राज्यसभा में 'मनुस्मृति' पर घमासान, खरगे के बयान पर नड्डा का वार, अंश रिकॉर्ड से बाहर

Posted On:- 2026-07-30




नई दिल्ली(वीएनएस)।राज्यसभा में 'पेपर लीक विरोधी बिल' पर बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनुस्मृति का ज़िक्र करते हुए शिक्षा में जातिगत भेदभाव और  सरकार की नीतियों की आलोचना की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सदन के नेता जेपी नड्डा ने इन दावों को ख़ारिज कर असंसदीय बताया, जिसके बाद सभापति ने मनुस्मृति संबंधी खड़गे की टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया।

गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। यह बहस तब शुरू हुई जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'पेपर लीक विरोधी बिल' पर चर्चा के दौरान मनुस्मृति का ज़िक्र किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बहस में हिस्सा लेते हुए, राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा गरीबों की पहुँच से दूर होती जा रही है और विश्वविद्यालयों में अहम पदों पर RSS से जुड़े लोगों को नियुक्त किया जा रहा है।

खड़गे ने यह भी दावा किया कि स्कूल और यूनिवर्सिटी के सिलेबस में बदलाव किए जा रहे हैं और मनुस्मृति का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह शिक्षा में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है। खड़गे ने आरोप लगाया कि मनुस्मृति ने शिक्षा के क्षेत्र में जातिवाद को बढ़ावा दिया है, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। इन टिप्पणियों के तुरंत बाद एनडीए सांसदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते सदन में नारेबाजी और बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ।

सदन के नेता जेपी नड्डा ने खड़गे के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये बातें सच से बहुत दूर हैं और इनसे देश में गलत संदेश जा सकता है। बहस के दौरान किए गए ज़िक्र पर आपत्ति जताते हुए नड्डा ने कहा कि खड़गे को अपने बयान की पुष्टि करनी चाहिए। नड्डा ने कहा कि हम विपक्ष के नेता की बात शांति से सुन रहे हैं और लोकतंत्र में ऐसा करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। लेकिन मैं विपक्ष के नेता से गुज़ारिश करता हूँ कि वे गुस्से में आकर न बोलें या असंसदीय भाषा का इस्तेमाल न करें। उन्होंने अभी जो वाक्य इस्तेमाल किया है, वह असंसदीय है और उसे कार्यवाही से हटा दिया जाना चाहिए। उन्हें भावुक होकर ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए।

जब बहस तेज़ हुई, तो राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने दखल दिया और आदेश दिया कि मनुस्मृति और उद्धृत सामग्री के बारे में खड़गे की टिप्पणियां आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं होंगी। बहस के दौरान खड़गे ने तर्क दिया कि पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित कानून से सिर्फ़ सज़ा बढ़ाने या फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, सिस्टम में सुधार करके प्रश्न-पत्र लीक होने से रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। खड़गे ने केंद्र सरकार पर शिक्षा का व्यवसायीकरण करने का आरोप भी लगाया और कहा कि गरीब छात्रों को समान अवसर मिलने में लगातार रुकावटें आ रही हैं।



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