मौका मिलते ही बड़े,श्रेष्ठ होने का घमंड हो गया है

Posted On:- 2026-06-14




सुनील दास

राजनीति में जब एक राजनीतिक दल कोई बड़ा काम नहीं कर पाता है तो उसे समझ जाना चाहिए कि यह उसके अकेले के बस की बात नहीं है।उसे यह सच्चाई को स्वीकारना चाहिए कि वह कभी बड़ा दल था, हर चुनाव में जीतता था, कोई उसका मुकाबला नहीं कर पाता था और वह देश की राजनीति में सबसे श्रेष्ठ भी था। साथ ही उसे यह भी स्वीकारना चाहिए कि वह अब ऐसा नहीं है।वर्तमान में वह भी देश के तमाम विपक्षी दलों के समान एक राजनीतिक दल है जिसका लक्ष्य अन्य दलों की तरह भाजपा व मोदी को हराकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना है। पंद्रह साल हो गया विपक्षी ने हर तरह की कोशिश करके देख ली है लेकिन तीन बार वह पीएम मोदी व भाजपा को नहीं हरा पाए हैं।यह सच है, इसे सबको स्वीकारना चाहिए, बाकी दल तो इतने ईमानदार हैं कि अपनी हार को स्वीकार करते हैं लेकिन कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं करती है, क्योंकी इससे उनका नेतृत्व हारा हुआ साबित होता है।

जो हारता है, हर चुनाव में हार को स्वीकार करता है वही हार के कारणों को जानने का प्रयास करता है और अगले चुनाव में जीत के लिए प्रयास करता है। जो मानता ही नहीं है कि वह हारा है, उसकी पार्टी हारी है, वह जीत के लिए कैसे प्रयास कर सकता है। वह तो खुद को जीता हुआ मानता है, जो खुद को जीता हुआ मानता है, उसे जीतने के लिए प्रयास करने की क्या जरूरत है। हाल ही में कांग्रेस की तरफ से एक आडियो  मे राहुल गांधी यही कहते हैं कि कांग्रेस हारी नहीं है, विपक्ष हारा नहीं है। कांग्रेस तो यह मानती है विपक्ष को भी यही स्वीकार करना चाहिए। विपक्षी नेता स्वीकार नहीं करते है, इसलिए हताश हैं निराश हैं। इसके अलावा राहुल गांधी यह भी कहते हैं कि विपक्ष को परंपरागत राजनीति को छोड़ना होगा क्योंकि इस परंपरागत राजनीति से भाजपा को हराया नहीं जा सकता। इसका मतलब साफ है कि चुनाव में विपक्ष की निरतर हार से कांग्रेस को मौका मिला है यह बताने का समझाने का तुम जो कर रहे हो,कह रहे हैं, उससे कुछ नहीं होने वाला है। तो विपक्ष को क्या करना चाहिए। कांग्रेस के सामने सरेंडर कर देना चाहिए। राहुल गांधी के नेतृत्व को एक आवाज में स्वीकार करना चाहिए।

देश की राजनीति में जब भी कांग्रेस मजबूत होती है तो विपक्ष कमजोर होता है और विपक्ष मजबूत होता है तो कांग्रेस कमजोर होती है। देश की राजनीति में पं. बंगाल में ममता की हार व तमिलनाडु में द्रमुक की हार और केरल में कांग्रेस की जीत और तमिलनाडु में टीवीके से साथ सरकार में शामिल होने के कांग्रेस समझ रही है कि उसे विपक्ष की जरूरत नहीं है, विपक्ष को उसकी जरूरत है, इसलिए विपक्ष को कांग्रेस की बात माननी चाहिए। राहुल गांधी की बात माननी चाहिए। राहुल गांधी कह रहे है कि अब विरोध की राजनीति का वक्त नहीं है, प्रतिरोध की राजनीति का वक्त है तो विपक्ष के नेताओं को उसे मान लेना चाहिए और राहुल गाधी से पूछना चाहिए कि विरोध की जगह प्रतिरोध की राजनीति कैसे की जाती है। राहुल गांधी विपक्ष के नेताओं का किसी राज्य में प्रतिरोध की राजनीति करके दिखाएं। राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस का मूल चरित्र एक प्रतिरोध आंदोलन का है।इसलिए कांग्रेस संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।

मतलब साफ है कि कांग्रेस मूल रूप से विपक्षी दलों से अलग है। इसलिए विपक्ष को कांग्रेस के समान होना होगा। उनका भी मूल चरित्र प्रतिरोध का होना चाहिए। ऐसा कह देने के विपक्ष का मूल चरित्र प्रतिरोध का तो नहीं हो सकता। राहुल गांधी आडियो में विपक्ष को बताते हैं कि आऩे वाले समय में विपक्ष को रेजिस्टेंस मोड में काम करना होगा।उन्होने भारत जोड़ो यात्रा,शिक्षा व सामाजिक मुद्दों पर आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के बीच लगातार संघर्ष और प्रतिरोध ही सबसे प्रभावी राजनीतिक हथियार है और भविष्य में साबित होगा।वह विपक्ष के तमाम नेताओं से खुद को ज्यादा समझदार बताने का प्रयास करते हुए कहते हैं कि विपक्ष को एकजुट करना मेरे लिए कोई राजनीतिक कर्तव्य नहीं रह गया है, अब यह मेेरे लिए धार्मिक व आध्यात्मिक कर्तव्य है। विपक्ष को एकजुट करने व सफल बनाने के लिए मुझे जितना भी अपमान सहन करना पड़ेगा,मैं सहने को तैयार हूं।इंडिया ब्लाक की बैठक में कांग्रेस के बारे में बहुत कुछ कहा गया, उसका जवाब देना मेरा काम नहीं है।मेरा काम तो अब सबकुछ अपने भीतर समाहित कर लेना है।जैस नीलकंठ शिव ने विषपान किया था, मेरे या कांग्रेस पार्टी के खिलाफ आपके मन मे जो भी आलोचना है,हम उसे स्वीकार करेंगे और मुस्कराते हुए स्वीकार करेंगे।

राहुल गांधी कैसी विपक्षी एकता चाहते हैं, उनके आडियों जारी करने से ही साफ हो जाता है। जब इंडिया ब्लाक की बैठक हुई है और उसमें इंडिया ब्लाक के तमाम नेताओं ने अपनी बात कही है। बहुत कुछ कहा है, ऐसे इंडिया ब्लाक की बैठक को कोई आडियो जारी करना था को उसमें उन सभी नेताओं की बातों का समावेश होना था जिन्होंने बैठक में अपने विचार व्यक्त किए हैं। विपक्षी नेताओं के बयानों से साफ हो जाता कि कई विपक्षी नेता कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर नाराज है और उन्होंने बैठक में खुलकर नाराजगी जाहिर की है। विपक्षी एकजुटता नहीं होने के लिए उन्होंने कांग्रेस को दोेषी माना है। ऐसे में विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस प्रयास करती रही है तथा आगे भी करेगी यह संदेश देने के लिए कांग्रेस ने खाली राहुल गांधी का आडियों का जारी किया है और राहुल गांधी को हर तरह से विपक्ष का योग्य नेता बनाते की कोशिश की है। आने वाले समय मे साफ हो जाएगा कि विपक्ष राहुल गांधी को कितना अपना नेता मानता है और कितना उनकी बात मानता है।



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