झारखंड छात्र आंदोलन स्थगित: हेमंत सोरेन सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम

Posted On:- 2026-08-19




रांची(वीएनएस)।झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन, सरकार द्वारा 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 की जाँच के आदेश के बाद दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। छात्रों ने भ्रष्टाचारियों पर 60 दिनों में कार्रवाई न होने पर बड़े पैमाने पर दोबारा विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जबकि रद्द की गई JSSC-CGL परीक्षा के नियुक्त उम्मीदवार भी सड़कों पर उतर आए हैं।
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन की अगुवाई कर रहे झारखंड के छात्रों ने अपनी मांगें माने जाने के बाद दो महीने के लिए विरोध प्रदर्शन रोकने का फ़ैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, छात्र कुछ समय के लिए आंदोलन रोकने पर सहमत हो गए हैं और उम्मीद है कि वे बुधवार शाम तक विरोध स्थल से हट जाएंगे। इस फ़ैसले के बारे में छात्र शाम को कोई आधिकारिक बयान जारी कर सकते हैं।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग और एक आउटसोर्स एजेंसी द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए। सरकार के इस कदम से उन उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया जिन्होंने ये परीक्षाएं पास की थीं और विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे थे। छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि हम यह आंदोलन स्थगित कर रहे हैं। सरकार ने हमसे 60 दिन का समय मांगा था। उदारता दिखाते हुए हमने उन्हें यह समय दिया। 
उन्होंने कहा कि इन 60 दिनों के भीतर भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। अगर इस समय-सीमा के भीतर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो JPSC-JSSC सुधार मंच इसी जगह पर वापस आएगा और एक बार फिर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेगा। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने का फ़ैसला सबसे ज़्यादा विवादित फ़ैसलों में से एक बन गया है। JSSC-CGL परीक्षा पास करने वाले और बाद में राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में नियुक्त किए गए लगभग 2,000 उम्मीदवार मंगलवार को रांची में सड़कों पर उतर आए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा परीक्षा रद्द करने की घोषणा के एक दिन बाद उन्होंने यह विरोध प्रदर्शन किया।
उम्मीदवारों ने राज्य सचिवालय से बिरसा चौक तक मार्च किया और तर्क दिया कि दूसरों की कथित गलतियों के लिए उन्हें सज़ा नहीं दी जानी चाहिए। प्रदर्शन करने वाले कई उम्मीदवार पहले ही वित्त, गृह, सड़क परिवहन, श्रम और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे सरकारी विभागों में काम शुरू कर चुके हैं। कुछ उम्मीदवारों ने बताया कि झारखंड में पदों के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने दूसरी सरकारी और पब्लिक-सेक्टर की नौकरियों से इस्तीफ़ा भी दे दिया था।



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