आदमी ईमानदार होता है तो उसे ईमानदा्र बनाने की जरूरत नहीं होती है। आदमी ईमानदार नहीं होता है तो उसे ईमानदार बनाना पड़ता है। आदमी ईमानदार होता है तो घर,समाज व सरकार को किसी तरह की परेशानी नहीं होती है,क्योंकि वह अपना काम ईमानदारी से करता है,ईमानदारी से काम किया जाता है तो काम के परिणाम अच्छा होता है यानी काम के परिणाम से ही पता चल जाता है कि काम करने वाला काम के प्रति कितना ईमानदार है।इसी तरह जब आदमी ईमानदार नहीं होता है तो वह काम भी ईमानदारी से नहीं करता है।इस वजह से उसके काम का रिजल्ट भी अच्छा नहीं आता है।उसके काम के रिजल्ट से पता चल जाता है कि वह काम ईमानदारी से नहीं कर रहा है। आदमी ईमानदार नहीं है तो उसे घर हो,समाज हो,सरकार हो वह उसे कई तरह से ईमानदार बनाने का प्रयास करते है।घर वाले डांटते हैं,समझाते हैं,समाज वाले भी कई तरह के आयोजन कर समझाते हैं कि ईमानदार होने के क्या फायदे हैं और ईमानदार न होने के क्या नुकसान है।
इसके बाद सरकारी दफ्तर हो या निजी संस्थान वहां भी पहले तो समझाया जाता है ईमानदारी के अपना काम करो।समय पर दफ्तर आओ,लोग समय पर दफ्तर आते और अपना काम ईमानदारी से करते तो आज भी हर सरकारी दफ्तर व निजी दफ्तर में एक रजिस्टर होता जिसमें लोग समय पर दस्तखत करके और आने का समय डाल देते और मान लिया जाता कि कर्मचारी समय पर आकर अपना काम कर रहा है। समय के साथ लोग दफ्तर आने व काम के प्रति ईमानदार नहीं रहे तो उनको ईमानदार बनाने के प्रयास शुरु हुए। यानी तुम ईमानदार नहीं हो तो हम तुमको ईमानदार बनाएंगे। जब आदमी ईमानदार नहीं रह जाता है और उसे ईमानदार बनाने का प्रयास किया जाता है तो वह विरोध करता है लेकिन वह जितना विरोध करता है और बेईमानी करने का प्रयास करता है तो उसे ईमानदार बनाने के प्रयास और कड़े होते जाते हैं। पहले दस मिनट देरी हो जाती थी तो ध्यान नहीं दिया जाता था तब हाजिरी के लिए दफ्तर में अंगूठा लगाने वाला मशीन लगा दी गई यानी पर जिस वक्त अंगूठा लगाएंगे तो मशीन समय दर्ज करेगी और यह बतायेगी कि आप लेट आए हो या समय पर आए हो।दफ्तर से गए तो कब गए।
बहुत सारे लोग आज भी काम के प्रति ईमानदार नहीं हैं इसलिए आज भी लोगों को नई नई तकनीक के जरिए ईमानदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। चाहे सरकारी दफ्तर हो या निजी संस्थान आज तो आन लाइन व एप के जरिए उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। तकनीक के कारण आदमी जितनी बेईमानी पहले कर लेता था आज नहीं कर पा रहा है तो तकनीक का ही विरोध करता है और तकनीक से बचने के लिए वह कई तरह के बहाने बनाता है। राशन दुकान वाले तकनीक के कारण पहले की तरह धांधली नहीं कर पाते हैं तो तकनीक के विरोध के कई बहाने बनाते है। दफ्तर में काम करने वाले तकनीक के कारण पहले की तरह घूस नहीं ले पाते हैं तो वह लोगों को समय पर खुद काम नहीं करते हैं और उसका दोष तकनीक पर डालते हैं ताकि लोग सरकार से शिकायत करें कि तकनीक के कारण उनका काम जल्दी नहीं होता है।शिक्षा विभाग में भी शिक्षकों के समय पर स्कूल नहीं आने, रोज स्कूल नहीं आने, अपनी जगह किसी दूसरे को पढ़ाने भेजने आदि कई तरह की बेईमानी को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है कि वह एक एप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं।
जैसे बाकी लोग तकनीक के कारण बेईमानी नहीं कर पाते हैं वैसे ही वे शिक्षक जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं,स्कूल समय पर नहीं आते है, कई दिन स्कूल नहीं आते हैं लेकिन वेतन सभी दिनों को लेते हैं। ऐसे शिक्षकों सुधारने के लिए,ईमानदार बनाने के लिए शिक्षा विभाग में व्यवस्था बनाई गई है कि अब सभी शिक्षकों को एप के माध्यम से उपस्थित दर्ज करानी है,यह शिक्षको को उनके संगठन को पसंद नहीं आ रहा है और उन्होंने कई बहानों से इसका विरोध शुरू कर दिया है क्योंकि तकनीक के जरिए तो उनको उतने ही दिन का वेतन मिलेगा जितने दिन उन्होंने एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराई है। शिक्षकों की आदत हो गई है कि वह काम करें या करे उनको पूरे तीस दिन का वेतन मिलना चाहिए।अब तकनीक के कारण उनको उतने ही दिन का वेतन मिलेगा जितने दिन स्कूल जाएंगे,काम करेंगे तो उनको बुरा लग रहा है।
यह सच है कि नेटवर्क व एप की अपनी समस्या हो सकती है लेकिन इनका उपयोग वास्तव शिक्षकों को परेशान करने के लिए नहीं किया जा रहा है, इनका उपयोग इसलिए करना पड़ रहा है कि शिक्षकों के काम करने को जो समय है,वह समय पर स्कूल आए और अपना काम करें।यह नहीं होता है खास कर दूरस्थ इलाकों में कई कई दिन शिक्षक स्कूल नही जाते है और किसी को पता नहीं रहता है कि शिक्षक क्यों स्कूल नहीं आ रहा है।किसी जगह नेटवर्क की समस्या है, एप की समस्या है तो वहां पर वैकल्पिक तकनीक का उपयोग किया जा सकता है और शिक्षक हो या कोई कर्मचारी उसको ईमानदार बनाने का काम किया जा सकता है। जैसे कहीं पर मोबाइल से हाजिरी लगाने में कोई दिक्कत है तो वहां पर बायोमेट्रिक मशीन का विकल्प दिया जा सकता है।शिक्षकों सहित हर शासकीय कर्मचारियों को समझना होगा कि उनको तकनीक के जरिए काम के प्रति ईमानदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है तो इसका मतलब है कि वह काम के प्रति जितने ईमानदार होने चाहिए उतने ईमानदार नहीं है।मशीनीकरण बढ़ रहा है तो इसकी एक वजह यही है कि आदमी को काम के प्रति जितना ईमानदार होना चाहिए वह समय के साथ उतना ईमानदार नहीं रह गया है।
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