अम्बिकापुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ जनजातीय एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा दि रूम टू रीड इंडिया की संयुक्त पहल प्रोजेक्ट सक्षमः शिक्षा, आत्मविश्वास एवं समानता के अंतर्गत 9 एवं 10 जुलाई 2026 को प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावासों की चयनित अधीक्षिकाओं के लिए दो दिवसीय आवासीय मास्टर ट्रेनर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
तीन वर्षीय (2026-2029) इस परियोजना का उद्देश्य छात्रावासों में निवासरत कक्षा 6वीं से 10वीं तक अध्ययनरत बालिकाओं को जीवन कौशल, आत्मविश्वास, स्व-निर्णय क्षमता एवं लैंगिक समानता के माध्यम से सशक्त बनाना है, ताकि वे जीवन की विभिन्न व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक एवं भविष्य से जुड़ी चुनौतियों का आत्मविश्वास और विवेकपूर्ण ढंग से सामना कर सकें।
परियोजना के माध्यम से बालिकाओं को कक्षा 10वीं एवं 12वीं की शिक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण करने, उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होने तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप जीवन कौशल आधारित शिक्षा को छात्रावास व्यवस्था में संस्थागत रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यशाला का शुभारंभ सहायक आयुक्त एवं प्रोजेक्ट सक्षम के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. ललित शुक्ला, सहायक संचालक किरण राजपूत तथा दि रूम टू रीड इंडिया के राज्य प्रमुख अरविंद सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि किशोरावस्था में बालिकाओं का समग्र विकास केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता तथा जीवन कौशल का विकास भी उतना ही आवश्यक है। प्रोजेक्ट सक्षम इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दो दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 44 प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें 36 प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास अधीक्षिकाएँ, 7 मंडल संयोजक एवं 1 सहायक संचालक शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान किशोरावस्था, जीवन कौशल, लैंगिक समानता, संवाद कौशल तथा प्रभावी फैसिलिटेशन तकनीकों पर सहभागितापूर्ण एवं गतिविधि आधारित सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को व्यवहारिक अभ्यासों, समूह चर्चा एवं विभिन्न शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ट्रेनर अब अपने-अपने जिलों में अन्य छात्रावास अधीक्षिकाओं को प्रशिक्षित करेंगे। इससे प्रोजेक्ट सक्षम का प्रभावी एवं चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा तथा छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण जीवन कौशल शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। विभाग का लक्ष्य है कि परियोजना के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता एवं स्व-निर्णय की क्षमता विकसित हो, जिससे वे शिक्षा के साथ-साथ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें।
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