नारायणपुर (वीएनएस)। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में नारायणपुर जिले में संचालित शासकीय रेशम केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशानुसार जिले में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में रेशम विभाग द्वारा संचालित मल्बरी (शहतूत) ककून उत्पादन गतिविधि महिलाओं के लिए आय का बेहतर माध्यम बनकर उभरी है। इस पहल से समूह की महिलाओं को रोजगार के साथ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में सहायता मिल रही है।
ककून उत्पादन से 2.12 लाख रुपये से अधिक की आय
वित्तीय वर्ष 2026-27 में शासकीय रेशम केंद्र नारायणपुर में मल्बरी (शहतूत) कृमिपालन योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह द्वारा रेशम कीट पालन का कार्य किया जा रहा है। केंद्र में समूह के 12 सदस्य इस गतिविधि में सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। अब तक कुल 1,775 कृमि अंडों के बैच का कृमिपालन किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 733.495 किलोग्राम मल्बरी ककून का उत्पादन प्राप्त हुआ है।
उत्पादित ककून के विक्रय से समूह की महिलाओं को कुल 2,12,713 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, सामूहिक सहभागिता और स्वरोजगार की संभावनाओं को दर्शाती है। रेशम उत्पादन जैसी गतिविधियां महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम करने का अवसर उपलब्ध करा रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के लिए अन्य स्थानों पर निर्भर रहने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
वर्षभर रोजगार उपलब्ध कराने की पहल
शासकीय रेशम केंद्र में महिलाओं को केवल ककून उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि केंद्र के संधारण संबंधी विभिन्न कार्यों में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। निंदाई-गुड़ाई सहित अन्य कार्यों के माध्यम से समूह की महिलाओं को रोजगार के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि के साथ आजीविका को निरंतर बनाए रखने में मदद मिल रही है।
रेशम विभाग द्वारा आगामी जनवरी-फरवरी 2027 में भी मल्बरी ककून उत्पादन कार्य किए जाने की योजना प्रस्तावित है। इससे समूह की महिलाओं को आगे भी रोजगार और आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार रेशम केंद्र की गतिविधियां महिलाओं को नियमित कार्य से जोड़ने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही हैं।
महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं की आजीविका के साधनों का विस्तार करने का उदाहरण है। समूह की महिलाएं सामूहिक प्रयासों से उत्पादन कार्य में योगदान दे रही हैं और अपनी मेहनत के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में सहयोग मिल रहा है।
जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों और आजीविका की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ना है। शासकीय रेशम केंद्र नारायणपुर में मल्बरी ककून उत्पादन की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाती है कि योजनाबद्ध प्रयास, विभागीय सहयोग और महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
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