राहुल गांधी व कांग्रेस पीएम मोदी को चुनाव में हरा नहीं पा रही है,यह उसकी बड़ी राजनीतिक असफलता है। ऐसा आज तक शायद ही कभी हुआ हो कि कांग्रेस एक बार लोकसभा का चुनाव हारने के बाद दूसरी बार चुनाव जीतकर सत्ता में न लौटी हो,राहुल गांधी के समय यानी उनके नेतृत्व में कांग्रेस पहली बार एक बार चुनाव के दूसरी बार सत्ता में नहीं लौट सकी है,यह तो हुआ ही है, इसी के साथ वह भी हुआ है जो आज तक कभी नहीं हुआ है।यानी कांग्रेस दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं कर सकी इसी के साथ ही तीसरी बार भी वह चुनाव नहीं जीत सकी यानी देश के इतिहास में आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ था कि कांग्रेस लगातार तीन चुनाव हार कर १५ साल के लिए सत्ता से बाहर हो गई हो और इसके बाद भी अगले चुनाव में कांग्रेस के सत्ता के लौटने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
राहुल गांधी पीएम मोदी व भाजपा को हराने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाने में असफल है और इस पर उनको गुस्सा आना चाहिए,अपनी कमजोरी का जानने का प्रयास करना चाहिए तो इस बात पर हैरत जताते हैं कि मोदी सरकार के खिलाफ १२ साल के बाद भी एंटी इनकंबेसी क्यों नहीं है,जनता नाराज क्यों नहीं है,जनता उसे नाराजगी के बाद भी सत्ता से हटा क्यों नहीं रही है।इसकी जगह उनको तो अपने आप से यह सवाल करना चाहिए कि वह पीएम मोदी को हरा क्यों नहीं पा रहे है, वह विपक्ष का नेता बने हुए हैं वह मोदी सरकार का विकल्प क्यों नहीं बना पा रहे हैं, कांग्रेस भाजपा को तीन बार हो गया हरा क्यों नहीं पा रही है, जनता कांग्रेस और विपक्ष को भाजपा का विकल्प क्यों नहीं मान रही है, जनता कांग्रेस व विपक्षी दलों पर भरोसा क्यों नहीं कर रही है। अपने आप से सवाल करने की जगह वह कहते हैं कि भाजपा और मोदी वोट चोरी कर सरकार बना रहे हैं। गलत काम कर के कांग्रेस को हरा रहे हैं।
भाजपा कुछ भी गलत कर रही है तो वह कहने से तो गलत साबित नहीं होता है, वह कई चुनाव हो चुके हैं कि अब तक वोट चोरी का कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर सके हैं जिस पर चुनाव आयोग उसे सबूत माने, सुप्रीम कोर्ट उसे सबूत माने। राष्ट्रपति उसे सबूत माने। जिसे राहुल गांधी व कांग्रेस अब तक वोट चोरी का सबूत मानते आए हैं, उसे चुनाव आयोग,सुप्रीम कोर्ट और यहां तक की राष्ट्रपति भी सबूत नहीं मानती हैं, वह तो राहुल गांधी जब उनसे मिलने जाते हैं तो पूछती हैं कि सबूत कहां है तो राहुल बता नहीं पाते हैं सबूत कहां है।सबूत क्या है। राहुल गांधी बाहर आकर कहते हैं कि राष्ट्रपति ने उनसे सबूत मांगा।उनके पास सबूत होता तो वह लेकर जाते और राष्ट्रपति के पूछने पर कहते कि यह सबूत है। राहुल गांधी व कांग्रेस को वोट चोरी का सबूत पेश करने का कई मौका मिल चुका है। वह एक बार कोई सबूत संवैधानिक संस्थाओं के सामने पेश नहीं कर सके हैं और वोट चोरी का राग अलापते रहते हैं।
