देश इन दिनों राजनीतिक प्रदर्शनों के दौर से होकर गुजर रहा है।चुनाव के जरिए सत्ता प्राप्त नहीं करने से देश के राजनीतिक दल इतने निराश हो चुके हैं कि चुनी हुई सरकार को बांग्लादेश,नेपाल व श्रीलंका की तरह सत्ता से अराजकता फैलाकर हटाने की लंबी योजना पर काम कर रहे हैं, इसके लिए रोज संविधान से मिले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की आड़ में दिल्ली में अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, लाखों लोगों को इसके कारण रोज परेशानी हो रही है। दिल्ली में बिना अनुमति प्रदर्शन से तो लोगों को कई तरह की परेशानी होती है तथा कहीं भी,कभी भी अचानक किसी संभावित प्रदर्शन को रोकने के लिए जो तैयारी की जाती है उससे भी परेशानी होती है।१२ मार्च को कांग्रेस ने घोषणा कर दी थी कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर एसआईआर में बड़ेस्तर पर नाम काटने,और गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है।इसमें निर्वाचन आयोग,सीईसी ज्ञानेश कुमार,दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु व विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।देश के इतिहास मे आज तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का फैसला पहली किसी राजनीतिक दल ने किया। जो आज तक नहीं हुआ वह सब अब राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रहा है।यह सब खुद को बड़ा व सफल नेता साबित करने के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने तो लगातार चुनाव जीतकर,कई सकारात्मक कार्य कर देश के राजनीतिक इतिहास में अपना व कांग्रेस का गौरव बढ़ाया है। राहुल गांधी कांग्रेस के इतिहास में पहले ऐसे नेता हैं जिनको इस बात का जरा भी यकीन नहीं है कि वह चुनाव देश के सभी राज्यों व केंद्र में अकेले कांग्रेस को जिताकर कांग्रेस की सरकार बना सकते हैं।देश के कुछ राज्यों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस को सत्ता से बाहर हुए दस से तीस साल हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु में १९६७ से यानी ५९ साल से सत्ता से बाहर है,पं. बंगाल में १९७७ से यानी ४९ साल से सत्ता से बाहर है,सिक्किम १९८४ के बाद से यानी ४२ साल से सत्ता से बाहर है,यूपी में १९८९ से यानी लगभग ३७ साल से,बिहार में १९९० से यानी ३६साल से,त्रिपुरा में १९९३ से यानी ३३ साल से,गुजरात १९९५ से यानी ३१ साल से,ओडिशा में २००० से यानी २६ साल से और नागालैंड में २००३ से २३ साल से सत्ता से बाहर है।इसके अलावा कई राज्यों में दस से पंद्रह साल तक भी सत्ता से बाहर रही है, ऐसे राज्य में वह एक बार सत्ता में आती है तो दूसरी बार सत्ता से बाहर हो जाती है यानी जनता पहले जिस तरह कांग्रेस पर लंबे समय तक भरोसा कर सत्ता लंबे समय तक सौंपती थी अब नहीं सौंप रही है इससे साफ है कि देश व कई राज्यों की जनता का भरोसा कांग्रेस व राहुल गांधी खो चुके हैं।
आज देश में गिनती के राज्य ऐसे रह गए हैं जहां की जनता और कोई विकल्प नही होने के कारण कांग्रेस को चुनाव में जिताकर सत्ता सौंपती है तो वह भी कांग्रेस के क्षेत्रीय नेता के प्रभाव सबसे बड़ा कारण होता है।ऐसे राज्य हैं छत्तीसगढ़, मप्र, राजस्थान, हिमाचल,कर्नाटक,झारखंड,पंजाब,केरल।पहले माना जाता था कि गांधी परिवार के कारण ही चुनाव जीतती है, अब माना जाता है कि गांधी परिवार अब चुनाव जिताने वाला नहीं रहा। यही वजह है कि राहुल गांधी जो कांग्रेस को ज्यादातर चुनावों में जिता नहीं पाए हैं और सबसे असफल नेता साबित हुए है, उनको आंदोलन के नाम पर सफल नेता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी के कई दिनों के प्रदर्शन के बाद भी देश के सारे विपक्षी राजनीतिक दल उनके नेतृ्त्व में एकजुट नहीं हुए है।जो एकजुट होने का दिखावा कर रहे है उनमें ज्यादातर राजनीतिक दल ऐसे हैं जो पीएम मोदी व भाजपा से चुनाव में हारे हुए हैं लेकिन अब लगे हुए हैं देश में आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाकर भाजपा व मोदी को हराने के लिए।
