कोलकाता(वीएनएस)।हावड़ा में कुख्यात अपराधी आकाश सिंह के साथ हुई पुलिस कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। पुलिस उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुराने मामलों की जांच के सिलसिले में अलग अलग अपराध स्थलों पर ले गयी। इस दौरान उसे केवल कच्छे और बनियान में ही ले जाया गया।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब अपराधियों और माफियाओं की हालत वैसी ही दिखाई देने लगी है जैसी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से है। पश्चिम बंगाल में वर्षों तक राजनीतिक संरक्षण में फलते फूलते गुंडों और रंगदारों को अब यह समझ आने लगा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य में जिस प्रकार का कठोर प्रशासनिक वातावरण बनता दिखाई दे रहा है, उसने अपराध जगत की नींद उड़ा दी है। जो अपराधी कभी खुलेआम दहशत फैलाते थे, वह अब या तो अंडरग्राउंड होने को मजबूर हैं या फिर पुलिस उन्हें सड़कों पर घुमाकर जनता को यह संदेश दे रही है कि अपराध का अंत केवल अपमान और जेल है।
हावड़ा में कुख्यात अपराधी आकाश सिंह के साथ हुई पुलिस कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। पुलिस उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुराने मामलों की जांच के सिलसिले में अलग अलग अपराध स्थलों पर ले गयी। इस दौरान उसे केवल कच्छे और बनियान में ही ले जाया गया। यह दृश्य अब पश्चिम बंगाल की बदलती तस्वीर का प्रतीक बन गया है। जनता ने पहली बार देखा कि जो अपराधी कभी इलाके में आतंक का दूसरा नाम था, वह अब पुलिस के सामने बेबस खड़ा है।
हालांकि विपक्ष और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन आम जनता इसे कानून के राज की वापसी मान रही है। वर्षों तक पश्चिम बंगाल में अपराधियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गुंडों का बोलबाला रहा। आम आदमी भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर था। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। पुलिस का यह सख्त रवैया साफ संकेत दे रहा है कि अपराधियों के लिए अब कोई नरमी नहीं बचेगी।
देखा जाये तो जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने माफियाओं की कमर तोड़ी और अपराधियों को कानून के सामने झुकने पर मजबूर किया, उसी प्रकार पश्चिम बंगाल में भी अब कठोर शासन की झलक दिखाई देने लगी है। जनता यह महसूस कर रही है कि राज्य में कानून का राज स्थापित हो रहा है और अपराधियों का राजनीतिक संरक्षण समाप्त किया जा रहा है। यह केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर प्रहार है जिसने वर्षों तक बंगाल को भय और अराजकता के हवाले कर रखा था।
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