ज्ञानेश्वरी प्रेरणा है राज्य के खिलाड़ियों के लिए

Posted On:- 2026-08-04




सुनील दास

हर क्षेत्र में शुरुआत होती है, कोई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक जीतता है और राज्य के लोगों का बरसाें का इंतजार खत्म होता है।गर्व महसूस होता है कि हमारे राज्य में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली कोई खिलाड़ी है।छत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी खिलाड़ी के पदक जीतने की शुरुआत हो गई है। हमारे राज्य की ज्ञानेश्वरी यादव पहली ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने ग्लास्गो में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीता है। राज्य का यह पदक है, एक शुरुआत होती है तो उसके बाद दूसरे खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलती है कि हमारे राज्य की एक खिलाड़ी ऐसा कर सकती है तो मैं भी ऐसा कर सकता हूं,हम भी ऐसा कर सकते हैं और उसके बाद कड़ी मेहनत,लगन,अपने लक्ष्य का हासिल करने का जज्बा पैदा होता और एक के बाद दूसरा,दूसरे के बाद तीसरा खिलाड़ी पदक जीतता है। बड़े खिलाड़ी से प्रेरणा लेकर एक दिन छोटे खिलाड़ी बड़े खिलाड़ी बनते हैं पदक जीतने वाले खिलाड़ी बनते हैं।एक के बाद दो,तीन,चार संख्या बढ़़ती जाती है।देश में एक सुनील गावस्कर पैदा होता है तो सचिन पैदा होता है,सचिन के बाद, विराट सामने आता है, विराट के बाद तो खिलाड़ियों की लंबी लाइन तैयार हो गई है।
२२ वें कामनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला ५३ किलो के वर्ग की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में देश के लिए रजत पदक हासिल किया है। छत्तीसगढ़ के लिए यह पहला अंतर्राष्ट्रीय पदक है। इसलिए यह देश के लिए जितने गर्व की बात है, उससे ज्यादा छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है।छत्तीसगढ़ को बरसों से पहले अंतर्राष्ट्रीय पदक का इंतजार था और इस इंतजार को ज्ञानेश्वरी ने खत्म किया है।यह पदक जीतने के साथ ही ज्ञानेश्वरी कामनवेल्थ गेम्स के इतिहास में कोई पदक जीतने वाली,रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की पहली खिलाड़ी बन गई है।आज तक प्रदेश का कोई भी खिलाड़ी वैश्विक मंच पर पदक तालिका में जगह नहीं बना सका था।जो काम प्रदेश का कोई खिलाड़ी नहीं कर सका था, वह काम ज्ञानेश्वरी ने करके अपना नाम राज्य के खेल इतिहास में दर्ज करा दिया है।
ज्ञानेश्वरी ने ५३ किलो वर्ग की प्रतियोगिता में कुल १९९ किलो वजन उठाकर दूसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने स्नैच मे ८८ किलो वजन उठाकर नया गेम्स रिकार्ड कायम किया।वही क्लीन व जर्क में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन बार में १०३,१०७ और १११ वजन उठाया।इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक नाइजीरिया की ओमोलोला डिडीह ने २०६ किलो वजन उठाकर जीता।कामनवे्ल्थ गेम्स में देश,प्रदेश का नाम रोशन करने पर पीएम मोदी,गृहमंत्रीअमित शाह,सीएम साय,खेल संगठनों से जुड़े लोगों सहित सभी ने बधाई दी।पदक जीतने पर सीेएम साय ने कहा था कि ज्ञानेश्वरी की यह उपलब्धि राज्य के खेलजगत के लिए मील का पत्थर साबित होगी।उनके पिता दीपक यादव ने कहा था कि यह हमारे परिवार के वर्षों के संघर्ष,कड़े त्याग और बेटी के अटूट विश्वास का फल है।
गरीब घर के बच्चों की सफलता वाकई में अद्भुत लोगों का प्रेरणा देने वाली होती है,यह अभाव के बीच अपने सबसे बड़े लक्ष्य को पाने का प्रयास होता है।कई बार पिता जो नहीं कर पाता है और उसकी बेटी वह काम करती है,उसका बेटा वह काम करता है तो पिता को सबसे ज्यादा खुशी होती है। पिता खिलाडी़ हो तो उसे और ज्यादा खुशी होती है।ज्ञानेश्वरी के पिता बाड़ीबिल्डर थे लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह आगे नहीं जा सके,खेल छोड़कर उनको इलेक्ट्रिशियन का काम करना पड़ा।वह खुद अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी न बन सके तो बेटी को बनाने का सपना देखा और बेटी के लिए जो कुछ कर सकते थे,वह सब किया और बेटी ने न सिर्फ उनका बल्कि राज्य का अंतर्राष्ट्रीय पदक का सपना पूरा किया है।साय सरकार ने राज्य के खेल व खिलाड़ियों के लिए बहुत कुछ किया है।बस्तर ओलिंपिक,सरगुजा ओलिंपिक का आयोजन कर खिलाड़ियो का खेल मंच मुहैया कराया है। इससे राज्य के खिलाड़ियों कोे खेलने का मौका मिल रहा है, दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिल रहा है, अपनी खेल प्रतिभा को निखारने का मौका मिल रहा है।
ऐतिहासिक उपलब्धि पर खिलाड़ी का सम्मान तो किया ही जाता है साथ ही उसको जो ईनाम दिया जाता है, वह भी दूसरे खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाला होता है। राज्य की सीेएम साय ने ज्ञानेश्वरी के छत्तीसगढ़ लौटने पर अपने निवास पर ज्ञानेश्वरी का सम्मान किया।साथ ही घोषणा की कि ज्ञानेश्वरी काे ३० लाख रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और आउट आफ टर्न डीएसपी बनाया जाएगा।इस मौके पर सीएम साय ने कहा कि यह प्रदेश की प्रतिभा,परिश्रम व संकल्प का सम्मान है।ज्ञानेश्वरी ने सिध्द कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति,कठोर परिश्रम व अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।उपमुख्यमंत्री साव ने ज्ञानेश्वरी का सम्मान अपने निवास कार्यालय में किया और उनकी सफलता का श्रेय पिता के संघर्ष व प्रेरणा को दिया।ज्ञानेेश्वरी का हर सम्मान देश के खिलाड़ियों को प्रेरणा देगा इसलिए उनका ऐसा सम्मान करना चाहिए कि हर खिलाड़ी के लिए खेल में बड़ी उपलब्धि प्राप्त करना लक्ष्य हो और वह अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें इसके लिए सरकार उनको हर तरह की सुविधा मुहैया कराए। अब जब शुरुआत हो गई है तो गिनती एक पदक व एक ज्ञानेश्वरी पर नहीं रुकनी चाहिए।खिलाड़ियों व पदकों की संख्या बढ़ती रहनी चाहिए।



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