आजीविका डबरी से लरंग सहाय को मिला मछली पालन का सहारा, 15 से 20 हजार रुपये की मछली बेचकर अर्जित की आय

Posted On:- 2026-10-17




खेत में डबरी निर्माण से खुली अतिरिक्त आमदनी की राह, मछली पालन से परिवार की आजीविका को मिल रही मजबूती

अम्बिकापुर (वीएनएस)। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को बढ़ावा देने और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने के लिए संचालित योजनाएं ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक बन रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ऐसी ही एक सकारात्मक तस्वीर अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकालो में देखने को मिली है, जहां ग्रामीण लारंग साय ने अपने खेत में निर्मित आजीविका डबरी में मछली पालन शुरू कर आय का नया जरिया विकसित किया है।

ग्राम बकालो निवासी लरंग साय बताते हैं कि ग्रामीण आजीविका योजना के तहत शासन द्वारा उनके खेत में आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। डबरी बनने के बाद उन्होंने इसमें मछली पालन शुरू किया। मछलियों के तैयार होने पर उन्हें बाजार में बेचकर अब तक लगभग 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं। इससे उन्हें खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का साधन मिला है।

मछली पालन से बढ़ी आमदनी, दोबारा डाला मछली बीज 

लरंग साय ने बताया कि पहली बार मछली पालन से हुई आमदनी ने उन्हें इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने डबरी में दोबारा मछलियां डाली हैं। मछलियों के तैयार होने के बाद उन्हें भी बेचने की योजना है। इससे आने वाले समय में उनकी आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पहले खेत में डबरी नहीं होने के कारण मछली पालन का अवसर नहीं मिल पा रहा था। शासन की योजना से डबरी निर्माण होने के बाद अब वे खेती के साथ मछली पालन भी कर रहे हैं। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

लरंग साय ने अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण और मछली पालन से आय का अवसर मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

आजीविका डबरी के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण के साथ मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। लारंग साय की सफलता इसका उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर ग्रामीण अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



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