नई दिल्ली (वीएनएस)। केंद्रीय बजट में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ (Rare Earth Corridors) की घोषणा को भारत की महत्वपूर्ण खनिज नीति में एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के फेलो और रिसर्चर ऋषभ जैन ने इसे राष्ट्रीय स्तर की नीतियों से आगे बढ़कर राज्य-स्तरीय, जमीन पर लागू होने वाला मॉडल करार दिया है।
ऋषभ जैन ने कहा कि रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा स्थानीय मूल्य संवर्धन (Local Value Addition) पर केंद्रित है, जो अब तक मुख्य रूप से नीतिगत और नियामकीय सुधारों तक सीमित रही रणनीति से एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है। यह पहल राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) और हाल ही में घोषित मैग्नेट विनिर्माण योजना को तटीय और खनिज-संपन्न राज्यों में व्यावहारिक रूप से लागू करने में मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि खनिज संपन्न राज्यों में आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थापित कर अपस्ट्रीम माइनिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के बीच की खाई को पाटा जा सकता है, जो अब तक भारत की बड़ी चुनौती रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट में इस मंशा को ठोस वित्तीय समर्थन भी दिया गया है। इसके तहत अनुसूची XII के अंतर्गत खोज (Exploration) के लिए कर कटौती का विस्तार और प्रसंस्करण मशीनरी पर आयात शुल्क में छूट शामिल है, जिससे निजी क्षेत्र के निवेश से जुड़े जोखिमों में कमी आएगी।
मौजूदा पहलों से मिलेगी रफ्तार
सीईईडब्ल्यू के अनुसार, इस पहल को महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क, स्टॉकपाइलिंग नीति और एनसीएमएम के तहत स्थापित उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) जैसी मौजूदा योजनाओं के साथ जोड़कर तेजी से लागू किया जा सकता है।
प्रोसेसिंग बनी सबसे बड़ी कड़ी
सीईईडब्ल्यू के विश्लेषण में यह भी रेखांकित किया गया है कि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में खनिज प्रसंस्करण (Mineral Processing) अब भी सबसे बड़ी लापता कड़ी है। रेयर अर्थ कॉरिडोर इस कमी को दूर करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की चुनौतियां और सुझाव
हालांकि, ऋषभ जैन का मानना है कि इन कॉरिडोर की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को घरेलू मांग को सुरक्षित करने हेतु ऑफटेक गारंटी पर भी काम करना होगा। इसके साथ ही अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को दोगुना करने और जापान, ब्रिटेन तथा यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ साझेदारी कर जटिल सिंटरिंग प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सरल बनाना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, बजट में रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा को भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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