युवा देश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है,वोट की राजनीति के लिए उसका बडा़ महत्व है,उसे भी अन्य वर्गों की तरह एक बड़ा वोट बैंक समझा जाता है।वह जिसके साथ होते हैं,उसे चुनावी राजनीति में ज्यादा बड़ी सफलता मिलती है।वैसे तो हर चुनाव में युवाओं का देश के राजनीतिक दल महत्व देते हैं लेकिन इस बार जंतर-मंतर व झारखंड में जेन जी यानी युवाओं के आंदोलन के बाद राजनीतिक दलों के लिए उनका महत्व बढ़ गया है। सभी राजनीतिक दल व उनके नेता युवाओं को पहले से ज्यादा महत्व दे रहे है। माना जा रहा है कि देश में २२ प्रतिशत जेन जी है और जिस राजनीतिक दल की तरफ मात्र पांच प्रतिशत जेनजी का ज्यादा वोट चला जाता है,उसे चुनावी राजनीति में सबसे ज्यादा सफलता मिल सकती है। इसलिए सब जेन जी युवाओं को तरह से प्रभावित करने का प्रयास कर रहे है, उनको खुद से अपनी पार्टी से जोड़ने और पार्टी को उनसे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, बताने और जताने का प्रयास किया जा रहा है कि हम आपके साथ है। हम आपका भला चाहते हैं, हम आपका सबसे ज्यादा सम्मान करते हैं, आप देश की ताकत हो, आप को सत्ता से सवाल पूछना चाहिए।आपको विपक्ष की भूमिका निबाहनी चाहिए।
वैसे तो देश का हर नेता युवाओं को अपनी बातों से प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है लेकिन युवाओं को वही सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है जिसकी बातों से युवाओं से लगे कि इस नेता को हमारे वर्तमान के साथ ही हमारे भविष्य की चिंता है, जो उनकी भाषा में बात कर सकता है,जो उनकी समस्याओं को समझता है, जो उनको मोटिवेट कर सकता है जो उनके समझा सकता है कि तुम अपने परिवार के लिए जितने अहम हो,उससे ज्यादा देश के लिए अहम हो,तुम्हें परिवार के लिए तो बहुत कुछ करना है, साथ ही देश के लिए भी बहुत कुछ करना है।जो समझा सके बता सके कि देश को तुम्हारी जरूरत है, देश में बहुत समस्याएं और तमाम समस्याओं का समाधान तलाशने वाले तुम ही हो।देश के तमाम नेताओं में पीएम मोदी यह काम सबसे अच्छा करते हैं, वह पहले भी ऐसा करते रहे है और दिल्ली आई़टीआई के दीक्षा समारोह में पीएम मोदी फिर एक बार ऐसा करने मे सफल रहे।
पीएम मोदी ने दुनिया से शुरुआत करते हुए कहा युवाओं को आगाह किया कि दुनिया तेजी से बदल रही है,जब बदलाव का दौर आता है तो तब नई चुनौतियां भी आती हैं साथ ही नए अवसर भी सामने आते हैं.दुनिया बदलेगी तो टेक्नालाजी बदलेगी, इंडस्ट्रीज बदलेगी,प्रोफेशन भी बदलेगा और इस दौरान जो सीखेगा वह जीतेेगा।जो नई समस्याओं का नया समाधान खोेजेगा उसके लिए चुनौतियों के बीच अवसर भी होंगे।जो अवसर तो पहचानेगा उसे सफलता भी मिलेगी।
पीएम मोदी ने कैंपस के जीवन व कैपस के बाहर के जीवन के बारे में उनको बताया कि दोनों में बड़ा अंतर होता है।आईटीआई की परीक्षा में सिलेबस होता है,सब साफ रहता है, सब पता रहता है क्या पढ़ना है,कब परीक्षा देनी है,कौन सा असाइनमेंट करना है,जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ आउट आफ सिलेबस होता है,जिंदगी कुछ अलग तरह से चलती है,वहां न कोई कोर्स होता है न प्रश्नपत्र होता है, कई बार खुद ही तय करना पड़ता है कि असली सवाल क्या है,सफल वही होता है जो सवाल को पहचानता है,उस सवाल को पहचानता है जिसे दुनिया ने सवाल मानने ही मना कर दिया था।उन्होंने युवाओं को मोटिवेट करते हुए कहा कि देश का चिप से लेकर शिप तक की जरूरत है और यह सब आपके हाथों ही बनना है।उन्होंने युवाओं का बताया कि देश में उनके लिए एआई,डाटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल,बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी,क्वांटम कम्प्यूटिंग में उनके लिए बहुत संभावना है। उनको याद रखना चाहिए कि वह कुछ भी करेंगे तो उससे देश को विकसित देश बनने में मदद मिलेगी।
पीएम मोदी की तरह युवाओं को राहुल गांधी ने भी संबोधित किया पीएम मोदी ने जहां युवाओं को देश के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया, विकसित भारत के लक्ष्य से जोडा,उनको अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया,उनमें उम्मीद जगाई कि आपका भविष्य अच्छा है,वहीं राहुल गांधी ने युवाओं को यह कहकर निराश किया कि उनकी डिग्री का कोई महत्व नहीं रह गया है,राेजगार के सारे दरवाजे बंद हैं,नरेंद्र मोदी,अमित शाह व अदाणी ने रोजगार को खत्म कर दिया है।वहीं मोदी ने युवाओ की डिग्री के बारे में कहा कि इसकी अहमियत रोजगार पाने तक नहीं है,किसी युवा के पास डिग्री होने का मतलब होता है कि उसके पास समस्या के समाधान की योग्यता है।पीएम मोदी जहां देश के युवाओ को समस्या का समाधान करने वाला मानते हैं वहीं राहुल गांधी देश के युवाओं को देश के लिए समस्या बनाना चाहते हैं,वह चाहते हैं कि युवा बांग्लादेश,नेपाल व श्रीलंका की तरह देश में अराजकता फैलाएं।
पीएम चाहते हैं कि युवा सवाल जरूर पूछें लेकिन सवाल ही न करते रहें, सवाल का जवाब भी तलाशने की हिम्मत करें, वहीं राहुल गांधी चाहते हैं कि देश के युवा विपक्ष की तरह सरकार से खाली सवाल पूछते रहें।युवा है मतलब उनका काम सरकार से सिर्फ सवाल पूछना होना चाहिए।वहीं असदुद्दीन ओवैशी ने तो हद कर दी। उन्होंने इस बात पर आईआईटी दिल्ली प्रशासन की आलोचना की कि दीक्षांत समारोह में वैदिक मंत्रों का जाप किया गया और युवाओं से सिऱ झुकाने का कहा गया।छात्रों को यह निर्देश दिया गया तो यह संविधान के अऩुच्छेद २८ का उल्लंघन है।जो सरकारी फंड से चलने वाले शिक्षण संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाता है। ओवैशी के हिसाब से तो दीक्षा समारोह अनुच्छेद ५१ ए(एच) का भी उल्लंघन है। जो नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने को बढ़ावा देता है।विपक्ष युवाओं से इसीलिए नहीं जुड़ पाता है कि वह युवाओ से चाहता है कि वह सिर्फ सवाल पूछे,सरकार की आलोचना करे जबकि देश का युवा देश के लिए बहुत कुछ रचनात्मक भी करना चाहता है।
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