साथ प्रदर्शन कर रही थी। दोनों के बीच होड़ लगी हुई थी कौन ज्ञानेश कुमार का ज्यादा विरोध कर सकता है।एक दिन कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करती थी तो एक दिन काकरोच जनता पार्टी वाले विरोध प्रदर्शन करते थे।पहली बार राहुल गांधी काजपा के नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए बयान दिया है तो इसकी एक वजह तो यही हो सकती है कि वह चाहते हैं कि देश में जो विरोध प्रदर्शन हो रहा है वह बिखरा हुआ न लगे, ऐसा लगे कि विपक्ष के सब नेता एकजुट हैं और एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसा होता है तो माना यही जाएगा कि विरोध प्रदर्शन के बड़े नेता राहुल गाँधी है और उन्होंने ही सबको एकजुट किया है।



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