आदमी किसी भी क्षेत्र में काम करता हो,उसे अपने कर्मों का फल तो देरसबेर भुगतना पड़ता है। माना जाता है कि मनुष्य योनि कर्मयोनि है,यानी कर्म करने की योनि है,कर्म तो करना पडे़गा और आदमी जैसा कर्म करेगा,कर्म के अनुसार उसको वैसा फल भी भोगना पड़ेगा,कर्म करके मनुष्य कर्म फल भोगने से बच नहीं सकता, अच्छा कर्म किया है तो उसका अच्छा फल भोगना पड़ता है, बुरा कर्म किया है तो उसका बुरा फल भोगना पड़ता है।आदमी व्यक्तिगत तौर पर कर्म करता है तो उसे उसका अच्छा बुरा फल व्यक्तिगत तौर पर भुगतना पड़ता है परिवार के तौर पर जब कर्म किया जाता है तो उसका फल पूरे परिवार को भोगना पड़ता है और समाज के तौर पर कोई कर्म किया जाता है तो समाज के तौर पर फल भोगना पड़ता है।राजनीतिक व गैरराजनीतिक तौर पर जब कोई कर्म किया जाता है तो उसका फल उसके नेता सहित उसके तमाम कार्यकर्ताओं को भोगना पड़ता है।
हमारे देश में मान्यता है कि कर्मफल अटल है, वह टल नहीं सकता वह मिलेगा ही। किसी कर्म का फल तुरंत मिल जाता है जैसे कोई किसी को गाली देता है तो उसका फल उसे पिटाई या गाली के रूप में तुरंत मिल जाता है।कुछ कर्मफल इसी जन्म में मिलते हैं कुछ कर्मफल ऐसे होते है जिनको दूसरे जन्म में भोगना पड़ता है। किसी राजनीतिक दल ने सत्ता में पंद्रह साल रहते हुए जो बुरे कर्म किए उसका फल उसको सत्ता में रहते हुए तो नहीं मिलता है लेकिन जब भी वह सत्ता से बाहर होता है तो उसका फल उसको मिलना शुरू हो जाता है।कांग्रेस कई दशक तक सत्ता मे रही और कई दशकों में उसने जो कर्म किए थे अब जब वह सत्ता में नहीं है तो उसे अपने दशकों के कर्म का फल अब भुगतना पड़ रहा है।ममता बैनर्जी १५ साल सत्ता में रही और जितने बुरे से बुरे कर्म पार्टी के लोगों ने किए और ममता उनको करने से नहीं रोकी तो उसका फल आज टीएमसी के नेताओं व ममता काे भुगतना पड़ रहा है।
ममता बैनर्जी उसके भतीजे ने अपने विरोधी दलाें के नेताओं के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया, विरोधियों के साथ पंद्रह सालो में मारपीट की गई,हत्या की गई,घर जला दिए गए।लोगों को वोट डालने नहीं दिया,पंद्रह साल ममता की पार्टी ने विरोधियों के साथ, जनता के साथ बहुत व्यवहार किया और आज जब वह सत्ता में नही है तो कभी ममता के भांजे के साथ भीड़ मारपीट कर रही,उन पर अंडे फेंक रही है,कभी टीएमसी के सांसदों पर नाराज लोग अंडे फेंक रहे हैं।पं.बंगाल के उत्तर २४ परगना जिले के हली शहर में पूर्व सीएम ममता बैनर्जी के काफिले पर नाराज लोगों की भीड़ ने कीचड़,ईंट पत्थर,जूते,चप्पल से हमला कर दिया। ममता का आरोप है कि मेरी काफिले पर पुलिस के सामने हमला हुआ और पुलिस ने कुछ नहीं किया। हम सब मारे जा सकते थे, हम लोगों के सिर फूट सकते थे। मैंने ऐसा होते कभी नहीं देखा था।
ममता और उनकी पार्टी के नेताओं के साथ कुछ भी ऐसा नहीं हो जो उनके शासन में विरोधी लोगों के साथ नहीं हुआ है, उनके साथ वही हो रहा है,उनके शासन में उनकी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के इशारे पर विरोधियों के साथ होता था.तब भी पुलिस किसी को नहीं बचाती थी,आज ममता को पुलिस से शिकायत है, पुलिस को ऐसा उन्होंने ही बनाया है, किसी को बचाना नहीं है। पुलिस वही कर रही है जो उनके समय होता था। ममता को पं.बंगाल की जनता एहसास करा रही है कि उसके पंद्रह साल में उनके साथ जो बुरा किया गया,वह सब जनता ममता व उनके नेताओं को लौटा रही है।यह ममता व उनके नेताओं का कर्मफल है कि भीड़ उनके समय विरोधियों का साथ जो करती और वही भीड़ उनके साथ वही कर रही है तो बुरा लग रहा है, मरने से डर लग रहा है।यह सबके होता है जो आपने लोगों को दिया होता है,वही लोग आपको लौटाते हैं, जब देते वक्त बुरा नहींं लगता है तो लेते वक्त भी बुरा नहीं लगना चाहिए क्योंकि जो लोगों को आपने दिया था, वही लोग आपको लौटा रहे हैं।
ममता ही उनके नेताओं ने जनता के साथ बुरा किया है,अब जनता उनके साथ बुरा कर रही है तो उनको जनता के बीच जाने से डर लग रहा है। महुआ मोइत्रा को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया तो वह थाने जाने से डर रही है कि इस दौरान लोग उनको अंडे मारेंगे।वह सुप्रीम कोर्ट गई थी कि उनका बयाने आनलाइन देने की सुविधा दी जाए।सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया और कहा कि आप कैसी नेता है, अंडे से डर रही हैं।इससे साफ हो जाता है कि टीएमसी के जो नेता सत्ता में शेर बने रहते हैं और लोगों के साथ बुरे से बुरा व्यवहार करते थे और उनके साथ भीड़ बुरा व्यवहार कर रही है तो उनको अच्छी व्यवस्था चाहिए, सुरक्षा चाहिए ताकि उनके साथ कोई बुरा व्यवहार न कर सके।सत्ता मेे रहने वाले अन्याय करते हैं तो जनता उनके साथ न्याय करती है और अन्याय करने वालों को न चाहकर भी जनता के न्याय काे मानना पड़ता है।बंगाल की जनता के साथ ममता ने न्याय नहीं किया था, जनता ममता को एहसास करा रही है तुम्हारे साथ वही हो रहा है जो तुमने दूसरो के साथ किया, और बरसों किया।
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