कभी चुनाव आयोग तक मार्च,कभी राष्टपति को ज्ञापन सौंपने मार्च,कभी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए मार्च का आयोजन किया ही इसलिए गया है कि देश को यह संदेश दिया जा सके कि देखो विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व मे एकजुट है,विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी ही ऐसे नेता हैं जो पीएम मोदी का विकल्प हैं। विपक्ष में और कोई नेता पीएम मोदी का विकल्प नहीं है।य़ह सारा आयोजन राहुल गांधी के लिए पीएम पद की दावेदारी के लिए किया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती है कि २०२९ या उसके बाद विपक्ष से कोई पीएम पद के लिए राहुल के सामने पीएम पद की दावेदारी करे।यानी वह जगह कांग्रेस राहुल गांधी के लिए रिजर्व करना चाहती है।राहुल गांधी की खुशकिस्मती है कि अब विपक्ष में चुनाव जीतने वाले नेताओं की संख्या कम होती जा रही है,अब दो लोग ही ऐसे हैं जो राहुल गांधी के लिए भविष्य में चुनौती बन सकते हैं, एक हैं तमिलनाडु के विजय वह चुनाव जीतने वाले नेता हैं, दूसरे अखिलेश यादव,अगर वह यूपी का अगला चुनाव जीतते हैं।
इन दोनों नेताओं के अलावा केजरीवाल है तीसरे नेता जो कई बार खुद को राहुल गांधी से बेहतर मोदी के विकल्प के रूप में पेश करने से बाज नहीं आते हैं।वर्तमान में केजरीवाल को पंजाब का चुनाव हर हाल में जीतना है,वह पंजाब में कांग्रेस को हराते हैं तो पंजाब में सत्ता पर रहेंगे और यदि राहुल गांधी और कांग्रेस उनको हरा देती है तो राहुल गांधी का रास्ते की एक बाधा हट जाएगी। यानी साबित हो जाएगा कि राहुल गांधी ही पीएम मोदी का बेहतर विकल्प हैं।यही वजह है अरविंद केजरीवाल काकरोच जनता पार्टी के नेताओं के जरिए देश का यह बताने का प्रयास कर रही है कि राहुल गांधी कहीं से भी मोदी का विकल्प नहीं बन सकते क्योंकि वह ऐसा आंदोलन नहीं कर सकते जैसा काकरोच जनता पार्टी कर सकती है।यही वजह है कि राहुल गांधी रोज आंदोलन व मार्च के जरिए यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि वह काकरोच जनता पार्टी के नेताओं से बडा़ आंदोलन कर रहे हैं।हकीकत यह है कि न तो काकरोच जनता पा्टी के आंदोलन से मोदी सरकार जाने वाली है न ही राहुल गांधी के आंदोलन से मोदी सरकार जाने वाली है।
आदमी से गलती हो सकती है, किसी भी क्षेत्र में आदमी से कोई गलती हो जाए तो उसे जल्दी मान लेना ही ठीक रहता है। इससे ऐसा लगता है कि गलती हो गई तो गलती क...
राजनीति में कई बार किसी का पक्ष लेने के लिए, मजबूरी में किसी के साथ खड़े होने के लिए,देश को यह बताने के लिए हम सच के साथ खड़े हैं पूरा सच नहीं कहा...
हमारे देश मे लोकतंत्र है, लोकतंत्र में किसी बात के विरोध में प्रदर्शन करना विपक्ष के राजनीतिक दलों, गैर राजनीतिक सगंठनों का अधिकार है।सब चाहते हैं ...
छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा की अध्यक्षता में 12 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित आयोग के कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
देश के बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोगों का आचार विचार क्या होना चाहिए,यह तो कई बार कहा जाता है,कहना आसान होता है लेकिन जब कोई आचार विचार की बा...