आशीष तिवारी (संपादक)
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पढ़ें पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक

Posted On:- 2024-02-10




पंडित जी आजकल आप कुछ बदले बदले से लग रहे है कही कोई चक्कर वक्कर तो नही ना , आपने हमे अभी तक न गुलाब दिया ना प्रपोज किया न चॉकलेट दिया आप कैसे हो गए हो जी। श्रीमती जी की तान सुनते ही वेलेंटाइन बाबा की याद आई और बात बिगड़ती इससे पहले अपनी बेगम के लिए हमने कैडबरी सिल्क चॉकलेट मंगाई तो 1987 में आई फ़िल्म सिंदूर का आनंद बक्षी द्वारा रचित गीत" पतझड़ , सावन , बसन्त , बहार एक बरस के मौसम चार पांचवा मौसम प्यार का इंतजार का " अनायास ही याद आ गया। फ़िल्म सिंदूर के लिए लिखे गए गीत में पांचवा मौसम प्यार का इंतजार का फरवरी महीना ही तो था जो अब वेलेंटाइन डे वीक बोले तो 7 फरवरी रोज डे से प्रारंभ हो कर 14 फरवरी वेलेंटाइन डे पर खत्म होते प्यार के इजहार का मौसम है। वेलेंटाइन बाबा की कृपा से पाश्चात्य सभ्यता के प्रेमियों के लिए वरदान इस वेलेन्टाइन डे के बहाने प्रेमी अपनी अपनी प्रेमिकाओं को रिझाने के लिए रोज (गुलाब) , चॉकलेट , टेडी को प्रेम की निशानी मानते हो पर हमारे यहां तो रामसेतु , ताजमहल प्रेम की निशानी है । राम सीता , राधा किशन से लेकर हीर रांझा ,सिरी फरहाद तक की अमर प्रेम की गाथा भी है। पाश्चात्य वेलेंटाइन वीक और युवाओं के क्षणिक उन्मादी प्रेम को देख कही लगता ही नही की यह लैला मजनू , हीर रांझा,सिरी फरहाद वाला प्रेम होगा । जब तक अन्टी गरम तब तक मेरा सोना मेरा बाबू वरना तू है कौन ?

मेरी बकबक सुनती गोबरहिन टुरी बीच मे बोलती है महराज तहू कहां एलन बेलन के चक्कर मे पड़ गेस हमर गांव मा कथा करईया महराज बतास रहीस जब भगवान राम अऊ लक्ष्मण हर  वनवास के बेरा में रावण के बहिनी सूर्पनखा के नाक कान ल काट भगवा दिस तब ले ये मन जामवंत अउ उंखर पुरखा ल याद करके बेंदरा कस टूरा मन ला घेरत पोटारत हावय ।

एलन बेलन टॉग दे ल छोड़ महाराज तय ये बता  अबके बखर तो हमर यू ट्यूब के फेमस एसपी घलो खेत खार में घुमत टुरी टुरा अउ दरुहा मन के साथ साथ लाज में घलो घुसरे टुरी टुरा मन ल पकड़त हावय वीडियो घलो वायरल करथे त 14 फरवरी के दिन बेचारा मन कोन मेंर मिलहि तहि बता अउ दूसर डाहर लौउड़ी धर के घुमइया लट्ठबाज मन टुरा टुरी मन ला खोजत फिरहि त उंखर खुद के सेटिंग के का होही ?

और अंत में :-
जब ससुराल वाला गेंदा फूल प्राप्त हो जाता है ,
तो वेलेंटाइन वाला गुलाब विलुप्त हो जाता है ।
फिर भी अल्फाजों में छुपे कुछ इशारे होंगे ,
अब कुछ शादीशुदा फिर कुंवारे होंगे ।।

#जय_हो 10 फरवरी 2024 कवर्धा 【छत्तीसगढ़】



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