दुर्ग (वीएनएस)। आगामी खरीफ मौसम को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा कृषकों को टिकाऊ खेती और बेहतर उत्पादन के लिए समसामयिक सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया पर निर्भरता कम करने और भूमि की सेहत सुधारने के लिए हरी खाद (ढैंचा, मूंग) के अधिक से अधिक उपयोग की अपील की है।
उप संचालक कृषि के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण उर्वरकों की कमी होने की स्थिति में हरी खाद एक बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है। इसके लिए जून के प्रथम सप्ताह में लगभग 8-10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से ढैंचा या इसे मूंग के साथ मिलाकर बुआई की जानी चाहिए। बुआई के लगभग 35 से 40 दिन बाद, जब पौधे 2-3 फीट ऊंचे हो जाएं और फूल आने की प्रारंभिक अवस्था हो, तब रोटावेटर या कल्टीवेटर की सहायता से फसल को पलटकर मिट्टी में मिला देना चाहिए और खेत में पानी चलाकर 7 से 10 दिनों तक सड़ने देना चाहिए। खेत में हरी खाद मिलाने से फसल की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यह तकनीक मिट्टी के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों व केंचुओं की संख्या बढ़ाने, इसे भुरभुरी बनाने, हवा का संचार बढ़ाने और जलधारण क्षमता में सुधार करने में सहायक है। इसके उपयोग से प्रति एकड़ लगभग 20 से 25 किलोग्राम प्राकृतिक नाइट्रोजन उपलब्ध होती है, जो जैविक कार्बन को तेजी से बढ़ाती है।
जिले में हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए जिला सहकारी समितियों में 52.16 क्विंटल ढैंचा एवं 16.96 क्विंटल मूंग बीज का भण्डारण किया गया है। शासन द्वारा निर्धारित 220 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर 50 प्रतिशत अनुदान के चलते यह बीज किसानों को मात्र 110 रुपये प्रति किलोग्राम पर प्राप्त होगा। कृषि विभाग ने किसानों से हरी खाद को अपनाकर भूमि की उत्पादकता बढ़ाने की अपील की है।अधिक जानकारी के लिए किसान अपने निकटतम कृषि कार्यालय या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
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