20.60 करोड़ के कारोबारी विवाद में रिटायर्ड जस्टिस रजनी दुबे करेंगी मध्यस्थता

Posted On:- 2026-07-08




बिलासपुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 20.60 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी भुगतान विवाद में अहम आदेश देते हुए हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रजनी दुबे को एकमात्र मध्यस्थ (सोल आर्बिट्रेटर) नियुक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11(6) के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए एमओयू में आर्बिट्रेशन क्लॉज स्पष्ट रूप से मौजूद है, इसलिए विवाद का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से किया जाएगा।

यह मामला रायपुर की मेसर्स जय जगदीश ट्रांसपोर्ट और आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित मेसर्स श्री रत्नागिरी ट्रांसपोर्ट के बीच लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी लेनदेन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता कंपनी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच वाहनों के किराये, टायरों की खरीद और मरम्मत समेत विभिन्न व्यावसायिक सेवाओं का वर्षों से कारोबार होता रहा। वर्ष 2021 में हुए एमओयू के तहत प्रतिवादी कंपनी ने 6.39 करोड़ रुपये की देनदारी स्वीकार करते हुए दो वर्ष के भीतर भुगतान करने पर सहमति जताई थी।

याचिका में बताया गया कि तय समय सीमा बीतने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया और प्रतिवादी कंपनी द्वारा जारी सभी चेक भी बाउंस हो गए। बाद के कारोबारी लेनदेन को जोड़ने पर लेजर खाते के अनुसार कुल बकाया राशि बढ़कर 20 करोड़ 60 लाख 54 हजार 527 रुपये हो गई। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रतिवादी कंपनी को नोटिस जारी किया। नोटिस की तामील नहीं होने पर विशाखापट्टनम के दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशन कराया गया। इसके बावजूद प्रतिवादी न तो अदालत में उपस्थित हुआ और न ही उसकी ओर से कोई अधिवक्ता पेश हुआ।

कोर्ट ने पाया कि एमओयू की धारा-10 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न किसी भी विवाद का निपटारा रायपुर में मध्यस्थता के जरिए किया जाएगा। इसी आधार पर अदालत ने जस्टिस रजनी दुबे को सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया।

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश की प्रति जस्टिस रजनी दुबे को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि मध्यस्थ का पारिश्रमिक दोनों पक्ष आपसी सहमति से तय करेंगे। आदेश के साथ ही अदालत ने आर्बिट्रेशन याचिका का निराकरण कर दिया।



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