राजनीतिक दलों के नेताओं को इतना तो पता होता है कि चाहे नेता हो या राजनीतिक दल उसकी इमेज जनता के बीच अच्छी रहनी चाहिए। कम से कम जनता के प्रति उसे संवेदनशील होना चाहिए।संवेदनशील नहीं है तो कम से कम से आचार विचार से तो संवेदनशीलता दिखनी चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाता है कि राजनीति में परसेप्शन का बड़ा महत्व होता है,बनी हुई या बनने वाली इमेज के प्रति नेता और राजनीतिक दल को चुनाव में फायदा और नुकसान होता है। अगर किसी राजनीतिक दल के लिए जनता में यह परसेप्शन बन गया कि इस राजनीतिक दल व उसके नेता को तो जनता की परेशानी, हानि लाभ से कोई मतलब नहीं है तो ऐसे राजनीतिक दल को चुनाव में निश्चित रूप से नुकसान होता है कोई भी आदमी या शहर के लोग ऐसे राजनीतिक दल को चुनाव मे वोट देना निश्चित रूप से पसंद नहीं करेंगे जिसकाे बताए जाने के बाद भी कि आपके इस तरह के आयोजन से एक वर्ग को दस हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है और वह अपना आयोजन रद्द न करे या आयोजन की तारीख न बदले।
कांग्रेस देश में एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के रूप में अपनी इमेज बना रही है,यह जानते हुए भी बना रही है कि आयोजन से पार्टी को जितना फायदा नहीं होना है, उससे ज्यादा नुकसान होना है।अक्टूबर माह में कांग्रेस सहित अन्य संगठनों के आयोजन से राजधानी दिल्ली में व्यापारियों को त्यौहारी सीजन में यानी कमाई के दिनों में बीस हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है।दिल्ली के व्यापारी इस तरह के आयोजनों का पहले ही विरोध कर चुके हैं और कांग्रेस सहित अन्य संगठनों से कह चुके हैं कि त्यौहार के समय दिल्ली में इस तरह के आयोजन न किए जाएं क्योंकि इससे उनको नुकसान हुआ है।इसके बावजूद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के राम लीला मैदान में रैली का आयोजन करने का फैसला किया है,दिल्ली चलो मार्च का आयोजन किया है।दस लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य तय किया है।
कांग्रेस के इस एक नवंबर को होने वाले आयोजन को लेकर व्यापारिक संगठन चेंबर आफ ट्रेड एवं इंडस्ट्रीज (सीटीआई) ने कांग्रेस व विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि एक नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली को टाल दे और दिवाली के बाद उसका आयोजन करें क्योंकि दिवाली के पहले ऐसा आयोजन किया जाएगा तो इससे दिल्ली के व्यापारियों को दस हजार करोड़ का नुकसान होगा।सीटीआई का कहना है कि दिल्ली में धनतेरस के आसपास २५ हजार करोड़ का व्यापार होता है, धनतेरस ६ नवंबर को है और दीपावली ८ नवंबर को है। दिवाली के लिए खरीदारी एक सप्ताह पहले शुरु होती है यानी एक नवंंबर से दीपावली की खरीदारी शुरू होगी और उसी दिन कांग्रेस दिल्ली में रैली का आयोजन करने जा रही है।२० हजार करोड़ का नुकसान पहले हो चुका है तथा दस हजार करोड़ का नुकसान होना तय है क्योंकि कांग्रेस ने तय कर लिया है कि रैली तो वह दिल्ली में एक नवंबर को ही करेगी,व्यापारियों को नुकसान होता है तो भी करेगी।
राहुल गांधी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता है, वह एक बार कोई फैसला कर लेते हैं, वह बदलते नहीं है चाहे उससे व्यापारियों को नुकसान हो या कांग्रेस को नुकसान हो।यही वजह है कि वह सीटीआई के आग्रह के बाद भी कांग्रेस की रैली की तारीख बदलने को तैयार नहीं है, उल्टे भाजपा को रैली के प्रचार के लिए धन्यवाद दे रहे हैं,यह भी कह रहे हैं कि छात्र,किसान,मजदूर,महिलाएं,व्यापारी व युवा जिस जिस को लोकतंत्र की फिक्र है,वह रैली में जरूर आएं।यह रैली में आने वाले लोगों की संख्या से पता चल जाएगा कि राहुल गांधी पर कितने लोग भरोसा करते हैं,कम से कम वे लोग तो रैली में नहीं आएंगे जिनके लिए दिवाली का समय कमाई की सीजन रहता है और उनकी कमाई को नुकसान हुआ तो वह याद रखेंगे कि कांग्रेस के कारण साल में एक बार होने वाली कमाई नहीं हुई और उनको बहुत नुकसान हुआ था और इसी नाराजगी के कारण अगले चुनाव में यह तमाम लोग कांग्रेस को तो वोट नहीं करेंगे।वह कांग्रेस को बताएंगे कि तुमने हमारा नुकसान किया,हम तुम्हारा नुकसान करेंगे।
दिल्ली की रैली व्यापारी वर्ग के विरोध के बाद होती है तो इसका संदेश तो दिल्ली सहित देश के तमाम राज्यों में यही जाने वाला है कांग्रेस व्यापारियों के हित की सोचती नहीं है,व्यापारी विरोधी है और इसका नुकसान उसको आने वाले समय में जहां भी चुनाव होंगे नुकसान होना ही होना है क्योंकि व्यापारी को सभी राज्यों में है उनकी संख्या लाखों करोड़ों में है।कांग्रेस का मालूम है कि जनता उसके वोट चोरी के मुद्दे को सही नहीं मानती हैं क्योंकि जनता को तो इस चोरी का एहसास दो चुनावों में नहीं हुआ है, बिहार व बंगाल में तो चुनाव हो चुके हैं, लोगों ने वोट डाले हैं लेकिन किसी को एहसास नहीं हुआ कि उसका वोट चोरी किया गया है। उसे तो यही एहसास हुआ है कि उसने वोट डाला है और जिसे डाला है, वही जीता है।किसी मुद्दे का कोई महत्व तब ही होता है जब जनता उसे सच माने,राहुल गांधी तो महीनों से वोट चोरी हुआ है कह रहे हैं लेकिन न तो संसद में और न ही अदालत में वोट चोरी का एक सबूत पेश कर सके है।ऐसे में राहुल गांधी देश में कितनी भी रैली कर लें, लाखों की भीड़ जुटा लें,जनता यकीन करने वाली नहीं है कि देश में वोट चोरी होता है।चुनाव आयोग वोट चोरी करता है।
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