एक साल हो गया जनता राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप सच नहीं मानती हैं, अगर वोट चोरी का कोई सबूत राहुल गांधी ने पेश किया होता तो जनता मान लेती और कांग्रेस व विपक्ष को बिहार व पं.बंगाल के चुनाव में जीता देती।राज्य के विधानसभा में जनता कांग्रेस व विपक्ष पर भरोसा नहीं कर रही है, भाजपा पर निरंतर भरोसा कर रही है तो उसकी कोई वजह तो होगी।एक वजह तो यही होगी कि मोदी सरकार ने १२ साल में केंद्र में अच्छा काम करके दिखाया है, उसके अच्छे काम के कारण ही उसे जनता जिन राज्यों में अब तक चुनती नहीं थी,वहां भी चुन रही हैं,इसका उदाहरण ओडिशा के बाद पं.बंगाल में भाजपा की जीत है। पं.बंगाल में चुनाव जीतने के कुछ महीने बाद भाजपा ने वहां हुए उपचुनाव में भाजपा ने दोनों सीट फिर से जीत ली है। इसमें से तो एक सीट नंदीग्राम भाजपा की थी, उसे तो भाजपा ने जीता ही, दूसरी सीट जो पहले एजेयूपी की थी, उसे भी भाजपा ने जीत लिया है और साबित किया है कि जनता का अब पं.बंगाल में ममता से मोहभंग हो गया है।इसके अलावा भाजपा ने असम में नगांव लोकसभा सीट पर कांग्रेस को हरा कर उससे सीट छीन ली और पुड्डुचेरी की सीट एनडीए ने जीती है। यानी छ उपचुनाव में चार भाजपा जीती है और दो टीवीके ने जीते हैं.यानी उपचुनाव में कांग्रेस का सुप़ड़ा साफ हो गया है।
यह मौका है कांग्रेस सहित विपक्ष के नेताओं के लिए सबूत इकट्ठा करने की कि भाजपा ने उपचुनाव वोट चोरी कर जीते हैं। अभी कांग्रेस के पास ४५ दिन का समय है कि वह सबूत जुटाए कि भाजपा ने उपचुनाव कैसे वोट चोरी कर जीते हैं उसके बाद सबूत चुनाव आयोग को सौंपे, सुप्रीम कोर्ट को सौंपे और राष्ट्रपति को सौंपे की देखो इस तरह भाजपा वोट चोरी कर चुनाव जीतती है।वह वोट चोरी के लिए महाराष्ट्र,कर्नाटक आदि चुनाव का उदाहरण देती है,जो चुनाव में विसंगति का उदाहरण है, वोट चोरी का उदाहरण नहीं है। छह उपचुनाव तो हाल ही में हुए है, भाजपा और विपक्ष को वोट चोरी का सबूत जुटाना चाहिए। सबूत जुटाकर ही सीजेआई सूर्यकांत से मिलने जाना चाहिए। राहुल गांधी राष्ट्रपति से मिलने के बाद अब सीजेआई से मिलने से जा रहे हैं तो उनको भले ही कुछ दिन बाद मिलने जाना चाहिए लेकिन वोट चोरी का सबूत जुटाकर ही मिलने जाना चाहिए। क्योंकि इस तरह बिना सबूत के िमलने जाएंगे तो उसके कुछ होना जाना नहीं है।बाहर आकर वही कहेंगे जो राष्ट्रपति से मिलकर आने के बाद कहा है,सीजेआई ने वोट चोरी के आरोप से इंकार नहीं किया है। इससे कुछ नहीं होना है।
राहुल गांधी को मालूम है कि वह चुनाव में मोदी को हरा नहीं पा रहे हैं तो क्यों नहीं हरा पा रहे हैं।इसलिए दूसरे तरीके से सत्ता से हटाने का प्रयास कर रहे हैं यानी जिस तरह बांग्लादेश,नेपाल में अराजकता फैला कर तख्तापलट किया गया है, वैसा ही कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं तो इसमें कांग्रेस विपक्षी दलों को कोई सफलता नहीं मिलनेवाली है,भारत बहुत बड़ा है, बहुत बड़ी आबादी है,पीएम मोदी को जनता का भरोसा हासिल है,हर चुनाव में जनता ने भाजपा व मोदी के पक्ष में जनादेश दिया है। वोट चोरी की झूठ और झूठ के नाम पर अराजकता फैलाकर जनादेश के झुठलाया नहीं जा सकता।राहुल गांधी बहुत लोकतंत्र की बात करते हैं लेकिन जब पीएम मोदी को हटाने की बात आती है तो वह लोकतांत्रिक तरीकों पर भरोसा नहीं करते हैं और अलोकतांत्रिक तरीकों पर भरोसा करते हैं और देश की जनता अलोकंतात्रिक तरीकों को पसंद नहीं करती है।देश की जनता अराजकता पसंद नहीं करती, देश में अराजकता फैलाने वालों को पसंद नहीं करती।सीजेपी और कांग्रेस मेे जमीन आसमान का अंतर कांग्रेस को इस अंतर को बनाए रखना चाहिए,वह नहीं करना चाहिए जो सीजेपी कर रही है।
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