बीजापुर (वीएनएस)। जिला चिकित्सालय बीजापुर में अटल आरोग्य लैब के तहत लागू की गई नई जांच व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल की पैथोलॉजी सेवाओं का संचालन संभाल रही HLL Lifecare Limited पर मरीजों को समय पर जांच और रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा पाने के आरोप लग रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जांच की संख्या घट गई है और रिपोर्ट मिलने में पहले की तुलना में दोगुना से अधिक समय लग रहा है।
जानकारी के अनुसार, पहले जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 133 रक्त जांचें होती थीं, जो अब घटकर लगभग 60 से 65 रह गई हैं। वहीं जिन जांच रिपोर्टों के लिए पहले 6 से 12 घंटे का समय लगता था, अब मरीजों को 24 से 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर ओपीडी में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है, जिनका उपचार रिपोर्ट के अभाव में प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट में देरी से इलाज प्रभावित
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि रक्त जांच कराने के बाद भी समय पर रिपोर्ट नहीं मिल रही है। डॉक्टरों को जांच रिपोर्ट के अभाव में बीमारी की पुष्टि करने और उपचार शुरू करने में परेशानी हो रही है। कई मरीजों को दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोग मजबूरी में निजी लैब का सहारा लेने को विवश हैं।
जांच क्षमता आधी होने का दावा
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पताल की जांच क्षमता लगभग आधी हो गई है। बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी बहुल जिले में बड़ी संख्या में मरीज सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में जांच सेवाओं में आई कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
अनुभवहीन स्टाफ को लेकर भी उठे सवाल
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जांच कार्य के लिए तैनात कुछ तकनीशियनों को आधुनिक मशीनों के संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता और समयबद्धता प्रभावित होगी तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा।
10 दिन बाद इमरजेंसी और भर्ती मरीजों की जांच भी कंपनी के जिम्मे
जानकारी के अनुसार, आगामी दिनों में इमरजेंसी और भर्ती मरीजों की लैब जांच की जिम्मेदारी भी HLL Lifecare Limited को सौंपे जाने की तैयारी है। इसे लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि सामान्य ओपीडी मरीजों की जांच समय पर नहीं हो पा रही है तो गंभीर और आपातकालीन मरीजों की जांच व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
सरकारी लैब में रिएजेंट की कमी
इसी बीच अस्पताल की इन-हाउस लैब में कार्यरत कर्मचारियों ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर रिएजेंट की कमी की जानकारी दी है। पत्र में बताया गया है कि ओपीडी जांच का कार्य 16 मई 2026 से HLL को सौंप दिया गया है, जबकि आईपीडी मरीजों की जांच अब भी अस्पताल की लैब में हो रही है। उपलब्ध रिएजेंट का स्टॉक केवल कुछ दिनों के लिए बचा है और समय रहते आपूर्ति नहीं होने पर भर्ती मरीजों की जांच सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य अधिकारी ने सुधार का दिया भरोसा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुजारी ने बताया कि लैब जांच में आ रही समस्याओं को लेकर कंपनी के डिवीजन कोऑर्डिनेटर से चर्चा की गई है। कंपनी ने एक सप्ताह के भीतर स्टाफ को प्रशिक्षण देकर व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि लैब संचालन की पूरी जिम्मेदारी HLL Lifecare Limited की है और भविष्य में जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में भी कंपनी के माध्यम से जांच सेवाएं संचालित की जाएंगी।
हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल परिसर में विरोध की स्थिति भी बन सकती है।
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