नई दिल्ली (वीएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा दायर 25 अलग-अलग जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उन्हें अदालत आने के बजाय संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील सचिन गुप्ता ने पीठ के समक्ष अपनी याचिकाएं वापस लेने की इच्छा जताई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
पीठ की सख्त लेकिन संतुलित टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने कहा कि एक वकील को अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करते हुए पहले संबंधित अधिकारियों को मुद्दों से अवगत कराना चाहिए।
सीजेआई ने कहा कि कानूनी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के रूप में याचिकाकर्ता को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए अधिकारियों को संवेदनशील बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
‘जरूरत पड़ने पर ही आएं कोर्ट’
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारियों के स्तर पर समाधान नहीं निकलता, तब ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि उचित समय आने पर जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
किन मुद्दों पर दायर थीं याचिकाएं
इन जनहित याचिकाओं में कई अलग-अलग विषय शामिल थे, जैसे—देश में एक समान संपर्क भाषा की नीति, टीवी पर कानूनी जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने के दिशा-निर्देश, साबुन में उपयोग होने वाले रसायनों के लिए मानक तय करना और भिखारियों व ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के लिए नीति बनाना।
पहले भी लग चुकी है फटकार
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने वकील सचिन गुप्ता की कई याचिकाओं को “निराधार” बताते हुए खारिज कर दिया था। इनमें प्याज और लहसुन में “तामसिक ऊर्जा” से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन की मांग जैसी याचिकाएं भी शामिल थीं, जिस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
इस बार अदालत ने सख्त टिप्पणी के साथ संतुलित रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को सही प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी है, जिससे न्यायिक समय का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
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