जीत सामूहिक जिम्मेदारी इसलिए जश्न सामूहिक होता है

Posted On:- 2026-05-06




सुनील दास

भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है, देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा व एनडीए की सरकारें हैं।मोदी युग में भाजपा का जैसा विस्तार देश में हुआ है,वह अभूतपूर्व है।सही मायने में आज लगता है कि भाजपा ही कांग्रेस का विकल्प है और जिस मुकाम पर इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस थी आज उस मुकाम पर भाजपा है और जिस स्थिति में कभी भाजपा थी,उस स्थिति में आज कांग्रेस है।भाजपा और कांग्रेस में आज जमीन आसमान का फर्क है तो इसकी वजह यह है कि भाजपा व कांग्रेस की कार्यप्रणाली मे अंतर है।भाजपा आज ऐसी चुनावी मशीनरी बन चुकी है जिसके लिए असंभव कुछ नहीं है।

मोदी युग के पहले पं.बंगाल मे भाजपा कहीं भी नहीं थी।वहां कभी कांग्रेस,वामपंथीदलों की तूती बोलती थी।कोई सोचता नहीं था कि भाजपा कभी बंगाल मे सरकार बना सकती है। मोदी युग में सोचा ही नही गया नहीं प्रयास शुरू किया गया।कहा जाता है कि कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती। भाजपा ने पं.बंगाल में इस बात को सही साबित करके दिखाया है।भाजपा ने १५ साल पं.बंगाल में कड़ी मेहनत की है। उसके कार्यकर्ताओं ने भाजपा के जड़े मजबूत करने के लिए जान की कुर्बानी दी है।पहली बार चुनाव लड़ा,हार गए। फिर चुनाव जीतने की रणनीति बनाई फिर हार गए।दो बार पं.बंगाल में हारने के बाद भी भाजपा ने हार नहीं मानी। भीतर भरोसा था कि पं. बंगाल हम एक दिन जीतेंगे जरूर। आखिर जिस ममता बैनर्जी को अपराजेय माना जाता था उसे हराने और पं.बंगाल मे चुनाव जीतने का ऐतिहासिक काम भाजपा ने कर दिखाया।

यह काम संभव हो सका तो इसलिए अब भाजपा को किसी राज्य में चुनाव जीतने का काम उस राज्य के संगठन व नेताओं का काम नहीं है, अब किसी राज्य में भाजपा को जिताने का काम पूरी पार्टी के साथ हर राज्य के सीएम से लेकर नेताओं व कार्यकर्ताओं की सामूहिक जिम्मेदारी हो गई है।पं. बंगाल में भाजपा को चुनाव जीतने के लिए छत्तीसगढ़ से लेकर तमाम राज्यों के सीएम चुनाव प्रचार करने गए और वहां की जनता को बताया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां वह जनता के लिए क्या क्या काम कर रही है। पं.बंगाल की जनता को हर राज्य के सीएम व बड़े नेताओं ने यकीन दिलाया कि भाजपा की जहां सरकार है वहां चुनाव में किया गया वादा पूरा किया गया है। इससे पं.बंगाल की जनता को भरोसा हुआ कि भाजपा यहां भी जो वादा कर रही है उसे पूरा करेगी।जब सभी राज्यों के भाजपा संगठन व सरकारों का सहयोग मिलता है चुनाव जीतने में आसानी होती है। ऐसे में पीएम मोदी व अमित शाह की मेहनत सभी नेताओं को चुनाव में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है और पीएम मोदी से लेकर कई राज्योें के सीएम की मेहतन के चुनाव जीत लिया जाता है तो इसकी सफलता का श्रेय सभी को मिलता है।

पं. बंगाल में भाजपा की जीत का श्रेय छत्तीसगढ़ के नेताओं को भी मिल रहा है क्योंकि छत्तीसग़ढ़ से अन्य राज्यो की तरह सीएम साय लेकर मंत्री,विधायक,सांसद पं.बंगाल गए थे जो नेता जिस इलाके में गया था वह बता रहा है कि उसके प्रचार किए गए इलाके में भाजपा जीती है।इससे पता चलता है कि भाजपा में किसी राज्य् में चुनाव जीतना सामूहिक जिम्मेदारी है यानी हर नेता व कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है और वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाता भी है, इसलिए भाजपा में जीत का जश्न मनाना भी सामूहिक होता है। ऐसा लगता नहीं है कि पं. बंगाल में भाजपा जीती है तो जश्न पं.बंगाल की भाजपा ही मनाएगी। पं.बंगाल में जीत पं. बंगाल की भाजपा की जीत नहीं है, वह पूरे भारत के भाजपा की जीत है, इसलिए हमेशा भाजपा किसी भी राज्य में चुनाव जीतती है तो इसका जश्न हर राज्य में मनाया जाता है।

कहा जाता है कि पार्टी जीतती है तो पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा होता है, ऐसा लगता है कि यह जीत सबकी है। पीएम मोदी इस बात को खूब समझते हैं और दिल्ली भाजपा कार्यालय में जीत के बाद जाते हैं और वहां से पूरे देश के भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को जीत का श्रेय देते हैं। इससे पूरी पार्टी को लगता है कि यह पं.बंगाल भाजपा की नहीं देश के भाजपा की जीत हैं।जीत का एक फायदा यह भी होती है कि पार्टी एकजुट होकर जीत का जश्न मनाती है। यानी हर जीत भाजपा को और एकजुट करती है। हर जीत भाजपा आगे की जीत के लिए प्रेरित भी करती है और एकजुट भी करती है। वहीं राज्य से कांग्रेस नेता भी कई राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए गए थे, किसी को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी भी मिली थी, लेकिन केरल को छोड़कर कहीं कांग्रेस चुनाव जीती नहीं तो वह किस मुंह से कहें कि हमने कांग्रेस के लिए क्या किया।भाजपा के जीत के जश्न के दौरान इस बात की भी खूब चर्चा रही कि एक बड़े कांग्रेस नेता को जहां चुनाव जिताने के लिए भेजा जाता है, वहां कांग्रेस जरूर चुनाव हार जाती है।



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