बालोद (वीएनएस)। जिले में फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में चलाए जा रहे क्लस्टर फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन तिलहन कार्यक्रम के अंतर्गत सूरजमुखी की खेती का सफल प्रदर्शन किया गया है। बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम अचैद के प्रगतिशील कृषक वीरेन्द्र ने परंपरागत ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से सूरजमुखी की खेती अपनाकर बेहतरीन उत्पादन और उल्लेखनीय लाभ प्राप्त किया है। यह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण, फसल चक्र परिवर्तन तथा लघु एवं सीमांत कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है।
कृषक वीरेन्द्र पूर्व में अपने खेतों में लगातार ग्रीष्मकालीन धान की खेती कर रहे थे। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग, फसल चक्र के अभाव तथा भूमि में जैविक पदार्थों की कमी के कारण उनके खेत की मिट्टी (मृदा) के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आ रही थी। इन कारणों से मृदा में मुख्य पोषक तत्वों की कमी, मिट्टी की संरचना का ह्रास तथा फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ गया था, जिससे उनका उत्पादन लगातार प्रभावित और अस्थिर हो रहा था। कृषक की इस समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र बालोद द्वारा सीएफएलडी तिलहन कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों के लिए विशेष उन्मुखीकरण प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से वैज्ञानिकों ने किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के बदले कम पानी और उच्च मूल्य वाली उन्नत किस्म केबीएसएच 78 के सूरजमुखी की खेती अपनाने हेतु प्रेरित किया। कृषि वैज्ञानिकों के सीधे मार्गदर्शन में खेत स्तर पर आधुनिक कृषि तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया गया, जिससे कृषक वीरेन्द्र को उन्नत मृदा प्रबंधन, कतार बुवाई, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा उचित पौध संरक्षण का आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्राप्त हुआ। वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने से कृषक के खेत में सूरजमुखी का उत्कृष्ट उत्पादन हुआ। सफलता के प्रमुख तकनीकी बिंदुओं में उन्नत किस्म केबीएसएच 78 की सहनशीलता, प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों में भी इस किस्म ने अपनी उच्च अनुकूलन क्षमता एवं सहनशीलता का परिचय दिया। समेकित पोषक तत्व व सिंचाई प्रबंधन, संतुलित खाद-उर्वरक उपयोग से फसल की तीव्र व स्वस्थ वृद्धि हुई तथा समय पर उचित सिंचाई से उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। प्रभावी खरपतवार व पौध संरक्षण से सही समय पर रासायनिक खरपतवार नियंत्रण और कीट-रोग प्रबंधन के उपाय अपनाने से फसल पूरे सीजन स्वस्थ रही तथा कीटों से होने वाली क्षति न्यूनतम रही। इसके साथ ही टिकाऊ कृषि और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा मिला।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीएफएलडी तिलहन कार्यक्रम के तहत आयोजित इन प्रदर्शनों ने किसानों को धान के बदले सूरजमुखी जैसी लाभकारी तिलहन फसलें अपनाने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया है। इस परिवर्तन से किसानों को न केवल बेहतर वित्तीय लाभ मिल रहा है, बल्कि उनकी आजीविका में सुधार हुआ है। इसके साथ ही, धान के बदले सूरजमुखी की खेती से जिले में टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिला है, जिससे भूमि का स्वास्थ्य सुधर रहा है और बहुमूल्य भू-जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में बड़ी सहायता मिल रही है।
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