रांची(वीएनएस)।झारखंड में परीक्षा धांधली के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 13वें दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग तक पहुँच गया है। प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान के नीट-यूजी विवाद के बाद इस्तीफे का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर छात्रों की चिंताओं को दूर न कर पाने का आरोप लगा रहे हैं और 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने तथा सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
झारखंड में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 13वें दिन और तेज़ हो गया; अब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने राज्य सरकार पर उनकी चिंताओं को दूर न कर पाने का आरोप लगाया और कहा कि सोरेन पद संभालने के लायक नहीं हैं। प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने ANI को बताया कि जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मान लेती, हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे। अब हम मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे इस पद के लायक नहीं हैं। उन्हें बेंगलुरु से लौटे हुए काफ़ी समय हो गया है, फिर भी उन्होंने हालात पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
अपनी समस्याएं रखी हैं। अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दे सकते हैं, तो हेमंत सोरेन इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे सकते? NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हफ़्तों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद, धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। छात्र ज़ैद ने भी राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से उनकी मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं सम्मानित सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध करता हूं कि वे हमारी ज़रूरतों को पूरा करें और हमारी चिंताओं को सुनें, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उन्होंने सरकार के साथ बातचीत करके मुद्दे के समाधान के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक दिन पहले दिए गए उस बयान के बाद लिया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार के दरवाजे प्रदर्शनकारियों के लिए खुले हैं। ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले 25 जुलाई को यहां जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शुरू हुआ यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बन गया है।
मंच के एक पदाधिकारी ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत के प्रस्ताव के जवाब में हमने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया है जिसमें आठ छात्र, दो विशेषज्ञ (पत्रकार) और एक अधिवक्ता शामिल हैं। प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
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